
PCOS हो या डायबिटीज, डाइटिशियन से जानें किस बीमारी में खाएं कौन सी दाल
Nutritionist Shares Which Dal Best For Which Health Problem : रोजमर्रा के जीवन में खाई जाने वाली अलग-अलग तरह की दालें, आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का एक ऐसा मेल है जो आपकी थाली को औषधि में बदल सकता है। पोषण विशेषज्ञों की मानें तो हर दाल की अपनी एक अलग तासीर और गुण होता है।
ारतीय थाली में चावल और रोटी के साथ परोसी जाने वाली दाल सिर्फ भूख शांत करके स्वाद का ही ख्याल नहीं रखती बल्कि अनजाने में यह आपकी सेहत से जुड़ी कई समस्याओं का भी इलाज कर सकती है। बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि रोजमर्रा के जीवन में खाई जाने वाली अलग-अलग तरह की दालें, आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का एक ऐसा मेल है जो आपकी थाली को औषधि में बदल सकता है। पोषण विशेषज्ञों की मानें तो हर दाल की अपनी एक अलग तासीर और गुण होता है, जो उसे 'सुपरपावर' में बदल सकता है। फेमस डाइटिशियन और यूके से एमएससी ग्लोबल पब्लिक हेल्थ न्यूट्रिशन और राष्ट्रीय मधुमेह प्रशिक्षक दीपशिखा जैन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करके बताया है कि अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं के लिए कौन सी दाल खानी चाहिए।
किस समस्या से राहत पाने के लिए कौन सी दाल खानी चाहिए
हृदय स्वास्थ्य खराब होने पर (Poor heart health)
जिन लोगों को हृदय संबंधी समस्याएं रहती हैं, उन्हें ऐसे पोषक तत्वों को डाइट में लेने की सलाह दी जाती है जो हृदय के कार्य और वजन नियंत्रण दोनों में सहायक होते हैं। हृदय स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए डाइट में काबुली चना (Chickpeas) खाएं। यह पोटैशियम, फाइबर और मैग्नीशियम से भरपूर होता है, जो हृदय स्वास्थ्य को सुधारकर वजन नियंत्रण में मदद करता है।
पीसीओएस
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) से पीड़ित महिलाओं को मूंग दाल का सेवन करने से फायदा हो सकता है। पोषण विशेषज्ञ के अनुसार यह दाल इस स्थिति से जुड़े लक्षणों को कम करने में मदद करती है। इस दाल को पचाना आसान होता है, जिससे पेट फूलने की समस्या परेशान नहीं करती है। इतना ही नहीं इस दाल का सेवन हार्मोनल संतुलन बिगड़ने की संभावना को भी कम करता है, जिससे सूजन भी कम होती है।
डायबिटीज या प्री-डायबिटीज
डायबिटीज या प्री-डायबिटीज रोगियों के लिए मसूर दाल (Masoor dal) का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद उच्च फाइबर शुगर के अवशोषण को धीमा करके ब्लड शुगर स्पाइक्स कम करता है। जिससे शुगर लेवल कंट्रोल रहता है और इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार होता है। साल 2024 में प्रकाशित एक अध्ययन में इस बात की पुष्टि की गई, जिसमें हृदय रोग और कोलोन कैंसर जैसी अन्य प्रमुख दीर्घकालिक बीमारियों के जोखिम को कम करने में फाइबर के महत्व को दर्शाया गया। घुलनशील फाइबर पाचन तंत्र में एक जेल बनाकर कार्य करता है, जो बदले में भोजन के बाद रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि को कम करता है। इससे रक्त शर्करा का स्तर स्थिर और सुरक्षित बना रहता है।
पेट की समस्याएं
सूजन और एसिडिटी, जैसी पेट से जुड़ी समस्याएं आजकल लोगों के बीच बेहद कॉमन हैं। ऐसे में डाइटिशियन दीपशिखा दाल चुनने के महत्व पर जोर देते हुए कहती हैं कि गट हेल्थ से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए आसानी से पचने वाली दाल का सेवन किया जाना चाहिए। भारी दालें खाने से पाचन तंत्र पर अधिक दबाव पड़ सकता है। छिलके वाली मूंग दाल आसानी से पचने वाली दाल है। इस दाल में एंटी-न्यूट्रिएंट्स कम मात्रा में मौजूद होते हैं, जिससे पोषक तत्व आसानी से अवशोषित हो जाते हैं और पेट पर ज्यादा जोर नहीं पड़ता।

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