
बीपी कितना बढ़ा तो आ सकता है हार्ट अटैक, कार्डियोलॉजिस्ट से जान लीजिए मिथ और सच
Hypertension Myths And Facts: अगर बीपी कई महीनों-सालों तक कंट्रोल में नहीं रहता, तो धमनियों की अंदरूनी दीवारें कमजोर होकर मोटी और सख्त हो जाती हैं। जिसकी वजह से उनमें आसानी से कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है और प्लाक बन जाता है जो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकता है।
भागती दौड़ती तनाव भरी जिंदगी में लाइफस्टाइल से जुड़ी कई समस्याएं व्यक्ति को अपना शिकार बना लेती हैं। सेहत से जुड़ी इन्हीं समस्याओं में हाई ब्लड प्रेशर का नाम भी शामिल है। हाई बीपी को अकसर हार्ट अटैक के एक छिपे हुए खतरे के रूप में देखा जाता है।आज दुनिया भर में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह एक ऐसी गंभीर स्थिति है जिसमें हृदय की मांसपेशियों में रक्त की आपूर्ति रुकने से हृदय की कोशिकाएं मरने लगती हैं। शरीर में ब्लड प्रेशर का अत्यधिक बढ़ना हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा सकता है। जरूरत से ज्यादा ब्लड प्रेशर बढ़ने पर धमनियों पर दबाव बढ़ जाता है और वे क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। धमनियों के क्षतिग्रस्त होने से रक्त प्रवाह कम हो जाता है, जिससे हृदय की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन और अन्य पोषक तत्वों की आपूर्ति ठीक से नहीं हो पाती। जो आगे चलकर हार्ट अटैक का कारण बनती है। ऐसे में अब किसी भी व्यक्ति के मन को एक सवाल परेशान कर सकता है कि आखिर ब्लड प्रेशर कितना बढ़ जाने पर हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप भी इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो सीके बिड़ला अस्पताल के फेमस कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजीव कुमार गुप्ता से जानते हैं इस सवाल का सही जवाब।
क्या कहते हैं हार्ट एक्सपर्ट?
फेमस कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजीव कुमार गुप्ता कहते हैं कि लोगों के बीच यह आम सवाल बना रहता है कि BP कितना बढ़ जाए तो हार्ट अटैक हो जाता है, लेकिन सच ये है कि हार्ट अटैक किसी एक नंबर पर निर्भर नहीं करता है। ये इस बात पर अधिक निर्भर करता है कि बीपी कितने समय से बढ़ा हुआ है, कितना अचानक बढ़ता है,और बाकी और कौन-कौन से जोखिम मौजूद हैं। डॉक्टर गुप्ता बीपी रोगियों को इन बातों पर गौर करने की सलाह देते हैं, जैसे-
-नॉर्मल बीपी लगभग 120/80 mmHg माना जाता है। जबकि 140/90 mmHg के ऊपर जाते ही हार्ट की प्रॉब्लम्स का खतरा बढ़ने लगता है।
-160/100 mmHg के ऊपर बीपी पहुंच जाए तो दिल और ब्लड वेसल्स पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है, और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का रिस्क काफी बढ़ जाता है।
हाई बीपी से जुड़ी गलतफहमियां
डॉ. संजीव कुमार गुप्ता कहते हैं कि लोगों को अकसर हाई बीपी को लेकर कुछ गलतफहमी बनी रहती हैं उदाहरण के लिए सिर्फ बहुत ज्यादा बीपी होने पर ही हार्ट अटैक का खतरा होता है। डॉक्टर गुप्ता कहते हैं कि अगर बीपी कई महीनों-सालों तक कंट्रोल में नहीं रहता, तो धमनियों की अंदरूनी दीवारें कमजोर होकर मोटी और सख्त हो जाती हैं। जिसकी वजह से उनमें आसानी से कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है और प्लाक बन जाता है। अगर इनमें से कोई प्लाक फट जाए, तो ब्लड फ्लो अचानक रुक सकता है और हार्ट अटैक हो सकता है। फिर चाहे व्यक्ति का बीपी बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ भी न हो।
बीपी का अचानक बढ़ना खतरे की निशानी (Hypertensive Crisis)
अगर बीपी 180/120 mmHg से ऊपर चला जाए, तो तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत होती है। इस लेवल पर दिल को ब्लड पंप करने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है और इससे प्लाक फटने, हार्ट अटैक, स्ट्रोक या हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। अगर ऐसे समय में तेज सिरदर्द, सीने में दर्द, सांस फूलना, नजर धुंधली होना, या कंफ्यूजन जैसे लक्षण दिखें, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि हर व्यक्ति में बीपी का खतरा अलग हो सकता है।
जिन लोगों को डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, स्मोकिंग की आदत, या फैमिली हिस्ट्री है, उनमें 150/95 mmHg जैसे BP पर भी हार्ट की दिक्कतें हो सकती हैं।
क्या हैं बचाव के उपाय
-BP की नियमित जांच
-कम नमक वाला संतुलित आहार
-रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज
-पूरी नींद
-स्मोकिंग और ज्यादा शराब से बचना
-जिन लोगों को पहले से हाई बीपी की समस्या है, उन्हें दवाइयां समय पर लेनी चाहिए। दवा मिस करना या अचानक बंद कर देना बीपी को खतरनाक तरीके से ऊपर पहुंचा सकता है।

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Manju Mamgainलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




