
सतीश शाह की किडनी फेलियर से मौत, जानें क्या हैं किडनी ट्रांसप्लांट के फायदे और नुकसान और कब पड़ती है डायलिसिस की जरूरत
Advantages And Disadvantages Of Kidney Transplant : डॉ सलिल जैन कहते हैं कि अक्सर लोग किडनी से जुड़ी समस्याओं के लक्षणों को शुरुआती दौर में इग्नोर कर देते हैं और डॉक्टर के पास तब पहुंचते हैं जब समस्या बहुत अधिक बढ़ चुकी होती है और बचने के अवसर बेहद कम होते हैं।
उदास चेहरों पर मुस्कान बिखेरने वाले सतीश शाह अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने 74 साल की उम्र में मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में अपनी आखिरी सांस ली। बताया जा रहा है कि सतीश लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और 25 अक्टूबर को किडनी फेलियर होने की वजह से उनका निधन हो गया। कुछ समय पहले दिए गए अपने इंटरव्यू में सतीश के मित्र और अभिनेता सचिन पिलगांवकर ने बताया था कि सतीश ने साल की शुरुआत में अपना किडनी ट्रांसप्लांट करवाया था और फिलहाल सतीश डायलिसिस पर थे। बता दें, पिछले कुछ सालों में किडनी से जुड़ी बीमारियों से होने वाली मौतों में काफी इजाफा हुआ है। किडनी फेल होना एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें शरीर से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त तरल पदार्थ निकालने की क्षमता समाप्त हो जाती है। ऐसी स्थिति में लंबी अवधि के इलाज की आवश्यकता होती है ताकि किडनी का कार्य किसी अन्य माध्यम से किया जा सके। इसके दो प्रमुख विकल्प हैं-डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट। दोनों ही जीवन बनाए रखने में सक्षम हैं, लेकिन इनके परिणाम, जीवनशैली और दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों में बड़ा अंतर है। जिसके बारे में और ज्यादा जानने और समझने के लिए फोर्टिस अस्पताल (गुड़गांव) के नेफ्रोलॉजिस्ट और रीनल ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट, डॉ सलिल जैन से जानकारी लेते हैं। डॉ सलिल जैन कहते हैं कि अक्सर लोग किडनी से जुड़ी समस्याओं के लक्षणों को शुरुआती दौर में इग्नोर कर देते हैं और डॉक्टर के पास तब पहुंचते हैं जब समस्या बहुत अधिक बढ़ चुकी होती है और बचने के अवसर बेहद कम होते हैं।

किडनी खराब होने के कारण - (Causes Of Kindey Failure)
किडनी खराब होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें सबसे आम है खानपान की खराब आदतें, असंतुलित जीवनशैली, अधिक नमक का सेवन, तला-भुना प्रोसेस्ड फूड, पानी कम पीना, ब्लड प्रेशर, मोटापा, बढ़ा हुआ डायबिटीज, बार-बार पेशाब रोकना, पेनकिलर, एंटीबायोटिक या स्टेरॉयड दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल, शराब और सिगरेट की लत किडनी की कार्यक्षमता को कमजोर बनाकर किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं।
किडनी खराब होने के लक्षण - (Symptoms Of Kidney Failure )
-चेहरे में सूजन
-पैरों और टखनों में सूजन
-अत्यधिक थकान और कमजोरी
- पाचन संबंधी समस्याएं
-पीठ या कमर
-बार-बार या गहरे रंग में पेशाब आना
-पेशाब में झाग बनना
-त्वचा का रूखा होना
क्या होता है किडनी ट्रांसप्लांट (What is Kidney Transplant)
किडनी ट्रांसप्लांट में एक स्वस्थ दाता (डोनर) की किडनी को रोगी के शरीर में सर्जरी द्वारा प्रत्यारोपित किया जाता है ताकि वह फेल हुई किडनी का काम संभाल सके।
किडनी ट्रांसप्लांट के फायदे (Pros)
बेहतर जीवन प्रत्याशा और गुणवत्ता- सफल ट्रांसप्लांट के बाद अधिकांश रोगी डायलिसिस की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहते हैं और बेहतर महसूस करते हैं।
