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मात्र दस मिनट दौड़कर दिमाग को रखा जा सकता है तंदरुस्त, डिप्रेशन, एंजायटी होगी दूर

दौड़ना सेहत के लिए कितना अच्छा होता है इस बात का अंदाजा स्टडी से लगाया जा सकता है जिसके मुताबिक दौड़ने से दिमाग तेजी से काम करता है और स्ट्रेस जैसी समस्या खत्म होती है।

Aparajita लाइव हिन्दुस्तानWed, 5 June 2024 04:28 PM
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ग्लोबल रनिंग डे पर दौड़ने के फायदों के बारे में बात की जा रही है। तो बता दें कि फिजिकल एक्टीविटी हमेशा ही फायदेमंद होती है। ये केवल शरीर को फिट रखने में ही मदद नहीं करती बल्कि इससे दिमाग भी चुस्त और तंदरुस्त बना रहता है। खासतौर पर दौड़ के फायदों के बारे में तो कई सारी स्टडीज में पता चल चुका है। वहीं दौड़ने से दिमाग को तेज चलने और मूड को कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है।

शरीर के सारे अंगों के बीच रहता है तालमेल

दौड़ लगाने से दिमाग के साथ ही हाथ-पैर, आंखों और शरीर के सारे अंगों के बीच अच्छा तालमेल बैठता है। जिसकी वजह से दिमाग में न्यूरॉनल एक्टीवेट होता है और दिमाग को तेज चलने में मदद मिलती है।

डिप्रेशन और मूड स्विंग जैसी समस्या से मुक्ति मिलती है

अगर मात्र दस मिनट ही दौड़ लगाई जाए तो इससे कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। दौड़ने से मूड को बेहतर होने में मदद मिलती है। साथ ही डिप्रेशन जैसी समस्या से भी राहत मिलती है।

स्ट्रेस से राहत

दौड़ने के बाद शरीर में एंडोकैनाबायोनॉएड्स रिलीज होता है। जो एक बायोकेमिकल है जो ब्लड को ब्रेन तक तेजी से पहुंचाने में मदद करता है। जिसकी मदद से थोड़ी देर के लिए स्ट्रेस को कम करता है। और स्ट्रेसफुल सिचुएशन में सही तरीके से दिमाग को रिस्पांस देने में मदद करता है।

मूड को बूस्ट करता है

दौड़ने से एंजायटी और डिप्रेशन दोनों को कम करता है। भले ही रातभर में डिप्रेशन ना गायब हो लेकिन डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने और मैनेज करनें जरूर मदद करता है। कुछ स्टडी का मानना है कि रोजाना दौड़ने से डिप्रेशन और एंजायटी पर वहीं असर होता है जो रोज दवा का होता है।

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