ENT डॉक्टर की चेतावनी! रोजाना की इन 10 आदतों से बना लें दूरी
रोजाना की कुछ आदतें सेहत को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं। इंस्टाग्राम पर ईएनटी सर्जन डॉक्टर आषीमा चोपड़ा ने 10 आदतों के बारे में बताया है जिनसे हर किसी को दूरी बना लेनी चाहिए। आप भी जानिए क्या हैं वह आदतें।

हेल्थ का ख्याल रखने के लिए बड़ी चीजों के साथ छोटी आदतों पर गौर करना बहुत जरूरी है। कान, नाक और गले से जुड़ी कई परेशानियां हमारी रोजाना की आदतों से भी बढ़ सकती हैं और धीरे-धीरे किसी बड़ी समस्या का कारण बनती हैं। इसलिए ईएनटी डॉक्टर मुताबिक, कुछ सामान्य आदतों को लंबे समय तक दोहराने से कान, नाक या गले में जलन और कई संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
1) कॉटन बड से कान साफ करना
ये वैक्स को कान की नली में और अंदर धकेल सकते हैं। इसकी वजह से कान की नाजुक त्वचा या कान के पर्दे में जलन या चोट पहुंच सकती है।
2) तेज आवाज में गाने सुनना
लगातार तेज आवाज सुनने से सुनने में मदद करने वाली संवेदनशील कोशिकाएं धीरे-धीरे खराब हो सकती हैं। आजकल बहुत से लोग कानों में ईयरबड लगाकर गाने सुनना पसंद करते हैं और ये आदत खतरनाक साबित हो सकती है।
3) नाक बंद रहने को नजरअंदाज करना
लगातार नाक बंद रहने की समस्या एलर्जी, साइनस की समस्या, पलीप्स या नाक की हड्डी टेढ़ी होने (डेविएटेड नेजल सेप्टम) से जुड़ी हो सकती है और इसकी जांच करवानी चाहिए।
4) नेजल डिकंजेस्टेंट स्प्रे का ज्यादा इस्तेमाल
कुछ डिकंजेस्टेंट स्प्रे का बहुत लंबे समय तक इस्तेमाल करने से 'रिबाउंड कंजेशन' हो सकता है, जिससे आपकी नाक और भी ज्यादा बंद महसूस हो सकती है। इसलिए डॉक्टर द्वारा बताए गए दिनों तक ही इसका इस्तेमाल करें।
5) बार-बार गला साफ करना
बार-बार गला साफ करने से वोकल कॉर्ड में जलन हो सकती है। अगर आप लगातार ऐसा करते रहते हैं तो आगे चलकर गला साफ करने पर जलन की समस्या हो सकती है।
6) रोजाना मुंह खोलकर सोना
लगातार मुंह से सांस लेने से मुंह और गला सूख सकता है और यह नाक में किसी रुकावट का साइन हो सकता है।
7) लगातार खर्राटे लेने को नजरअंदाज करना
वैसे तो ये एक कॉमन प्रॉब्लम है, लेकिन नियमित रूप से तेज खर्राटे लेना खासकर सांस लेने में रुकावट, हांफने या सांस रुकने के साथ—नींद से जुड़ी सांस की समस्या का संकेत हो सकता है।
8) डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक्स लेना
कान, नाक और गले के कई आम संक्रमण वायरल होते हैं, इसलिए एंटीबायोटिक्स से कोई फायदा नहीं होता और इनके बेवजह इस्तेमाल से एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या बढ़ सकती है।
9) भारी आवाज को नजरअंदाज करना जो ठीक नहीं हो रही
आवाज में लगातार बदलाव वोकल स्ट्रेन, रिफ्लक्स या वोकल-कॉर्ड की समस्याओं के कारण हो सकते हैं और अगर ये बने रहते हैं तो डॉक्टर से सलाह लें।
10) कान, नाक और गले की बार-बार होने वाली समस्याएं
कान में बार-बार संक्रमण, साइनस की समस्या, गले की दिक्कतें या सुनने की क्षमता में बदलाव को कॉमन समस्या समझकर इग्नोर ना करें।


