
मोटापा, डायबिटीज और हार्ट रोग नहीं अलग-अलग समस्याएं, एक्सपर्ट ने बताया कैसे जुड़े हैं एक दूसरे से तार
मोटापा, डायबिटीज और हार्ट रोग- पहले इन्हें अलग-अलग समस्याओं की तरह देखा जाता था, लेकिन अब शोध दिखा रहे हैं कि ये एक ही चेन की कड़ियों की तरह एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं।
भारत में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टर अब तीन ऐसी बीमारियों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं, जो आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं मोटापा, डायबिटीज और हार्ट रोग। पहले इन्हें अलग-अलग समस्याओं की तरह देखा जाता था, लेकिन अब शोध दिखा रहे हैं कि ये एक ही चेन की कड़ियों की तरह एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं। इस संबंध को समझना लोगों, परिवारों और समुदायों के लिये बेहद जरूरी है।
मोटापा सिर्फ बढ़ा हुआ वजन नहीं
मोटापा सिर्फ बढ़े हुए वजन का मामला नहीं है, यह शरीर की मेटाबॉलिज्म पर असर डालने वाली एक लंबी बीमारी है। नए शोध बताते हैं कि शरीर की चर्बी सिर्फ जमा नहीं रहती, बल्कि हार्मोन जैसे केमिकल भी छोड़ती है, जो शरीर की इंसुलिन प्रणाली को बिगाड़ देते हैं। इससे शरीर धीरे-धीरे इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता। समय के साथ यह स्थिति टाइप 2 डायबिटीज में बदल जाती है। चिंता की बात यह है कि यह प्रक्रिया अब कम उम्र में ही शुरू हो रही है। कई डॉक्टर युवा लोगों में पेट के आसपास बढ़ी चर्बी के कारण डायबिटीज के शुरुआती संकेत देख रहे हैं। पेट की यह चर्बी सबसे ज्यादा हानिकारक मानी जाती है क्योंकि यह अंदरूनी अंगों के पास होती है और ऐसे पदार्थ छोड़ती है, जो धमनियों को सख्त और ब्लॉकेज-प्रोन बनाते हैं। जिसकी वजह से भविष्य में व्यक्ति के लिए हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
डायबिटीज और हार्ट रोग के बीच भी मजबूत रिश्ता
खून में लगातार बढ़ी हुई शुगर रक्त वाहिकाओं को अंदर से नुकसान पहुंचाती है, जिससे उनमें ब्लॉकेज की स्थिति बन सकती है। टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों में हार्ट रोग का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में 2 से 4 गुना ज्यादा होता है। कई बार व्यक्ति को कोई लक्षण नहीं दिखते, और नुकसान चुपचाप बढ़ता रहता है। इसलिए डॉक्टर अब ऐसे लोगों को भी जांच कराने की सलाह देते हैं जिनके परिवार में डायबिटीज या हार्ट रोग की हिस्ट्री रही हो।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (वैशाली) में रोबोटिक, मिनिमल एक्सेस और बैरिएट्रिक सर्जन डॉ. विजय एस पांडे कहते हैं कि आज के समय में बढ़ता तनाव, कम नींद और अनियमित काम के घंटे शरीर के महत्वपूर्ण हार्मोन जैसे कॉर्टिसोल (तनाव हार्मोन), घ्रेलिन (भूख बढ़ाने वाला) और लेप्टिन (पेट भरने का संकेत देने वाला) को बुरी तरह प्रभावित करते हैं, जिससे भूख, वजन, मूड और नींद का संतुलन बिगड़ जाता है, और इसके कारण मोटापा, डायबिटीज, चिंता और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि मोटापा सिर्फ खान-पान या एक्सरसाइज से जुड़ा मुद्दा नहीं है, यह पूरी जीवनशैली से जुड़ा मामला है। अच्छी खबर यह है कि इस चक्र को तोड़ा जा सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार, यदि व्यक्ति अपना वजन 5–10 प्रतिशत भी कम कर ले, तो इंसुलिन का काम बेहतर और हार्ट रोग का खतरा काफी कम हो जाता है। छोटे कदम जैसे रोजाना चलना, संतुलित भोजन करना, हल्की-फुल्की स्ट्रेंथ एक्सरसाइज और पूरी नींद लंबे समय में बड़ा फर्क ला सकते हैं। जिन लोगों को जोखिम अधिक है, उनके लिये GLP-1 जैसी नई दवाएं (विशेषज्ञ की निगरानी में)भी मददगार हो रही हैं ।

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Manju Mamgainलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




