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क्या अरहर दाल आपके लिए सही है? इन स्थितियों में बिल्कुल ना खाएं!

क्या अरहर दाल आपके लिए सही है? इन स्थितियों में बिल्कुल ना खाएं!

संक्षेप:

अरहर दाल पौष्टिक होती है लेकिन कुछ लोगों के लिए यह पाचन, जोड़ों और किडनी से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकती है। कई स्वास्थ्य स्थितियों में अरहर दाल का सेवन नुकसानदेह साबित हो सकता है, यहां लें पूरी जानकारी।

Nov 17, 2025 10:50 am ISTShubhangi Gupta लाइव हिन्दुस्तान
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Healthy Eating Tips: अरहर दाल भारत में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली दालों में से एक है। प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होने के कारण यह रोजमर्रा के भोजन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह पचने में हल्की होती है और ऊर्जा बढ़ाने से लेकर पाचन को बेहतर बनाने तक कई लाभ देती है। हालांकि, हर पौष्टिक चीज हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं होती। अरहर दाल में मौजूद कुछ तत्व ऐसे भी हैं जो विशेष स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों के लिए समस्या पैदा कर सकते हैं। कुछ लोगों में यह गैस, पेट फूलना, अपच, या एलर्जी जैसी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कर सकती है। वहीं जिन लोगों को किडनी, यूरिक एसिड, या विशेष पाचन सम्बंधी समस्याएं हैं, उन्हें इसे सीमित मात्रा में या बिल्कुल नहीं खाने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर की जरूरत और स्वास्थ्य परिस्थितियों के अनुसार दालों का चयन करना बेहद जरूरी है।

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  • गठिया (Gout) के मरीज: अरहर दाल में प्यूरीन की मात्रा मध्यम स्तर पर होती है जो शरीर में यूरिक एसिड बढ़ा सकती है। इससे जोड़ों में दर्द, सूजन और कठोरता बढ़ने का खतरा रहता है।
  • किडनी रोग वाले लोग: हाई प्रोटीन दाल होने के कारण यह किडनी पर अतिरिक्त भार डाल सकती है। क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) वाले मरीजों को इसकी मात्रा डॉक्टर की सलाह अनुसार ही लेनी चाहिए।
  • पाचन संबंधी समस्या वाले लोग: गैस, ब्लोटिंग या एसिडिटी से परेशान लोगों में अरहर दाल पेट में भारीपन और असुविधा बढ़ा सकती है। इसकी दाल में मौजूद फाइबर कुछ लोगों में पाचन तंत्र को एक्टिव कर देता है जिससे पेट फूल सकता है।

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  • एलर्जी या सेंसिटिविटी वाले लोग: कुछ लोगों को लेग्यूम्स से एलर्जी होती है। ऐसे लोगों में खुजली, सूजन, पेट दर्द या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
  • इर्रिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) के मरीज: अरहर दाल में मौजूद FODMAP तत्व आंतों में जलन और क्रैम्प बढ़ा सकते हैं।
  • छोटे बच्चों के लिए पहले 1–2 साल में सीमित उपयोग: बहुत छोटे बच्चों में यह दाल गैस या कोलिक बढ़ा सकती है। डॉक्टर अक्सर हल्की दालों जैसे मूंग दाल की सलाह देते हैं।

Shubhangi Gupta

लेखक के बारे में

Shubhangi Gupta
चार साल से भी ज्यादा समय से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय शुभांगी गुप्ता लाइव हिंदुस्तान की वेब स्टोरीज टीम का हिस्सा हैं। एंटरटेनमेंट, फैशन और लाइफस्टाइल से जुड़े आर्टिकल लिखने में उनकी रुचि है। इनका उद्देश्य अपने लेखन से पाठकों को बांधे रखना है। लाइव हिंदुस्तान टीम के साथ जुड़ने से पहले ये अमर उजाला में काम कर चुकी हैं। और पढ़ें

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