अंडे खाने से आपको भी लग रहा डर? देखें कैंसर और खतरनाक एंटीबायोटिक पर क्या बोला FSSAI

Dec 22, 2025 09:05 am ISTKajal Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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अंडे में खतरनाक एंटीबायोटिक और इससे कैंसर के खतरे की वायरल न्यूज ने आपको भी डरा रखा है? जानिए अब फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया इन खबरों के बारे में क्या कहा है।

अंडे खाने से आपको भी लग रहा डर? देखें कैंसर और खतरनाक एंटीबायोटिक पर क्या बोला FSSAI

हेल्दी समझकर अंडे खाते हैं और सोशल मीडिया की कुछ रिपोर्ट्स ने डरा दिया है? अगर आप भी उनमें से एक हैं जिन तक अंडे से कैंसर होने वाली रील पहुंची है तो ये खबर आपके लिए ही है। अंडों से कैंसर होने वाले दावों को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। अथॉरिटी का कहना है कि भारत में बिकने वाले अंडे खाने के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं। सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। अथॉरिटी ने इस बात को डिटेल में समझाया कि भारत के अंडे कैसे सुरक्षित हैं।

नहीं इस्तेमाल हो रहे खतरनाक एंटीबायोटिक्स

हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी रिपोर्ट्स वायरल हुई थीं, जिनमें दावा किया गया था कि अंडों में खतरनाक एंटीबायोटिक्स मौजूद हैं। रेगुलेटर ने कहा कि ये रिपोर्ट वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। भारत में मुर्गी पालन और अंडा उत्पादन के किसी भी प्रतिबंधित एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक है। ऐसी अफवाहें सिर्फ लोगों को गुमराह करने के लिए फैलाई जा रही हैं।

नाइट्रोफ्यूरॉन पर है सख्त पाबंद

अंडों में नाइट्रोफ्यूरान मेटाबोलाइट्स मिलने की खबरों पर संस्था ने स्थिति साफ की। FSSAI ने बताया कि भारत के खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत पोल्ट्री फार्मिंग में नाइट्रोफ्यूरान के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी है। अगर कहीं बहुत मामूली मात्रा में इसके ट्रेस मार्कर रेजिड्यूज मिलते भी हैं, तो उसका मतलब यह नहीं है कि अंडा सेहत के लिए खतरनाक है। संस्था ने स्पष्ट किया कि इसे केवल जांच के एक पैमाने के रूप में रखा गया है, न कि इसे इस्तेमाल की अनुमति दी गई है।

अंतरराष्ट्रीय मानकों के समान हैं भारतीय नियम

अथॉरिटी ने बताया कि भारत में अंडों की गुणवत्ता के लिए तय किए गए मानक अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैं। यूरोपीय संघ और अमेरिका में भी नाइट्रोफ्यूरान पर प्रतिबंध है। FSSAI ने समझाया कि 1.0 µg/kg की जो सीमा (EMRL) तय की गई है, वह केवल जांच की शुद्धता के लिए है। इससे कम मात्रा मिलने पर इसे फूड सेफ्टी नियमों का उल्लंघन नहीं माना जाता और न ही इससे स्वास्थ्य को कोई खतरा होता है। अलग-अलग देशों में इसके आंकड़े जांच के तरीकों की वजह से अलग हो सकते हैं, लेकिन सुरक्षा के मानकों में कोई समझौता नहीं किया गया है।

खास ब्रैंड की नेगेटिव रिपोर्ट पर दिया जवाब

बाजार में किसी खास ब्रांड के अंडों को लेकर आई निगेटिव रिपोर्ट पर भी रेगुलेटर ने जवाब दिया। संस्था ने कहा कि ऐसी घटनाएं बहुत ही सीमित होती हैं और किसी खास बैच तक ही सीमित हो सकती हैं। कई बार यह गलती से या मुर्गियों के दाने की वजह से हो सकता है। FSSAI ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे ऐसी खबरों से घबराने के बजाय केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। अंडा एक पौष्टिक आहार है और अगर इसे नियमों के तहत तैयार किया गया है, तो यह सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है।

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शॉर्ट बायो : काजल शर्मा पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
काजल शर्मा भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल टीम की लीड हैं। 2020 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने डिजिटल कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।


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काजल ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे प्रमुख अखबारों से की, जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2014 में अमर उजाला डिजिटल के साथ उन्होंने न्यू मीडिया की दुनिया में कदम रखा। 2017 से 2020 तक नवभारत टाइम्स (NBT) में एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल कवरेज के बाद वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ से जुड़ीं और वर्तमान में इन दोनों सेक्शंस की टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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