शुगर की दवा लेते हैं, फिर भी कंट्रोल नहीं रहती? डॉक्टर बोलीं इस 1 चीज पर दें ध्यान!
Diabetes Control Tips: अक्सर डायबिटीज के मरीज शिकायत करते हैं कि दवा लेने के बाद भी उनकी शुगर बढ़ी हुई रहती है। अगर आपके साथ ही कुछ ऐसा ही है तो आयुर्वेदिक डॉक्टर की ये 1 सलाह आपको जरूर माननी चाहिए।

डायबिटीज यानी शुगर की बीमारी आजकल काफी कॉमन होती जा रही है। ऐसे में कुछ लोगों का शुगर लेवल तो इतना ज्यादा बढ़ा हुआ रहता है कि नियमित दवाइयां लेने से भी कम नहीं होता। आयुर्वेद कंसल्टेंट डॉ सुगंधा शर्मा अपने एक ऐसे ही पेशेंट के बारे में बताती हैं, जिनकी उम्र 43 साल है। वो पिछले 13 सालों से शुगर की दवाई ले रहे हैं, लेकिन उसमें कोई भी फायदा नजर नहीं आ रहा। ये समस्या सिर्फ उन्हीं की नहीं है, बल्कि ऐसी कई डायबीटीज के मरीज हैं जो कई सालों से डेली दवा ले रहे हैं लेकिन उनका शुगर लेवल बढ़ा हुआ ही रहता है। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा ही है, तो शायद आपको दवाई की नहीं बल्कि अपने लाइफस्टाइल में एक छोटा सा बदलाव करने की जरूरत है। आइए जानते हैं डॉक्टर का क्या कहना है।
शुगर कंट्रोल में मदद करेगी ये 1 चीज
डॉ सुगंधा बताती हैं कि अगर दवाई लेने के बाद भी आपकी शुगर कंट्रोल में नहीं रहती है, तो आपको अपनी मसल ग्रोथ और मसल बिल्डिंग पर ध्यान देना चाहिए। इससे ना सिर्फ आपका शुगर लेवल कंट्रोल में रहना शुरू हो जाएगा, बल्कि हो सकता है डायबिटीज रिवर्स भी होने लगे। दरअसल जितनी अच्छी आपकी मसल ग्रोथ होगी या मसल्स एक्टिव रहेंगी, उतना ही ज्यादा वो आपके ब्लड से शुगर खींचकर यूज कर लेंगी।
ब्लड शुगर कंट्रोल में कैसे हेल्प करती हैं मांसपेशियां?
हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो मसल्स यानी मांसपेशियां ग्लूकोज को इस्तेमाल करने वाली सबसे बड़ी जगह होती हैं। जब हमारे शरीर में मसल्स ज्यादा मात्रा में होती हैं या एक्टिव रहती हैं, तो खून से ज्यादा ग्लूकोज को एब्जॉर्ब कर उसे एनर्जी के रूप में इस्तेमाल कर पाती हैं। इससे ब्लड शुगर कंट्रोल में काफी मदद मिलती है। वहीं, अगर आपके शरीर का मसल मास कम है तो शरीर ग्लूकोज का यूज उतने इफेक्टिव तरीके से नहीं कर पाता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल लंबे समय तक बढ़ा हुआ रह सकता है।
मसल्स मास बढ़ाने के लिए शुरू करें ये काम
डॉ सुगंधा बताती हैं कि मसल्स बिल्डिंग के लिए आप जिम जाना शुरू कर सकते हैं। अगर जिम जाना पॉसिबल नहीं है, तो शुरुआत छोटी-मोटी एक्सरसाइज से करें, जैसे- स्क्वाट, पुश अप्स और डेड हैंग। ये एक्सरसाइज करने से धीरे-धीरे आपकी मसल्स खुलना शुरु हो जाएंगी। शुरुआत में दर्द हो सकता है लेकिन 4-5 दिन में बॉडी को आदत हो जाती है। महिलाओं को खासकर अपने मसल्स मास को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। इससे डायबिटीज तो कंट्रोल में रहेगी ही साथ में हार्मोनल बैलेंस में भी मदद मिलेगी।
डाइट में पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें
मसल्स मास बढ़ाने के लिए अपनी डाइट में प्रोटीन रिच चीजें भी शामिल करें। दाल, दूध, दही, अंडा, पनीर, सोयाबीन, छोले, राजमा, तोफू और चिकन जैसी प्रोटीन रिच चीजें मांसपेशियों के विकास में मदद करती हैं। हालांकि शुगर के मरीजों को अपनी डाइट हमेशा डॉक्टर की देख-रेख में ही तैयार करनी चाहिए, इसलिए एक बार उनकी सलाह जरूर ले लें।
नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या मेडिकल कंडीशन से जुड़े सवालों के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर मौजूद यूजर-जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। लाइव हिन्दुस्तान ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही इनका समर्थन करता है।
लेखक के बारे में
Anmol Chauhanअनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।
करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।
लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।
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