अस्पताल में ट्रीटमेंट के लिए भर्ती कर रहे मरीज, इन अधिकारों की जानकारी जरूर रखें
इंसान के बीमार होते ही या फिर दुर्घटना होने पर सब इलाज पर फोकस करते हैं। लेकिन इसके साथ ही अस्पताल में ट्रीटमेंट, बिल, रिपोर्ट्स जैसी चीजों के बारे में जानकारी रखना भी जरूरी होता है। इसलिए अस्पताल जाएं तो पेशेंट के इन अधिकारों के बारे में जरूर जानें।

बीमारी या एक्सीडेंट होते ही हर कोई अस्पताल भागता है। वहां पर सबका फोकस केवल मरीज के ठीक होने और सही उपचार पर रहता है। लेकिन मरीज की तीमारदारी में लगे इंसान को केवल यहीं नहीं देखना होता कि उसका मरीज ठीक हो रहा है, उसके साथ यह भी जानना जरूरी होता है कि उपचार सही हो रहा, कहीं उससे इलाज के नाम पर ज्यादा पैसे तो नहीं लिए जा रहे। इसके अलावा भी कई छोटे-बड़े अधिकार होते हैं जिनकी जानकारी अक्सर आम लोगों को नहीं होती। या फिर बड़े हॉस्पिटल में जब वो मरीज को भर्ती करवाते हैं तो संकोचवश नहीं पूछते कि कहीं उनके मरीज को नुकसान ना पहुंचा दिया जाए। लेकिन ये बेसिक अधिकार की जानकारी हर किसी को होनी चाहिए। जिससे पेशेंट का सही इलाज हो और किसी तरह की धोखाधड़ी आपके साथ ना हो जाए।
ट्रीटमेंट क्या चल रहा है
मरीज को भर्ती करवाने के बाद आपको पूरा अधिकार है ये जानने का कि ट्रीटमेंट कौन सा चल रहा है, कैसा चल रहा है, कौन सी बीमारी पेशेंट को हुई है। बिना किसी झिझक के आप ये सारे सवाल डॉक्टर से पूछ सकते हैं।
हर इलाज के पहले आपसे पूछना जरूरी है
डॉक्टर किसी भी तरह के इलाज को शुरू करने से पहले मरीज के रिश्तेदार से जरूर पूछेंगे। बिना आपकी सहमति के किसी भी तरह का नया इलाज या दवा नहीं चलाई जा सकती। इसलिए हमेशा इस बात को बताएं कि किसी भी तरह का नया प्रोसीजर इलाज में शुरू कर रहे हैं तो बिना अनुमति के ना शुरू करें। अगर मरीज किसी टेस्ट या इलाज के लिए मना कर रहा तो उसे मानना जरूरी होता है।
मेडिकल रिकॉर्ड्स और रिपोर्ट मांग सकते हैं
भले ही अस्पताल में आपका मरीज भर्ती है लेकिन आप उसके मेडिकल रिकॉर्ड्स और रिपोर्ट वगैरह मांग सकते हैं। जिससे कि आप सेकेंड ओपिनियन ले सकें। अस्पताल का स्टाफ और डॉक्टर इसके लिए मना नहीं कर सकते।
बिल का डिटेल मांगना
बिल का डिटेल ब्रेकअप मांगना आपका लीगल अधिकार है। जिससे आपको पता चलेगा कि कौन से खर्चे कहां हुए हैं, साथ ही सारे टेस्ट को बिल्स से मैच करें कि बिल में वहीं सारे टेस्ट ऐड किए गए हैं या फिर कुछ अलग से तो ऐड नहीं है, अगर है तो उसकी जानकारी लीजिए।
मेडिकल स्टाफ के साथ जिम्मेदार रवैया
इसके साथ ही मरीज के तीमारदार को मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर के साथ जिम्मेदार और सम्मानित रवैया रखना चाहिए। उनकी आईसीयू पॉलिसी, डिसइंफेक्शन पॉलिसी को मानना जरूरी है।


