
20-30 साल की महिलाओं में क्यों बढ़ रहे हैं सर्वाइकल कैंसर के मामले? फोर्टिस के डॉक्टर ने बताए कारण
Cervical Cancer Awareness Month 2026 : सर्वाइकल कैंसर के पीछे की असल कहानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) से शुरू होती है। यह कोई दुर्लभ संक्रमण नहीं है, बल्कि एक बेहद सामान्य स्थिति है जिससे ज्यादातर लोग जीवन में कभी न कभी रूबरू होते हैं।
एक समय था जब सर्वाइकल कैंसर को बढ़ती उम्र के रोगों में शामिल किया जाता था। जिस बीमारी का जिक्र कभी 'उम्रदराज' महिलाओं के संदर्भ में होता था, वह अब डरावनी तेजी से 20 और 30 साल की युवा महिलाओं के जीवन में भी दस्तक दे रही है। भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के डॉक्टर इस चिंताजनक बदलाव को देख रहे हैं-जहां जीवन की शुरुआत और करियर की उड़ान भरने वाली उम्र में महिलाएं इस जानलेवा निदान के सामने खड़ी हैं। यह सिर्फ एक मेडिकल रिपोर्ट का आंकड़ा नहीं है, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है जो हमारी स्वास्थ्य नीतियों, स्क्रीनिंग की आदतों और रोकथाम के पुराने तरीकों को फिर से परखने पर मजबूर करती है।
सर्वाइकल कैंसर के पीछे छिपा बड़ा कारण
फोर्टिस अस्पताल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अर्चित पंडित कहते हैं कि सर्वाइकल कैंसर के पीछे की असल कहानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) से शुरू होती है। यह कोई दुर्लभ संक्रमण नहीं है, बल्कि एक बेहद सामान्य स्थिति है जिससे ज्यादातर लोग जीवन में कभी न कभी रूबरू होते हैं। अमूमन हमारा शरीर एक योद्धा की तरह इस वायरस को खुद ही मात दे देता है, लेकिन चुनौती तब खड़ी होती है जब वायरस के खतरनाक स्वरूप (खासकर टाइप 16 और 18) शरीर में अपनी पैठ बना लेते हैं।
वायरस कब बनता है कैंसर का कारण
जब यह वायरस सालों तक गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) की कोशिकाओं में छिपा रहता है, तो यह वहां की संरचना को धीरे-धीरे बदलने लगता है। ये सूक्ष्म परिवर्तन एक दिन कैंसर की शक्ल ले लेते हैं। आज की युवा पीढ़ी में इस बीमारी के बढ़ते मामलों के पीछे विशेषज्ञों की राय साफ है-बदलता सामाजिक व्यवहार, टीकाकरण (Vaccination) को लेकर दिखाई गई ढिलाई और 'हमें कुछ नहीं होगा' वाली मानसिकता। यह वह खामोश संकट है जिसे सिर्फ जागरूकता और सही समय पर दी गई वैक्सीन की ढाल से ही रोका जा सकता है।
सर्वाइकल कैंसर का कारण
सर्वाइकल कैंसर की जड़ें ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) खासतौर पर इसके 'हाई-रिस्क' वेरिएंट टाइप 16 और 18 से जुड़ी हुई हैं। जो चुपचाप शरीर में पैठ बनाने के लिए बदनाम हैं। यूं तो यह एक बेहद सामान्य संक्रमण है और अक्सर हमारा इम्यून सिस्टम इसे खुद ही साफ कर देता है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह संक्रमण लंबे समय तक बना रह सकता है। ऐसे मामलों में समय के साथ गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में असामान्य परिवर्तन होते हैं, जो आगे चलकर सर्वाइकल कैंसर में बदल सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यौन व्यवहार में बदलाव, टीकाकरण में देरी और रोकथाम उपायों के प्रति कम जागरूकता, युवा महिलाओं में संक्रमण की बढ़ती दर के प्रमुख कारण हैं।
वायरस की पहचान कब होती है कठिन
डॉक्टर बताते हैं कि शुरुआती दौर में कम उम्र की कई महिला मरीजों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं नजर आता,जिससे समय पर पहचान करना कठिन हो जाता है। असामान्य योनि रक्तस्राव, पेल्विक दर्द या असामान्य स्राव जैसे लक्षण अक्सर तब दिखाई देते हैं जब बीमारी आगे बढ़ चुकी होती है। यह तथ्य प्रारंभिक जांच और HPV टीकाकरण की अत्यधिक आवश्यकता को रेखांकित करता है।
भारतीय महिलाओं में दूसरा बड़ा रोग सर्वाइकल कैंसर
हालिया अध्ययनों से संकेत मिलता है कि 35 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में वैश्विक स्तर पर सर्वाइकल कैंसर की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर बना हुआ है, और अब नए मामलों में युवा महिलाओं का अनुपात भी बढ़ रहा है। ऑन्कोलॉजिस्ट्स के अनुसार, इसका एक प्रमुख कारण HPV टीकाकरण का कम कवरेज और अनियमित सर्वाइकल स्क्रीनिंग है। कई युवा महिलाएं इस बात से अनजान हैं कि 21 वर्ष की आयु से या यौन सक्रियता के बाद नियमित जांच से कैंसर-पूर्व परिवर्तनों का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
रोकथाम
कैंसर के खिलाफ इस जंग में HPV वैक्सीन किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है, बशर्ते इसे सही समय पर अपनाया जाए। चिकित्सा विज्ञान का यह स्पष्ट मत है कि वायरस के संपर्क में आने से पहले ली गई वैक्सीन भविष्य के बड़े खतरों को जड़ से खत्म करने की ताकत रखती है। इसीलिए, 9 से 12 वर्ष की किशोरियों के लिए इसकी दो खुराकें एक सुनहरे निवेश की तरह हैं, जबकि 13 से 25 वर्ष की महिलाओं के लिए तीन खुराकों का परामर्श दिया जाता है।
इसके अलावा 30 की उम्र पार कर चुकी महिलाओं के लिए पैप स्मीयर (Pap Smear) और HPV परीक्षण किसी भी असामान्य बदलाव को कैंसर बनने से बहुत पहले ही पकड़ लेते हैं। आज जरूरत इस बात की है कि हम इन जांचों को संकोच नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। जब बीमारी का पता शुरुआती दौर में ही चल जाता है, तो उपचार न केवल आसान होता है बल्कि पूरी तरह सफल भी होता है।

लेखक के बारे में
Manju Mamgain
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