एकाग्रता बढ़ानी है? न्यूरोलॉजिस्ट की बताई ये 7 आदतें आज से ही अपनाएं
अगर आपकी एकाग्रता कमजोर हो रही है और याददाश्त पहले जैसी तेज नहीं रही, तो कुछ छोटी-छोटी रोज की आदतें दिमाग की सेहत को बेहतर बना सकती हैं। न्यूरोलॉजिस्ट ने कुछ आसान लेकिन असरदार उपाय साझा किए हैं।

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में फोकस और याददाश्त कमजोर होना एक आम समस्या बनती जा रही है। लंबे समय तक स्क्रीन देखना, नींद की कमी, मल्टीटास्किंग और मानसिक तनाव सीधे तौर पर दिमाग पर असर डालते हैं। ऐसे में रोज की कुछ सही आदतें ब्रेन हेल्थ को बेहतर बना सकती हैं।
यथार्थ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन और ग्रुप डायरेक्टर (न्यूरोलॉजी) डॉ. कुणाल बहारानी के अनुसार, दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए किसी चमत्कारी उपाय या बड़े लाइफस्टाइल बदलाव की जरूरत नहीं होती। असली फर्क उन छोटी-छोटी आदतों से पड़ता है, जिन्हें हम रोज बिना सोचे-समझे अपनाते या नजरअंदाज करते हैं। सुबह की दिनचर्या से लेकर सोने के समय तक की आदतें धीरे-धीरे हमारे फोकस, याददाश्त और भावनात्मक संतुलन को आकार देती हैं। उनका कहना है कि दिमाग भी मांसपेशियों की तरह है- जैसा व्यवहार आप रोज करते हैं, वैसा ही उसका प्रदर्शन बनता है।
- सुबह प्राकृतिक रोशनी लेना: डॉ. बहारानी बताते हैं कि सुबह की धूप दिमाग की जैविक घड़ी (सर्केडियन रिदम) को सही रखती है। सुबह 10–15 मिनट खिड़की के पास बैठना या वॉक पर जाना भी फोकस और मूड सुधारने में मदद करता है।
- एक समय में एक काम करें: मल्टीटास्किंग दिमाग पर अतिरिक्त दबाव डालती है। एक समय में एक काम करने से ध्यान केंद्रित रहता है और याददाश्त मजबूत होती है।
- लिखने की आदत डालें: डायरी लिखना या अपने विचार कागज पर उतारना दिमाग को हल्का करता है। यह तनाव कम करता है और भावनाओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद करता है।
- रोजाना शारीरिक गतिविधि: हल्की एक्सरसाइज, योग या वॉक से दिमाग तक रक्त प्रवाह बढ़ता है जिससे सीखने और याद रखने की क्षमता बेहतर होती है।
- समय पर सोना: अनियमित नींद दिमाग की रिकवरी प्रक्रिया को प्रभावित करती है। पर्याप्त और समय पर नींद याददाश्त और भावनात्मक संतुलन के लिए बेहद जरूरी है।
- डिजिटल डिटॉक्स: लगातार मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल करने से दिमाग हमेशा अलर्ट मोड में रहता है। दिन में कुछ समय बिना स्क्रीन के बिताना ध्यान क्षमता को सुधारता है।
- भावनात्मक संतुलन के लिए छोटे ब्रेक: गहरी सांसें लेना, प्रतिक्रिया देने से पहले रुकना और अपनों के साथ समय बिताना मानसिक स्थिरता को बढ़ाता है।
नोट: डॉ. बहारानी के अनुसार, इन आदतों को रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करने से फोकस, मेमोरी और मानसिक संतुलन में लंबे समय तक सकारात्मक बदलाव देखा जा सकता है। इसके अलावा किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए अन्य डॉक्टर से उचित सलाह ले सकते हैं।

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