दाल से लेकर राजमा तक, गैस और ब्लोटिंग से बचने के लिए खाने से पहले अपनाएं 3 स्टेप

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दाल, राजमा और छोले जैसी चीजों को खाने के बाद अक्सर लोग गैस और ब्लोटिंग की शिकायत करते हैं। इस समस्या से बचाव के लिए इन्हें बनाने से पहले तीन स्टेप्स फॉलो करें।

दाल से लेकर राजमा तक, गैस और ब्लोटिंग से बचने के लिए खाने से पहले अपनाएं 3 स्टेप

भारतीय घरों में दाल सबसे ज्यादा बनाई जाती है। रोजाना खाने में शामिल होने के बाद भी लोग इससे गैस बनने या फिर ब्लोटिंग होने की शिकायत करते हैं। इस समस्या से बचने के लिए आपको दालों को खाना नहीं छोड़ना है, बल्कि दालों को बनाने का तरीका बदलना है। यहां हम न्यूट्रीशनिस्ट आशिमा गुप्ता द्वारा बताए गए 3 स्टेप के बारे में बता रहे हैं, जो हर किसी को दाल बनाने से पहले अपनाने चाहिए।

कितनी देर भिगोएं और कैसे बनाएं दाल

1) पीली मूंग की दाल

इसे कम से कम 3-4 मिनट के लिए भिगोएं। इसे हींग-अजवायन डालकर पकाएं। इस तरह की दाल को हफ्ते में 5 से 6 बार पकाया जा सकता।

2) लाल मसूर की दाल

लाल मसूर की दार पकाने से पहले 2 से 3 घंटे के लिए भिगोएं। इसे जीरा और हींग का तड़का लगाकर पकाएं। इस दाल को हफ्ते में 3 से 4 बार खा सकते हैं।

3) चने की दाल

चने की दाल को कम से कम 6 से 8 घंटे के लिए भिगोएं। इसे हींग और अदरक के छोंक के साथ पकाएं। हफ्ते में सिर्फ एक या 2 बार इस दाल को खाएं क्योंकि ये गैस बना सकती है।

4) अरहर की दाल

अरहर की दाल को 4 से 6 घंटे के लिए भिगोएं। इसमें घी के साथ हींग और हल्दी मिलाकर बनाएं। इसे हफ्ते में दो से तीन बार खा सकते हैं।

5) काला चना

काले चने को 8 से 10 घंटे के लिए भिगोएं। इसे कुकर में हींग और अजवायन के साथ पकाएं। सेंसेटिव आंतों वाले लोग इसे हफ्ते में एक बार खाएं।

6) राजमा

राजमा को 10 से 12 घंटे के लिए भिगोना चाहिए और इसे अदरक, लहसुन और हींग के साथ पकाना चाहिए। अगर ब्लोटिंग होती है तो इसे 10-15 दिन में एक बार खाएं।

7) काबुल चना (छोले)

रातभर के लिए चना भिगोएं और कुकर में पकाएं। इसमें अदरक, जीरा और हींग डालें। इसे हफ्ते में एक ही बार खाएं क्योंकि इससे गैस की समस्या हो सकती है।

8) हरी छिलके वाली मूंग की दाल

इसे 4 से 6 घंटे के लिए भिगोकर अदरक और जीरा-हींग के साथ पकाएं। इसे हफ्ते में 3 से 4 बार खा सकते हैं।

9) लोबिया

लोबिया को 8 से 10 घंटे के लिए भिगोएं। इसे अदरक, घी और हींग के साथ पकाएं। आपको गैस की समस्या रहती है तो हफ्ते में एक या दो बार खाएं।

दालों को भिगोना क्यों है जरूरी

1) 12 घंटे का ठंडे पानी में भिगोना

दालों को कम से कम 12 से 24 घंटे भिगोना सिर्फ एक परंपरा नहीं है, यह वैज्ञानिक प्रमाण है। ऐसा करने से फाइटेज एंजाइम एक्टिव हो जाते हैं, जो फाइटिक एसिड को तोड़ता है। जिस पानी में दाल को भिगोते हैं उसे हमेशा फेंक देना चाहिए, क्योंकि उस पानी में घुली हुई शुगर होती है जो सबसे अधिक फर्मेंटेशन का कारण बनती है।

2) एंजाइमों का तालमेल

दालों को हींग, अदरक या अजवाइन जैसे वातहर मसालों के साथ पकाएं। ये मसाले पाचक एंजाइमों के उत्पादन को बूस्ट करते हैं, जिससे आपका शरीर बड़ी आंत तक पहुंचने से पहले ही उन कठोर रेशों को पचाने में मदद करता है।

3) धीरे-धीरे शुरुआत करें

अगर आपका पेट हाई फाइहर को पचाने में असमर्थ है, तो साबुत दालों जौसे राजमा/छोले पर जाने से पहले टूटी हुई दालों (मूंग/मसूर) से शुरुआत करें। ऐसा करके आपके माइक्रोबायोम को इन्हें पचाने के लिए जरूरी बैक्टीरिया विकसित करने में समय लगेगा।

Avantika Jain

लेखक के बारे में

Avantika Jain
अवंतिका जैन ने जर्नलिज्म एंड मास कॉम में डिग्री ली है। फिलहाल वह बतौर सीनियर कॉन्टेंट प्रोड्यूसर लाइव हिंदुस्तान में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। एंटरटेनमेंट से जुड़ी खबरों को लिखने और वीडियोज बनाने में भी इनकी रुचि है। 5 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहीं अवंतिका लाइव हिन्दुस्तान से पहले ईटीवी भारत के दिल्ली डेस्क पर काम कर चुकी हैं। नई जगहों को एक्सप्लोर करना, नए लोगों से जुड़ना और फिल्में/वेब सीरीज देखने की शौकीन हैं। और पढ़ें

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