शराब-स्मोकिंग से भी ज्यादा घातक है ये 1 चीज, डॉक्टर ने दे दी चेतावनी
शराब, स्मोकिंग और मोटापे को सेहत के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक समझते हैं तो जरा डॉक्टर की इस बात को भी जान लें। जिसमे उन्होंने बताया कि इन सबसे ज्यादा खतरनाक अकेलापन है। अकेलेपन से कई बीमारियों का खतरा रहता है।

सेहत को खराब करने में कई सारी चीजें जिम्मेदार होती हैं। खराब खानपान, एक्सरसाइज ना करना, मोटापा और उसके साथ-साथ शराब-सिगरेट। जो धीरे-धीरे आपकी हेल्थ को पूरी तरह से तबाह कर देती है। लेकिन हेल्थ एजुकेटर और डॉक्टर एरिक बर्ग की सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से वायरल हो रही। जिसमे उन्होंने बताया कि मोटापा और शराब-स्मोकिंग से भी ज्यादा घातक और नुकसानदेह एक चीज है। जो धीरे-धीरे सेहत को बर्बाद कर देती है। जानकर हैरानी होगी कि कैसे मामूली सी लगने वाली ये चीज शरीर को खोखला कर देती है। एरिक ने बताया कि आपकी बॉडी अकेलेपन में कभी ठीक नहीं हो सकती। सोशल मीडिया पोस्ट पर एरिक ने लिखा कि अकेलापन आपकी लाइफ के लिए मोटापे, फिजिकल इनएक्टिविटी और शराब से भी ज्यादा खतरनाक है। ये दिनभर में 15 सिगरेट स्मोक करने के बराबर ही शरीर को नुकसान पहुंचाती है। और, आपकी बॉडी कभी भी अकेलेपन के माहौल में ठीक नहीं हो सकती। ये सच है कि अकेलापन फिजिकल और मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचाता है।
कॉर्डियोवस्कुलर हेल्थ का रिस्क
अगर किसी इंसान को अकेले में लगातार रहना पड़े तो इससे शरीर के सिस्टम में इन्फ्लेमेशन ट्रिगर होता है और स्ट्रेस बढ़ता है। कॉर्टिसोल हार्मोंस, ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं और जब आप लगातार अकेले रहते हैं तो इससे हार्ट अटैक का रिस्क, स्ट्रोक और हार्ट डिसीज भी बढ़ती है।
इम्यून सिस्टम को करती है कमजोर
लगातार लंबे टाइम तक अकेलापन इम्यून सेल्स में जीन एक्सप्रेशन को बदल देता है, जिससे शरीर वायरल इन्फेक्शन से लड़ने में कमजो हो जाता है। अगर इंसान लगातार तनाव कर रहा है तो ये नेचुरल हीलिंग को रोकता है और रिकवरी टाइम को भी बढ़ा देता है।
डिप्रेशन और एंजायटी का रिस्क
जब आप अकेले होते हैं और आसपास लोग नहीं होते कोई सोशल कनेक्शन नहीं होता है तो ये आपके दिमाग से रोज के स्ट्रेस को बाहर निकालने में मदद करते है और जब यहीं सोशल कनेक्शन नहीं होता तो इंसान को क्रॉनिक एंजायटी होती है और कई बार डिप्रेशन के लक्षण दिखने लगते हैं।
नींद नहीं आती
अगर कोई इंसान लगातार अकेले रहता है तो दिमाग के एक कोने में उसके डर बैठा रहता है और यहीं डर उसकी नींद के पैटर्न को खराब करता है जिससे अच्छी नींद नहीं आती और थकान महसूस होती है। धीरे-धीरे यहीं सब उसके सोचने-समझने की क्षमता को भी प्रभावित करते हैं।
सोचने-समझने की क्षमता में कमी
जो लोग सोशल होते है वो बातों को तेजी से सोचते-समझते हैं। उनके दिमाग का एक हिस्सा तेजी से काम करता है और रिस्पॉन्स देता है। लेकिन जो लोग लंबे टाइम तक अकेले रहते हैं उनके दिमाग में सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है और डिमेंशिया जैसी बीमारी का खतरा रहता है।


