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ऑफिस की कुर्सी से घंटों चिपककर बैठने से हो सकते हैं बीमार, डॉक्टर से जानें कब और कितनी बार उठें

ऑफिस की कुर्सी से घंटों चिपककर बैठने से हो सकते हैं बीमार, डॉक्टर से जानें कब और कितनी बार उठें

संक्षेप:

डॉक्टर कहते हैं कि हमारी मांसपेशियों, रक्त परिसंचरण और हड्डियों को लगातार गतिशीलता की आवश्यकता होती है, लेकिन लगातार एक ही जगह बैठे रहने से इन सभी अंगों पर दबाव पड़ता है। ऐसे में सेहतमंद बने रहने के लिए यह जानना जरूरी है कि हम रोजाना दिन में कितनी बार अपनी कुर्सी से उठें।

Jan 15, 2026 02:28 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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सेहत से जुड़ी ज्यादातर समस्याएं आज घंटों एक ही जगह बैठे रहने से हो रही हैं। अगर आप भी घंटों तक ऑफिस में एक ही मुद्रा में बैठे रहते हैं, तो यह आदत न केवल आपकी रीढ़ की हड्डी को कमजोर बना रही है, बल्कि आपके मेटाबॉलिज्म को भी सुस्त करती है। डॉक्टरों का स्पष्ट मानना है कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए 'जिम जाने' से ज्यादा जरूरी है 'लगातार न बैठना' है।

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एक्सपर्ट का कहना

शारदा केयर हेल्थसिटी के फिजिशियन डॉ. नीरज कुमार कहते हैं कि आज के समय में अधिकांश लोग ऑफिस या घर पर लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहते हैं, लेकिन लंबे समय बैठने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। डॉक्टर कहते हैं कि हमारी मांसपेशियों, रक्त परिसंचरण और हड्डियों को लगातार गतिशीलता की आवश्यकता होती है, लेकिन लगातार एक ही जगह बैठे रहने से इन सभी अंगों पर दबाव पड़ता है। ऐसे में सेहतमंद बने रहने के लिए यह जानना जरूरी है कि हम रोजाना दिन में कितनी बार अपनी कुर्सी से उठें।

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'30-30 नियम'

विशेषज्ञों का मानना है कि यूं तो कुर्सी से उठने की कोई निश्चित संख्या नहीं है, लेकिन एक व्यावहारिक नियम के अनुसार आपको हर 30 मिनट में अपनी कुर्सी से उठना चाहिए। इसका मतलब है कि एक नॉर्मल ऑफिस टाइम में कम से कम 8-10 बार खड़े होना, चलना या स्ट्रेचिंग करनी चाहिए। हर 30 मिनट के भीतर कम से कम एक बार उठकर शरीर को सक्रिय करना चाहिए। इस छोटे से अंतराल में उठकर चलना, खिंचाव करना या दो मिनट की हल्की वॉक करने से न केवल रक्त परिसंचरण सुधरता है, बल्कि मांसपेशियों में जकड़न भी कम होती है। इससे पैरों, कंधों और पीठ के निचले हिस्से में होने वाले दर्द की समस्या भी काफी हद तक घटती है।

घेर सकती हैं ये समस्याएं

लगातार बैठे रहने से व्यक्ति की मेटाबोलिक दर, यानी शरीर के ऊर्जा उपयोग की क्षमता भी एक समय बाद प्रभावित होने लगती है, जिससे वजन बढ़ना, पीठ दर्द, घुटनों में अकड़न , गलत पोस्चर, ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव और कोलेस्ट्रॉल के स्तर में वृद्धि जैसे जोखिम बढ़ जाते हैं। इसके अलावा, बहुत देर तक बैठे रहने से हृदय रोग और मधुमेह जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए गतिशीलता को दिनचर्या का हिस्सा बनाना आवश्यक है।

कुर्सी से उठकर क्या करें

यह जरूरी नहीं कि हर बार कुर्सी से उठने पर कोई हैवी वर्कआउट ही किया जाए, आप कुछ सरल गतिविधियां भी कर सकते हैं जैसे हल्की स्ट्रेचिंग, पानी लेना, टॉयलेट जाना या कुछ कदम चलना। इससे शरीर को 'आराम' मोड से 'सक्रिय' मोड में जाने का संकेत मिलता है, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है।

सलाह-डॉक्टर कहते हैं कि हमारी आदतें ही हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। थोड़ी-थोड़ी देर के लिए उठकर चलना और नियमित रूप से शरीर को सक्रिय रखना एक सरल लेकिन प्रभावी तरीका है जो आपको स्वस्थ, फ्रेश और ऊर्जा से भरपूर रख सकता है। अपने शरीर की छोटी-छोटी जरूरतों को समझें और उसे नजरअंदाज न करें क्योंकि स्वास्थ्य छोटी आदतों से ही बनता है।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain
मंजू ममगाईं लाइव हिन्दुस्तान में लाइफस्टाइल सेक्शन में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। मंजू ने अपना पीजी डिप्लोमा भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली और ग्रेजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय से किया हुआ है। इन्हें पत्रकारिता जगत में टीवी, प्रिंट और डिजिटल का कुल मिलाकर 16 साल का अनुभव है। एचटी डिजिटल से पहले मंजू आज तक, अमर उजाला, सहारा समय में भी काम कर चुकी हैं। आज तक में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन लीड करने के बाद अब मंजू एचटी डिजिटल में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए काम कर रही हैं। और पढ़ें

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