Women’s Day 2026 : क्यों 'सुपरवुमन' बनना सेहत के लिए है खतरनाक ? महिलाएं पढ़ लें 4 बड़े नुकसान

Mar 08, 2026 05:08 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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Women's Day 2026 : इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 पर महिलाएं इस 'थका देने वाली महानता' का जश्न मनाना बंद करके इसे एक गंभीर स्वास्थ्य संकट के रूप में देखना शुरू करें। आइए जानते हैं मल्टीटास्किंग का यह हुनर महिलाओं की सेहत के लिए अनजाने में कौन से बड़े खतरे पैदा कर रहा होता है।

Women’s Day 2026 : क्यों 'सुपरवुमन' बनना सेहत के लिए है खतरनाक ? महिलाएं पढ़ लें 4 बड़े नुकसान

International Women's Day 2026 : जब हम महिलाओं के मल्टीटास्किंग की बात करते हैं, तो अक्सर इसे सराहने वाली बात के रूप में पेश किया जाता है। कहा जाता है कि वह घर संभालती है, बच्चों का ध्यान रखती है, नौकरी करती है, माता-पिता की देखभाल करती है और फिर भी मुस्कुराते हुए सब कुछ निभाती है। हम इसे उसकी ताकत कहते हैं। लेकिन सच यह है कि यह एक ऐसा असमान बोझ है जो समाज ने महिलाओं पर बहुत पहले से डाल दिया है, जब उनके पास इसके बारे में फैसला करने का भी मौका नहीं था। इस बोझ की कीमत शरीर को चुकानी पड़ती है। जब एक महिला लगातार अलग-अलग जिम्मेदारियों के बीच भागती रहती है, उसे न पूरा आराम मिलता है और न ही असली छुट्टी का समय, तो उसका शरीर लंबे समय तक तनाव की स्थिति में रहता है। यह धीरे-धीरे उच्च रक्तचाप, खराब नींद, चिंता और मानसिक थकान जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा देता है। कई शोध बताते हैं कि इस तरह का लगातार बोझ उठाने वाली महिलाओं की सेहत समय के साथ ज्यादा प्रभावित होती है। सीके बिड़ला हॉस्पिटल (दिल्ली) की फिजिशियन डॉ. मनीषा अरोड़ा कहती हैं कि हर वक्त एक साथ दस मोर्चों पर लड़ना कोई उपलब्धि नहीं, बल्कि एक धीमा जहर है, जो तनाव, थकान और गंभीर बीमारियों के रूप में महिलाओं के शरीर में घर कर रहा होता है। ऐसे में जरूरी है कि इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 पर महिलाएं इस 'थका देने वाली महानता' का जश्न मनाना बंद करके इसे एक गंभीर स्वास्थ्य संकट के रूप में देखना शुरू करें। आइए जानते हैं मल्टीटास्किंग का यह हुनर महिलाओं की सेहत के लिए अनजाने में कौन से बड़े खतरे पैदा कर रहा होता है।

तनाव बढ़ना

जब मस्तिष्क एक साथ कई दिशाओं में दौड़ता है, तो शरीर में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर लगातार बढ़ा रहता है। इसके परिणाम भले ही तुरंत नहीं दिखते, लेकिन दीर्घकालिक रूप से ये घातक हो सकते हैं। लगातार कई काम एक साथ करने से महिलाओं में कई बार तनाव का स्तर बढ़ जाता है। लंबे समय तक बना रहने वाला यह तनाव चिंता (एंग्जायटी), अवसाद (डिप्रेशन) और कुछ हृदय संबंधी बीमारियों का कारण भी बन सकता है।

नींद की कमी

महिलाओं में बढ़ता काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां और मानसिक तनाव सीधे तौर पर उनके लिए नींद की कमी (अनिद्रा) का कारण बन सकता है। जिससे महिलाओं में चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं (जैसे अवसाद, हृदय रोग) हो सकते हैं।

कॉग्निटिव डिसफंक्शन (ब्रेन फॉग) की समस्या

लगातार काम का बोझ और काम-जीवन में संतुलन की कमी शरीर में कोर्टिसोल का लेवल बढ़ाती है, जो मस्तिष्क के कार्यों को बाधित करता है। बता दें, महिलाओं को अत्यधिक काम और मानसिक दबाव के कारण नींद की कमी होने लगती है। पर्याप्त नींद न मिलने से मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिसे संज्ञानात्मक समस्या (कॉग्निटिव डिसफंक्शन) कहा जाता है। इसका असर याददाश्त, ध्यान और मनोदशा पर पड़ सकता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं।

मी-टाइम होता है नजरअंदाज

अक्सर महिलाएं दूसरों की जरूरतों को अपनी जरूरतों से पहले रखती हैं। जिसकी वजह से उन्हें अपने लिए 'मी-टाइम'बहुत कम मिलता है। ऐसी महिलाएं नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और आराम को नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि ये सभी चीजें अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक हैं। लगातार तनाव और स्वयं की देखभाल की कमी हृदय रोगों के खतरे को भी बढ़ा सकती है।

सलाह- डॉ. एंजेला चौधरी कहती हैं कि 'हमें एक बात साफ तौर पर समझनी होगी | यह सिर्फ ‘वेलनेस’ या व्यक्तिगत देखभाल का मुद्दा नहीं है। कोई मेडिटेशन ऐप या टाइम मैनेजमेंट टिप इस समस्या का समाधान नहीं कर सकती। असली समाधान तब होगा जब घर के कामों और जिम्मेदारियों को बराबरी से बांटा जाएगा। महिलाओं की सेहत तब तक बेहतर नहीं होगी जब तक हम उनकी थकान को सिर्फ उनकी निजी समस्या समझना बंद नहीं करते और इसे एक सामाजिक और सार्वजनिक मुद्दा मानकर समाधान नहीं खोजते'।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain

शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।

करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि और विशेषज्ञता:
दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी (ऑनर्स) और भारतीय विद्या भवन से मास कम्युनिकेशन करने वाली मंजू, साल 2008 से ही मेडिकल रिसर्च और हेल्थ विषयों पर अपनी लेखनी चला रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत जटिल वैज्ञानिक तथ्यों और मेडिकल रिसर्च को 'एक्सपर्ट-वेरिफाइड' मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी हर खबर डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित होती है, जो डिजिटल युग में विश्वसनीयता की कसौटी पर खरी उतरती है।

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उनका पत्रकारीय जुनून केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। वे आधुनिक जीवन की भागदौड़ में रिलेशनशिप की जटिलताएं, ब्यूटी ट्रेंड्स, फैशन, ट्रैवलिंग और फूड जैसे विषयों को भी एक्सपर्ट के नजरिए से कवर करती हैं। मंजू का मानना है कि डिजिटल युग में एक पत्रकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी 'फैक्ट-चेकिंग' और प्रमाणिक जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक और बेहतर जीवन निर्णय ले सकें।

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