रोज घर का खाना, फिर भी 200+ रहती है शुगर? डॉक्टर ने बताए 3 बड़े कारण और सुधार

Apr 14, 2026 06:01 pm ISTAnmol Chauhan लाइव हिन्दुस्तान
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Diabetes Control Tips: रोज घर का सादा खाना खाते हैं पर पता नहीं शुगर क्यों बढ़ी हुई रहती है। अगर आपका भी यही हाल है तो डायबिटीज रिवर्सल एक्सपर्ट डॉ प्रमोद त्रिपाठी की ये सलाह एक बार आपको जरूर जाननी चाहिए।

रोज घर का खाना, फिर भी 200+ रहती है शुगर? डॉक्टर ने बताए 3 बड़े कारण और सुधार

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो आजकल काफी कॉमन होती जा रही है। चूंकि ये एक लाइफस्टाइल संबंधी बीमारी है, इसलिए आप बेशक कितनी भी दवाइयां या ट्रीटमेंट ले लें, जबतक अपने लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव नहीं करेंगे तबतक कोई खास फायदा नहीं होने वाला। अब इसपर लोग अक्सर कहते हैं कि हम तो बाहर का कुछ भी नहीं खाते। रोज घर का बना हुआ खाना लेते हैं, जब भी शुगर लेवल बढ़ा हुआ रहता है। इसपर जानें-मानें डायबिटीज रिवर्सल एक्सपर्ट डॉ प्रमोद त्रिपाठी कहते हैं कि अमूमन 3 वजहें होती हैं, जो शुगर बढ़ने के पीछे जिम्मेदार होती हैं। अगर आप इन तीनों को समझ लें तो घर का खाना खा कर शुगर लेवल को आसानी से मैनेज किया जा सकता है। आइए एक-एक कर के समझते हैं।

पहली वजह - सुबह का IGF मॉलिक्यूल

IGF यानी इंसुलिन लाइक ग्रोथ फैक्टर दूध और दूध से बने प्रोडक्ट्स में पाया जाने वाला एक मॉलिक्यूल है, जो इंसुलिन की जगह जा कर चिपक जाता है क्योंकि ये इंसुलिन की तरह ही होता है। ये इंसुलिन को ठीक से काम नहीं करने देता, जिस वजह से शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है।

कैसे फिक्स करें: डॉक्टर सलाह देते हैं कि रोजाना सुबह आप जो चाय या कॉफी लेते हैं, उसमें से गाय के दूध को पूरी हटा दें। इसकी जगह आप नारियल का दूध या बादाम का दूध इस्तेमाल कर सकते हैं। ये छोटा सा बदलाव करते ही आपका शुगर लेवल नीचे आना शुरू हो जाता है।

दूसरी वजह- ब्रेकफास्ट और लंच में शुगर स्पाइक

शुगर बढ़ने की दूसरी बड़ी वजह है हमारा सुबह का नाश्ता और लंच। आमतौर पर हमारे ब्रेकफास्ट में पोहा, इडली, उपमा, पराठे या डोसा जैसी चीजें शामिल होती हैं, वहीं लंच में रोटी या चावल। इन सभी फूड्स में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा सबसे ज्यादा होती है। यही वजह है कि इन्हें खाने के बाद शुगर स्पाइक भी तेजी से होता है।

कैसे फिक्स करें: डॉ प्रमोद त्रिपाठी कहते हैं कि सुबह ब्रेकफास्ट में अनाज की मात्रा कम करें और इसकी जगह दाल और दाल से बने फूड आइटम शामिल करें। जैसे मूंग दाल, ढोकला, चीला, अप्पे आदि। वहीं लंच और डिनर में आप 25% का रूल फॉलो कर सकते हैं। यानी आप चावल या रोटी जैसे जो भी अनाज ले रहे हैं, उनकी मात्रा पूरे खाने की तुलना में सिर्फ 25 प्रतिशत ही रखें।

तीसरी वजह- अंदाजे से तेल या घी का इस्तेमाल करना

ये प्रॉब्लम ज्यादातर घरों में है। लोग खाना बनाते हुए अंदाजे से घी या तेल का इस्तेमाल करते हैं और कई बार तो बहुत ज्यादा ही कर लेते हैं। मोटा-मोटा अंदाजा लगाया जाए तो एक व्यक्ति प्रतिदिन 6-7 चम्मच तेल या घी खाने के जरिए कंज्यूम कर लेता है। इतना तेल हमारा लिवर झेल नहीं पाता और धीरे-धीरे फैटी हो जाता है, साथ ही ग्लूकोज भी ज्यादा बनाता है। यानी फैटी लिवर के साथ-साथ शुगर स्पाइक भी तेजी से होती है।

कैसे फिक्स करें: डॉक्टर सलाह देते हैं कि अपने रोज के खाने से तेल की मात्रा कम करें। आपको अपने तेल की मात्रा दो चम्मच से कम ले कर आनी चाहिए। यही मुख्य वजह है कि आज घर-घर में हार्ट के मरीज और डायबिटीज पेशेंट इतने ज्यादा बढ़ते जा रहे हैं।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या मेडिकल कंडीशन से जुड़े सवालों के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

Anmol Chauhan

लेखक के बारे में

Anmol Chauhan

अनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।

करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।

लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।

विशेषज्ञता के क्षेत्र
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