दाल के सफेद झाग को यूरिक एसिड से जोड़ना क्या वाकई सही है ? कैंसर विशेषज्ञ ने किया खुलासा
Is foam from boiling dal dangerous : अगर आप भी दाल उबालते समय इस सफेद झाग को यूरिक एसिड का खतरा मानकर डर से हटाती रहती है तो रायपुर के फेमस ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. जयेश शर्मा ने आपको एक सलाह दी है।

रसोई घर में खाना पकाते समय एक सवाल जो अकसर घर की महिलाओं के लिए चिंता का कारण बना रहता है वो है, दाल उबालते समय सफेद झाग का दिखाई देना। सोशल मीडिया पर दाल के ऊपर तैरने वाले इस सफेद झाग को यूरिक एसिड और जोड़ों के दर्द की वजह बताकर डराया जाता है। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा कुछ है या यह भी सिर्फ एक मिथक है। अगर आप भी दाल उबालते समय इस सफेद झाग को यूरिक एसिड का खतरा मानकर डर से हटाती रहती है तो रायपुर के फेमस ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. जयेश शर्मा ने आपको एक सलाह दी है। जी हां, डॉ. जयेश शर्मा ने इस विषय पर अपना वैज्ञानिक दृष्टिकोण शेयर किया है। डॉ. जयेश कहते हैं कि दाल के ऊपर तैरने वाला यह सफेद झाग कोई धीमा जहर नहीं बल्कि दाल में मौजूद प्राकृतिक प्रोटीन और सैपोनिन्स की एक प्रक्रिया है। आइए जानते हैं आखिर क्यों दाल उबालते समय नजर आता है सफेद झाग और सेहत के लिए क्या वाकई यह कोई खतरा पैदा करता है।
दाल उबालते समय क्यों नजर आता है सफेद झाग?
दाल उबालते समय नजर आने वाला सफेद झाग मुख्य रूप से प्रोटीन, स्टार्च और सैपोनिन (saponins) नामक प्राकृतिक कंपाउंड से मिलकर बनता है। सैपोनिन पौधों में नेचुरली पाया जाने वाला एक कंपाउंड है, जो पौधों को कीटों और संक्रमण से बचाता है। इसका नाम लैटिन शब्द 'सैपो'(साबुन) से आया है, क्योंकि यह पानी में घुलकर साबुन जैसा झाग बनाता है।

सेहत के लिए खतरा है यह झाग?
डॉ. जयेश शर्मा के अनुसार, यह झाग पूरी तरह सुरक्षित है और इसे 'जहर' या 'एंटी-न्यूट्रिएंट' कहना गलत है। डॉ. जयेश कहते हैं कि सीमित मात्रा में सैपोनिन का सेवन एंटी-इंफ्लेमेटरी और कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद कर सकता है। इसके विपरीत सैपोनिन की अधिकता दाल को कड़वा बनाकर IBS (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम) वाले लोगों में गट लाइनिंग को इरिटेट कर सकती है, लेकिन सामान्य लोगों के लिए यह हानिकारक नहीं है।
क्या दाल को प्रेशर कुकर में पकाना सही है?
कुछ लोगों को यह चिंता रहती है कि प्रेशर कुकर में दाल पकाने से झाग अंदर ही रह जाता है और बाद में पेट फूलने का कारण बनता है। लेकिन डॉ. शर्मा के अनुसार इस बात में कोई सच्चाई नहीं है। डॉ. शर्मा कहते हैं कि ब्लोटिंग कभी भी दाल के झाग की वजह से नहीं होती है। यह दाल में मौजूद कुछ कॉम्प्लेक्स शुगर, जिन्हें FODMAPs कहा जाता है, की वजह से होती है। जो शरीर द्वारा आसानी से पचती नहीं हैं और आंत में बैक्टीरिया द्वारा फर्मेंट होकर गैस बनाती हैं। डॉ. शर्मा कहते हैं कि यही वजह है कि दाल का सेवन करने पर कुछ लोगों को कम या ज्यादा पेट फूलने की समस्या हो सकती है।
दाल पकाने का सही तरीका क्या है?
कैंसर विशेषज्ञ के अनुसार, FODMAPs को पचाने का सबसे अच्छा तरीका है दाल को पकाने के लिए प्रेशर कुकर का इस्तेमाल करना है। उच्च तापमान न केवल FODMAPs ही नहीं बल्कि सैपोनिन को भी पचाने में मदद करता है।
बेहतर पाचन और पेट फूलने की समस्या से राहत के लिए दाल को पकाने के लिए टिप्स
दाल को पकाने से पहले अच्छी तरह धोकर भिगो दें। ऐसा करने से दाल की ऊपरी सतह पर मौजूद सैपोनिन निकल जाता है और FODMAPs का विघटन शुरू हो जाता है। इसे प्रेशर कुकर में अच्छी तरह पकाएं, जिससे पोषक तत्व बरकरार रहते हैं।

लेखक के बारे में
Manju Mamgain
शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
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मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।
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