सावधान! वजन घटाने के लिए क्या आप भी कर रहे हैं AI का इस्तेमाल ? डॉक्टर ने दी जरूरी सलाह
भागदौड़ भरी जिंदगी में फिटनेस का सपना देखने वाले लोगों के लिए 'AI'एक 'शॉर्टकट' बनकर उभर रहा है। मोबाइल की स्क्रीन पर आपका एक क्लिक आपको वेट लॉस के लिए लो कैलोरी डाइट चार्ट तो दे सकता है लेकिन क्या यह वाकई आपकी शरीर की जरूरतों को भी अच्छी तरह समझता है।

भागदौड़ भरी जिंदगी में फिटनेस का सपना देखने वाले लोगों के लिए 'AI'एक 'शॉर्टकट' बनकर उभर रहा है। मोबाइल की स्क्रीन पर आपका एक क्लिक आपको वेट लॉस के लिए लो कैलोरी डाइट चार्ट तो दे सकता है लेकिन क्या यह वाकई आपकी शरीर की जरूरतों को भी अच्छी तरह समझता है। व्यस्त जीवनशैली की वजह से आज ज्यादातर लोग एक जादुई गणित की तलाश में अपनी सेहत की चाबी मशीनों के हवाले कर रहे हैं। AI बेशक आपको चंद सेकंड्स में एक 'परफेक्ट' डाइट चार्ट तो थमा सकता है, लेकिन वह उस मशीन की तरह है जिसे आपकी समस्या तो पता है, लेकिन आपके पसंदीदा स्वाद, आपकी सांस्कृतिक जड़ें और आपके बदलते मूड से अनजान है। असल में , वजन घटाना सिर्फ कैलोरी के बढ़ने-घटने तक ही सीमित नहीं होता है, बल्कि यह आपके शरीर और मन का एक अनूठा तालमेल भी है। जब हम एआई के बताए कठोर ढांचों पर चलते हैं, तो अक्सर हम अपने पोषण की जगह अपनी सहजता खो देते हैं। एक स्क्रीन यह नहीं जान सकती कि आज आप कितनी थकान महसूस कर रहे हैं या आज आपका मन मां के हाथ का बना खाना खाने का कर रहा है।
सीके बिड़ला अस्पताल (दिल्ली) की आंतरिक चिकित्सक डॉ. मनीषा अरोड़ा कहती हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) धीरे-धीरे वेलनेस और फिटनेस इंडस्ट्री का हिस्सा बनता जा रहा है। कैलोरी गिनने वाले ऐप्स, पर्सनलाइज्ड वर्कआउट प्लान और चैट के जरिए मिलने वाली डाइट से जुड़ी सलाह- लोगों को वेट लॉस में मदद करने के लिए बनाए गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन ऐप्स और डाइट प्लान पर पूरी तरह भरोसा करना सुरक्षित है?
वेट लॉस के लिए कैसे काम करते हैं AI टूल्स
AI आधारित टूल्स आमतौर पर आपकी उम्र, वजन, लंबाई, शारीरिक गतिविधि, नींद और खाने की आदतों जैसी जानकारी का विश्लेषण करके आपके लिए डाइट प्लान बनाते हैं, रोजाना की कैलोरी तय करते हैं और एक्सरसाइज रूटीन सुझाते हैं। अगर समझदारी से इनका इस्तेमाल किया जाए तो ये टूल्स जागरूकता बढ़ाते हैं, नियमितता बनाए रखने में मदद करते हैं और प्रगति को ट्रैक करने का आसान तरीका देते हैं। रिसर्च बताती है कि नियमित फीडबैक और जवाबदेही स्वस्थ आदतों को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करती है। डॉ. मनीषा अरोड़ा कहती हैं कि बावजूद इसके सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि आप इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं।
वजन कम करने के लिए AI यूज करने के नुकसान
AI आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री को तब तक अच्छी तरह नहीं समझ सकता, जब तक उसे सही तरीके से जोड़ा और विशेषज्ञों द्वारा देखा न जाए। थायरॉयड, पीसीओएस, डायबिटीज, हार्मोनल असंतुलन या दिल से जुड़ी समस्याओं जैसी स्थितियों में डॉक्टर की निगरानी जरूरी होती है। कई बार एल्गोरिदम बहुत कम कैलोरी या बहुत कठिन एक्सरसाइज की सलाह दे सकता है, जो हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होती। इससे थकान, मांसपेशियों की कमी, पोषक तत्वों की कमी या गलत खानपान की आदतें विकसित हो सकती हैं।
डेटा प्राइवेसी
डेटा प्राइवेसी भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कई AI हेल्थ ऐप्स आपकी निजी और स्वास्थ्य से जुड़ी संवेदनशील जानकारी इकट्ठा कर लेते हैं। ऐसे में व्यक्ति को चाहिए कि उनकी प्राइवेसी पॉलिसी को ध्यान से पढ़कर यह सुनिश्चित करें कि आपका डेटा सुरक्षित है या नहीं।
सलाह
AI को यूज करने का सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि AI को डॉक्टर के विकल्प की जगह एक सहायक उपकरण की तरह ही इस्तेमाल करें। अच्छी सेहत के लिए योग्य डॉक्टर, डाइटीशियन या फिटनेस विशेषज्ञ की सलाह के साथ मिलकर AI आपकी प्रगति पर नजर रखने, पैटर्न समझने और अनुशासन बनाए रखने में मदद कर सकता है।
अच्छी बात यह है कि आने वाले समय में AI मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर तरीके से समझने और पहले से बीमारी की पहचान करने में सक्षम हो सकता है। लेकिन स्थायी और सुरक्षित वजन घटाना डिजिटल सलाह पर नहीं बल्कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और लंबे समय तक अपनाई गई स्वस्थ आदतों पर ही निर्भर करता है।
लेखक के बारे में
Manju Mamgain
शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।
करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और विशेषज्ञता:
दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी (ऑनर्स) और भारतीय विद्या भवन से मास कम्युनिकेशन करने वाली मंजू, साल 2008 से ही मेडिकल रिसर्च और हेल्थ विषयों पर अपनी लेखनी चला रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत जटिल वैज्ञानिक तथ्यों और मेडिकल रिसर्च को 'एक्सपर्ट-वेरिफाइड' मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी हर खबर डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित होती है, जो डिजिटल युग में विश्वसनीयता की कसौटी पर खरी उतरती है।
बहुमुखी प्रतिभा और विजन
उनका पत्रकारीय जुनून केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। वे आधुनिक जीवन की भागदौड़ में रिलेशनशिप की जटिलताएं, ब्यूटी ट्रेंड्स, फैशन, ट्रैवलिंग और फूड जैसे विषयों को भी एक्सपर्ट के नजरिए से कवर करती हैं। मंजू का मानना है कि डिजिटल युग में एक पत्रकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी 'फैक्ट-चेकिंग' और प्रमाणिक जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक और बेहतर जीवन निर्णय ले सकें।
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एस्ट्रोलॉजी: अंकज्योतिष, राशिफल और व्रत-त्योहारों का ज्ञान।
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