मोटापे की टेंशन छोड़कर जमकर खाएं गोंद के लड्डू, डॉक्टर ने बताई सही मात्रा और समय

Jan 16, 2026 06:02 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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अगर इन लड्डुओं का सही मात्रा और तरीके से सेवन किया जाए तो ये आपके शरीर में गर्माहट बनाए रखकर इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं। आइए जानते हैं कैसे आप कैलोरी की चिंता किए बिना इस विंटर सुपरफूड का लुत्फ उठाते हुए सेहत और स्वाद का ख्याल रख सकते हैं।

मोटापे की टेंशन छोड़कर जमकर खाएं गोंद के लड्डू, डॉक्टर ने बताई सही मात्रा और समय

कड़कड़ाती ठंड में दादी-नानी के हाथ के बने गोंद के लड्डू सिर्फ एक डेजर्ट नहीं, बल्कि सेहत भरा आशीर्वाद भी होते हैं। लड्डू बनाते समय रसोई से आती घी और भुने हुए गोंद की सोंधी खुशबू गुलाबी ठंड को जायकेदार बना देती है। पारंपरिक तौर पर ये लड्डू ताकत बढ़ाने, इम्युनिटी सुधारने, जोड़ों के दर्द में राहत और डिलीवरी के बाद रिकवरी के लिए खाने के लिए दिए जाते हैं। लेकिन आज के समय में फिटनेस फ्रीक लोग वजन बढ़ने के डर से इन पौष्टिक लड्डुओं को खाने से बचते हैं। लेकिन सच तो यह है कि अगर इन लड्डुओं का सही मात्रा और तरीके से सेवन किया जाए तो ये ना सिर्फ आपके शरीर में गर्माहट बनाए रखकर इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं बल्कि हड्डियों को भी फौलाद की तरह स्ट्रांग बनाने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं कैसे आप कैलोरी की चिंता किए बिना इस विंटर सुपरफूड का लुत्फ उठाते हुए सेहत और स्वाद का ख्याल रख सकते हैं।

गोंद के लड्डू भारत के कई घरों में सर्दियों के मौसम में बड़े चाव से खाए जाते हैं। इन्हें खाने वाली गोंद, देसी घी, मेवे और गुड़ से बनाकर तैयार किया जाता है। पारंपरिक तौर पर ये लड्डू ताकत बढ़ाने, इम्युनिटी सुधारने, जोड़ों के दर्द में राहत और डिलीवरी के बाद रिकवरी के लिए खाने के लिए दिए जाते हैं।

क्या कहती है एक्सपर्ट

सीके बिरला हॉस्पिटल की न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. दीपाली शर्मा कहती हैं कि गोंद की तासीर गरम होती है, इसलिए यह ठंड के मौसम में शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करता है। इसमें मौजूद हेल्दी फैट्स शरीर को लंबे समय तक एनर्जी देते हैं और सर्दियों में होने वाली जोड़ों की अकड़न और दर्द को कम करने में सहायक होते हैं। लेकिन दिक्कत तब होती है, जब इन्हें जरूरत से ज्यादा या गलत समय पर खाया जाता है। एक गोंद का लड्डू लगभग 150–200 कैलोरी तक का हो सकता है, क्योंकि इसमें घी और गुड़ दोनों अच्छी मात्रा में होते हैं। अगर रोज 2–3 लड्डू खा लिए जाएं या रात के समय खाए जाएं, तो इससे वजन बढ़ने का खतरा बना रहता है।

गोंद के लड्डू का असली फायदा उठाने के लिए उसकी सही मात्रा और समय दोनों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

रोजाना सेवन के लिए-

½ से 1 छोटा लड्डू ही पर्याप्त होता है।

-इसे सुबह या दोपहर में खाना बेहतर होता है, जब शरीर उस एनर्जी को इस्तेमाल कर सके।

-दिन भर का खाना हल्का और संतुलित रखें।

-थोड़ी बहुत फिजिकल एक्टिविटी या वॉक जरूर करें।

-कोशिश करें कि गोंद के लड्डू को सर्दियों के दूसरे भारी स्नैक्स जैसे मठरी, पकौड़े या ज्यादा मिठाइयों के साथ न खाएं।

गोंद के लड्डू का हेल्दी वर्जन कैसे तैयार करें

अगर घर पर बनाते हैं, तो इसका हेल्दी वर्जन भी तैयार किया जा सकता है जैसे-

-घी की मात्रा थोड़ी कम रखें

-बादाम, अखरोट, कद्दू के बीज या अलसी जैसे नट्स और सीड्स ज्यादा डालें।

-गुड़ सीमित मात्रा में इस्तेमाल करें।

-पाचन बेहतर करने के लिए सोंठ (सूखा अदरक) या अजवाइन मिलाई जा सकती है।

खास बात यह है कि गोंद के लड्डू कोई जंक फूड नहीं हैं, बल्कि ये सीजनल फंक्शनल फूड हैं, यानी सही मौसम में सही तरीके से खाए जाएं तो शरीर को फायदा देते हैं।

सलाह-

निष्कर्ष के तौर पर, गोंद के लड्डू सेहत के लिए नुकसानदायक नहीं हैं। लेकिन इनका फायदा तभी मिलेगा, जब इन्हें समझदारी से, सीमित मात्रा में और सही समय पर खाया जाए। तभी ये सर्दियों में ताकत देंगे, बिना वजन बढ़ाए।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain

शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।

करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
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दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी (ऑनर्स) और भारतीय विद्या भवन से मास कम्युनिकेशन करने वाली मंजू, साल 2008 से ही मेडिकल रिसर्च और हेल्थ विषयों पर अपनी लेखनी चला रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत जटिल वैज्ञानिक तथ्यों और मेडिकल रिसर्च को 'एक्सपर्ट-वेरिफाइड' मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी हर खबर डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित होती है, जो डिजिटल युग में विश्वसनीयता की कसौटी पर खरी उतरती है।

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