Ramadan 2026 : डायबिटीज रोगियों के लिए रोजा रखना कितना सेफ? ब्लड शुगर कंट्रोल रखेंगे ये 6 टिप्स

Feb 18, 2026 07:40 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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अगर आप पहले से ही डायबिटीज रोगी हैं तो आपको रमजान के दौरान अपनी सेहत का खास ख्याल रखने की जरूरत होती होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि खान-पान के समय और नींद के चक्र में बदलाव का सीधा असर मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है, जिससे ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव का जोखिम बढ़ जाता है।

Ramadan 2026 : डायबिटीज रोगियों के लिए रोजा रखना कितना सेफ? ब्लड शुगर कंट्रोल रखेंगे ये 6 टिप्स

रमजान 2026 इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना है। जो इस्लाम धर्म को मानने वाले लोगों के लिए बेहद पाक होता है। इस पूरे महीने मुस्लिम धर्म को मानने वाले रोजेदार भूखे-प्यासे रहकर रखते हुए अल्लाह की इबादत करते हैं। रमजान के दौरान रोजा रखने वाले लोगों के लिए कई सख्त और आध्यात्मिक अनुशासन पर आधारित नियम बनाए गए हैं। जिनका पालन ना करने पर रोजा टूट जाता है। ऐसे में अगर आप पहले से ही डायबिटीज रोगी हैं तो आपको रमजान के दौरान अपनी सेहत का खास ख्याल रखने की जरूरत होती होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि खान-पान के समय और नींद के चक्र में बदलाव का सीधा असर मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है, जिससे ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव का जोखिम बढ़ जाता है।

शारदाकेयर-हेल्थसिटी के जनरल मेडिसिन डॉ. नीरज कुमार कहते हैं कि दिन भर भूखे रहने से कुछ लोगों में लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) की समस्या हो सकती है। जबकि इफ्तार के दौरान अधिक मीठे का सेवन या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट खाने से ब्लड शुगर अचानक बढ़ (हाइपरग्लाइसीमिया) सकती है। यही वजह है कि रमजान में डायबिटीज मरीजों को खास सावधानी रखनी चाहिए।

डायबिटीज रोगियों को कब नहीं रखना चाहिए रोजा?

रोजे का असर हर रोगी के शरीर पर अलग-अलग तरह से पड़ता है। यह इस बात पर अधिक निर्भर करता है कि व्यक्ति के शरीर में शुगर की मात्रा कितनी कंट्रोल है, कौन-सी दवाएं चल रही हैं और उसकी ओवरऑल सेहत कैसी है। जिन लोगों की डायबिटीज कंट्रोल में नहीं है, बार-बार शुगर लो होती रहती है या गंभीर जटिलताएं हैं, उन्हें रोजा न रखने की सलाह दी जा सकती है। इसलिए रमजान से पहले डॉक्टर से मिलना बहुत जरूरी है। डॉक्टर दवाओं का समय बदल सकते हैं और यह तय कर सकते हैं कि रोजा रखना सुरक्षित है या नहीं।

रोजा रखते समय डायबिटीज रोगी रखें इन बातों का खास ख्याल

-सहूर (फज्र की नमाज से पहले खाया जाने वाला भोजन) में ऐसा भोजन शामिल करें, जो धीरे-धीरे पचता हो। आप इसमें साबुत अनाज, प्रोटीन, हेल्दी फैट और फाइबर से भरपूर चीजें शामिल कर सकते हैं।

-रोजे के दौरान नमक और मीठे का अधिक सेवन करने से बचें, क्योंकि ऐसे फूड शरीर में पानी की कमी और शुगर में उतार-चढ़ाव का कारण बन सकते हैं।

-इफ्तार में रोजा धीरे-धीरे खोलें। इसके लिए पहले पानी लें, थोड़ी मात्रा में खाएं और फिर संतुलित भोजन करें। इस दौरान ज्यादा खाने से बचें।

-ब्लड शुगर की नियमित रूप से जांच करवाएं। चक्कर आना, पसीना आना, बहुत थकान, उलझन या बहुत प्यास लगने जैसे लक्षण महसूस होने पर तुरंत शुगर चेक करें। शुगर बहुत कम या बहुत ज्यादा हो तो डॉक्टरी सलाह के अनुसार रोजा तोड़ना जरूरी है।

-रोजे के दौरान पानी का उचित सेवन भी बेहद जरूरी है। इफ्तार से सहूर के बीच पर्याप्त पानी पिएं ताकि डिहाइड्रेशन से बचे रहें। पानी की कमी से शुगर कंट्रोल बिगड़ सकता है।

-शारीरिक गतिविधि हल्की रखें। टहलना ठीक है, लेकिन रोजा के दौरान बहुत ज्यादा मेहनत वाले व्यायाम से लो शुगर का खतरा बढ़ सकता है।

सलाह- डॉक्टरों की मानें तो डायबिटीज होने का मतलब यह नहीं कि रोजा नहीं रखा जा सकता। सही जानकारी, योजना और डॉक्टर की सलाह के बाद ज्यादातर लोग ब्लड शुगर कंट्रोल रखते हुए सुरक्षित तरीके से रोजा रख सकते हैं।

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लेखक के बारे में

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शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।

करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।

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