
अंकुरित आलू खाना सुरक्षित है या जहरीला? न्यूट्रिशनिस्ट लीमा ने बताया सच
अंकुरित आलू देखकर क्या आप भी घबरा जाते हैं? क्या ये सेहत के लिए जहरीले होते हैं? न्यूट्रिशनिस्ट लीमा महाजन से जानिए अंकुरित और हरे आलू का सही फर्क और सुरक्षित इस्तेमाल के नियम।
अक्सर घर में रखे आलू में जैसे ही छोटे-छोटे अंकुर (स्प्राउट्स) निकल आते हैं, लोग उन्हें तुरंत फेंक देते हैं। वजह होती है – डर कि कहीं ये जहरीले तो नहीं। लेकिन सच यह है कि हर अंकुरित आलू नुकसानदेह नहीं होता। न्यूट्रिशनिस्ट लीमा महाजन के अनुसार, आलू एक जीवित पौधों का अंग है, इसलिए सही माहौल मिलने पर उसका अंकुरित होना बिल्कुल प्राकृतिक प्रक्रिया है।
आलू में अंकुर क्यों निकलते हैं?
आलू तब अंकुरित होते हैं जब उन्हें रोशनी, गर्मी, नमी या लंबे समय तक स्टोरेज मिलता है। ये अंकुर असल में नई पौध बनने की शुरुआत होते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि आलू खराब हो गया है।
हरे आलू से क्यों होती है परेशानी?
कई बार आलू का रंग हरा पड़ जाता है। यह हरा रंग क्लोरोफिल की वजह से होता है, जो खुद में हानिकारक नहीं है। लेकिन यह संकेत देता है कि आलू रोशनी में रहा है जिससे उसमें सोलानिन नामक तत्व बढ़ सकता है। सोलानिन ज्यादा मात्रा में पेट दर्द, उल्टी या सिरदर्द जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।
कब सुरक्षित है अंकुरित आलू खाना?
- न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, अगर आलू सख्त है, उसमें सिर्फ अंकुर निकले हैं और कोई हरा हिस्सा नहीं है, तो अंकुर और छिलका हटाकर इसे खाया जा सकता है।
- लेकिन अगर आलू हरा हो, नरम या सिकुड़ा हुआ हो और स्वाद में कड़वा लगे तो ऐसे आलू को बिल्कुल नहीं खाना चाहिए।
सोलानिन कितना खतरनाक है?
डरने वाली बात नहीं है। आम आलू में सोलानिन की मात्रा लगभग 2–15 mg प्रति 100 ग्राम होती है, जो सुरक्षित मानी जाती है। परेशानी तब होती है जब मात्रा 60–180 mg तक पहुंच जाए, जो आम घरेलू इस्तेमाल में बहुत दुर्लभ है।
आलू को सही तरीके से कैसे स्टोर करें?
अंकुर और हरापन रोकने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
- आलू को ठंडी (7–10°C), अंधेरी और सूखी जगह में रखें।
- प्लास्टिक की बजाय पेपर या जालीदार बैग का इस्तेमाल करें।
- आलू को प्याज से अलग रखें।
- धूप और रोशनी से बचाएं।
- फ्रिज में ना रखें, इससे स्टार्च शुगर में बदल सकता है।
आसान नियम याद रखें-
अंकुर आना = एकदम नॉर्मल
लेकिन हरा रंग = चेतावनी!
हर अंकुरित आलू को फेंकना जरूरी नहीं। सही जानकारी के साथ आप ना सिर्फ खाने की बर्बादी रोक सकते हैं, बल्कि सुरक्षित तरीके से इसका इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इसके अलावा किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए अन्य एक्सपर्ट से उचित सलाह ले सकते हैं।

लेखक के बारे में
Shubhangi Guptaपरिचय एवं अनुभव
शुभांगी गुप्ता एक अनुभवी जर्नलिस्ट हैं जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह पिछले 4+ वर्षों से देश के प्रतिष्ठित डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म लाइव हिंदुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) से जुड़ी हुई हैं। यहां वह बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं। इससे पहले शुभांगी लगभग एक साल अमर उजाला डिजिटल में भी काम कर चुकी हैं।
करियर का सफर
लाइव हिंदुस्तान में शुभांगी लाइफस्टाइल टीम का हिस्सा हैं, जहां वह हेल्थ, फिटनेस, फैशन, ब्यूटी, फूड और रिश्तों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर लगातार पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार कर रही हैं।
विशेषज्ञता
शुभांगी की लेखन शैली की खास बात यह है कि वह जटिल विषयों को भी बेहद सरल और समझने योग्य भाषा में प्रस्तुत करती हैं। उनका मानना है कि अच्छी पत्रकारिता केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर और आसान बनाने में भी सहायक होनी चाहिए। इसी सोच के साथ वह एक्सपर्ट्स की राय, रिसर्च और अपने व्यक्तिगत अनुभवों को जोड़कर ऐसे ‘हैंडी टिप्स’ साझा करती हैं जिनसे पाठक खुद को सीधे जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।
पुरस्कार
लाइव हिंदुस्तान में काम करते हुए शुभांगी को ज्यादा रीडर एंगेजमेंट के लिए मंथली अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है, जो उनके कंटेंट की लोकप्रियता और प्रभाव को दर्शाता है। डिजिटल ट्रेंड्स और ऑडियंस की पसंद को समझना उनकी बड़ी ताकत है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
शुभांगी ने जर्नलिज्म के साथ-साथ एल.एल.बी की पढ़ाई भी की है, जिससे उनके कंटेंट में तथ्यात्मक मजबूती और संतुलित दृष्टिकोण देखने को मिलता है। वह पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़ने और लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम मानती हैं।
और पढ़ेंलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




