होली खेलने के बाद क्यों बढ़ जाता है माइग्रेन का दर्द, फोर्टिस के डॉक्टर ने बताई 8 बड़ी वजह
ये महज सिर्फ एक थकान नहीं होती है, बल्कि घंटों धूप में रहना, रसायनों वाले पक्के रंग, पानी की कमी और मिठाइयों का अधिक सेवन का वो मिला-जुला असर है, जो हमारे नर्वस सिस्टम को हिलाकर रख देता है।

रंगों की मस्ती, हवा में उड़ता गुलाल और अपनों का साथ- होली का त्योहार खुशियों की ऐसी लहर लाता है कि हम अपनी सेहत का ख्याल रखना ही भूल जाते हैं। लेकिन जैसे ही उत्सव का शोर थमता है, कई लोगों को अकसर सिरदर्द या माइग्रेन की टीस जैसी समस्या होनी शुरू हो जाती है। ये महज सिर्फ एक थकान नहीं होती है, बल्कि घंटों धूप में रहना, रसायनों वाले पक्के रंग, पानी की कमी और मिठाइयों का अधिक सेवन का वो मिला-जुला असर है, जो हमारे नर्वस सिस्टम को हिलाकर रख देता है। होली की यादें तो पूरे साल ताजा बनी रहती हैं, लेकिन त्योहार पर मिला ये 'हैंगओवर' उत्सव के अगले दिन को भारी बना देता है। फोर्टिस अस्पताल (शालीमार बाग ) के आंतरिक चिकित्सक डॉ. पवन कुमार गोयल से जानते हैं होली खेलने के बाद किन 8 वजहों से बढ़ जाता है माइग्रेन का दर्द।
होली खेलने के बाद इन 8 वजहों से होने लगता है माइग्रेन का दर्द
डिहाइड्रेशन
होली के रंगों से खेलने के बाद होने वाले सिरदर्द का एक मुख्य कारण डिहाइड्रेशन भी होता है। दरअसल, धूप में लंबे समय तक खेलने और पर्याप्त पानी न पीने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। डिहाइड्रेशन माइग्रेन का एक प्रमुख कारण है। जिसकी वजह से मस्तिष्क थोड़ी देर के लिए खोपड़ी से सिकुड़ता है, जिससे दर्द के रिसेप्टर्स सक्रिय हो जाते हैं।
रंगों में मौजूद रसायनों का प्रभाव
कई सिंथेटिक होली रंगों में इंडस्ट्रियल डाई, भारी धातुएं (जैसे लेड ऑक्साइड, मरकरी सल्फाइड) और कठोर रसायन मौजूद होते हैं। जो त्वचा और स्कैल्प या फिर सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। संवेदनशील लोगों में यह शरीर की सूजन (इंफ्लेमेशन) पैदा करने के साथ सिरदर्द का कारण बन सकता है। खासतौर पर तब जब रंग आंखों में चला जाए या गलती से निगल लिया जाए।
सेंसरी ओवरलोड (अधिक उत्तेजना)
तेज संगीत, भीड़, चमकीले रंग और लंबे समय तक उत्तेजना तंत्रिका तंत्र पर दबाव डालते हैं। माइग्रेन से ग्रस्त लोगों के लिए ये सभी कारण सिरदर्द का प्रमुख ट्रिगर होते हैं। जिनकी वजह से मस्तिष्क अधिक संवेदनशील हो जाता है और दर्द शुरू होने की संभावना बढ़ जाती है।
नींद और खानपान में गड़बड़ी
होली के दौरान अक्सर लोग खाना छोड़ देते हैं और देर रात तक जागते हैं। लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) और नींद की कमी दोनों ही माइग्रेन के खतरे को बढ़ाते हैं, जिससे अगले दिन सिरदर्द होने की संभावना अधिक हो जाती है।
शराब और भांग का सेवन
शराब एक वासोडाइलेटर (Vasodilator) के रूप में कार्य करती है, जो रक्त वाहिकाओं को शिथिल और चौड़ा करती है। यह वाहिका विस्तार रक्त प्रवाह में परिवर्तन और मस्तिष्क में सेरोटोनिन स्तर को प्रभावित कर सकता है, जिससे धड़कन जैसा तेज सिरदर्द और हैंगओवर हो सकता है। यह वाहिका फैलाव बेचैनी और निर्जलीकरण के साथ मिलकर सिरदर्द बढ़ाता है। इसके अलावा भांग, जिसका होली पर पारंपरिक रूप से सेवन किया जाता है, उसका असर खत्म होने पर 'रिबाउंड हेडेक' (दोबारा सिरदर्द) हो सकता है, खासकर उन लोगों में जो इसके आदि नहीं होते हैं।
धूप और गर्मी का प्रभाव
लंबे समय तक तेज धूप में रहने से शरीर का तापमान बढ़ता है। गर्मी और तेज रोशनी (खासतौर पर रंगीन पानी से परावर्तित रोशनी) माइग्रेन को ट्रिगर कर सकती है।
'लेटडाउन' प्रभाव
लंबे समय तक उत्साह के बाद अचानक एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल का स्तर गिरना भी माइग्रेन का कारण बन सकता है। यही कारण है कि कई लोगों को सिरदर्द कार्यक्रम के दौरान नहीं बल्कि बाद में महसूस होता है।
मिलाजुला प्रभाव महत्वपूर्ण है
भले ही कई बार इनमें से कोई एक कारण अकेले सिरदर्द का कारण न बने, लेकिन जब ये सभी कारण एक साथ मिलते हैं, तो वे मस्तिष्क की दर्द नियंत्रित करने की क्षमता को कमजोर कर देते हैं, जिससे तेज सिरदर्द या माइग्रेन हो सकता है।
माइग्रेन के दर्द से जल्दी राहत देंगे ये उपाय
-इलेक्ट्रोलाइट्स के साथ पर्याप्त पानी पिएं
-संतुलित भोजन करें
- शरीर और बालों (खासतौर पर स्कैल्प) से रंग अच्छी तरह साफ करें
- अंधेरे और शांत कमरे में आराम करें
-माइग्रेन के लक्षण शुरू होते ही अपनी नियमित सिरदर्द की दवा लें।
लेखक के बारे में
Manju Mamgain
शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
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मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।
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