डायलिसिस से मुक्ति- रोगी को नियमित डायलिसिस सत्रों की आवश्यकता नहीं होती, जिससे अधिक ऊर्जा, स्वतंत्रता और लचीला जीवनशैली मिलती है।
बेहतर पोषण और स्वास्थ्य- ट्रांसप्लांट के बाद रोगी अधिक संतुलित आहार ले सकते हैं और तरल पदार्थों पर कम पाबंदियां रहती हैं।
बेहतर हृदय और हड्डियों का स्वास्थ्य- कार्यरत किडनी लंबे समय तक डायलिसिस से जुड़ी हृदय और हड्डियों की जटिलताओं को कम करती है।
किडनी ट्रांसप्लांट के नुकसान (Cons)
हालांकि किडनी ट्रांसप्लांट के कई लाभ हैं, बावजूद इसके इसकी भी कुछ सीमाएं हैं। ये हैं किडनी ट्रांसप्लांट के नुकसान।
सर्जरी से जुड़े जोखिम- किसी भी बड़ी सर्जरी की तरह इसमें रक्तस्राव, संक्रमण या एनेस्थीसिया से जुड़ी जटिलताएं हो सकती हैं।
जीवनभर दवाओं की आवश्यकता- इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं शरीर को नई किडनी अस्वीकार करने से रोकती हैं, लेकिन इनसे संक्रमण, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
रिजेक्शन या किडनी फेल होने की संभावना-अच्छे मिलान और दवाओं के बावजूद, कभी-कभी ट्रांसप्लांट की गई किडनी समय के साथ फेल हो सकती है।
डोनर की सीमित उपलब्धता- उपयुक्त डोनर मिलने में अक्सर लंबा समय लग सकता है, विशेष रूप से जब डोनर मृत व्यक्ति हो।
क्या होता है डायलिसिस ( What is Dialysis)
डायलिसिस एक जीवनरक्षक उपचार है जो तब किया जाता है जब किडनियां शरीर से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त तरल निकालने में असमर्थ हो जाती हैं।
डायलिसिस के फायदे
आसानी से उपलब्ध- किडनी फेल होने के बाद डायलिसिस बिना किसी डोनर की प्रतीक्षा के तुरंत शुरू किया जा सकता है।
बड़ी सर्जरी की आवश्यकता नहीं (शुरुआत में)- अस्थायी हेमोडायलिसिस एक्सेस के साथ इलाज शुरू किया जा सकता है।
जीवन बनाए रखने का सुरक्षित और प्रभावी तरीका- डायलिसिस रक्त से विषाक्त पदार्थों और तरल को निकालने में प्रभावी है, जिससे रोगी कई वर्षों तक जीवित रह सकते हैं।
डायलिसिस के नुकसान
समय लेने वाला और सीमित जीवनशैली- हेमोडायलिसिस आमतौर पर सप्ताह में 3–4 बार, प्रत्येक बार कई घंटे तक चलता है, जिससे व्यक्तिगत और कार्य समय पर असर पड़ता है।
जीवन की गुणवत्ता में कमी- थकान, आहार और तरल पदार्थों पर कठोर नियंत्रण तथा यात्रा संबंधी कठिनाइयां आम होती हैं।
लंबे समय में जटिलताएं- डायलिसिस से एनीमिया, हड्डियों की कमजोरी, हृदय रोग और मृत्यु दर बढ़ने का खतरा रहता है।
मानसिक और सामाजिक प्रभाव- लंबे उपचार की थकान और दिनचर्या मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
ट्रांसप्लांट और डायलिसिस में क्या है बेहतर
यदि रोगी चिकित्सकीय रूप से फिट है और उपयुक्त डोनर उपलब्ध है, तो किडनी ट्रांसप्लांट एक लंबा, स्वस्थ और स्वतंत्र जीवन जीने का सबसे अच्छा विकल्प है। डायलिसिस की तुलना में, किडनी ट्रांसप्लांट को श्रेष्ठ और दीर्घकालिक समाधान माना जाता है, क्योंकि यह बेहतर जीवन गुणवत्ता, कम जटिलताओं और अधिक जीवित रहने की संभावना प्रदान करता है।
किडनी फेलियर से बचाव के उपाय - (Kidney Failure Prevention Tips)
-दिनभर में कम से कम 2-3 लीटर पानी पिएं।
-भोजन में नमक और तेल का प्रयोग कम करें।
-ताजे फल, सब्जियां और साबुत अनाज डाइट में शामिल करें।
-धूम्रपान और शराब से दूर रहें।
-ब्लड प्रेशर और शुगर को कंट्रोल में रखें।
-बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर या दवाएं न लें।
-हर 6 महीने में किडनी फंक्शन टेस्ट करवाएं।

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