क्या सोशल मीडिया पर घंटों बिताने से बढ़ रहा डिप्रेशन का खतरा? साइकेट्रिस्ट से जानें कैसे पड़ रहा दिमाग पर असर

Mar 10, 2026 10:11 am ISTDeepali Srivastava लाइव हिन्दुस्तान
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आजकल हम लोग रियल लोगों से ज्यादा समय रील लाइफ को देते हैं और ज्यादातर टाइम रील्स स्क्रॉल करने में चला जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं ज्यादा सोशल मीडिया का इस्तेमाल आपके दिमाग पर बुरा असर डाल रहा है। इससे लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। 

क्या सोशल मीडिया पर घंटों बिताने से बढ़ रहा डिप्रेशन का खतरा? साइकेट्रिस्ट से जानें कैसे पड़ रहा दिमाग पर असर

सोशल मीडिया पर आजकल ज्यादातर लोग घंटों बिताते हैं। कई लोग 2-3 घंटे रील्स स्क्रॉल करने में ही अपना समय बिता देते हैं। सुबह पॉटी जाते, खाना खाते, ट्रैवल करते और फिर रात को सोने से पहले सोशल मीडिया देखना आजकल काफी आम हो चुका है। ऐसे में अक्सर लोग चिड़चिड़े, थके हुए, बेचैनी, फोकस की कमी जैसी चीजों को फेस करते हैं और इसका कारण ऑफिस का वर्कलोड या फिर पर्सनल लाइफ को मान लेते हैं। जबकि आपकी रियल लाइफ से ज्यादा आपको परेशान रील लाइफ कर रही है। सोशल मीडिया पर हम दूसरों की उपलब्धि, असफलता, हैप्पी लाइफ से इतना प्रभावित होते हैं कि उसका सीधा असर हमारे दिमाग पर होता है। हम उसी के बारे में सोचते रहते हैं और खुद की लाइफ को लेकर परेशान हो जाते हैं। ऐसे में कई लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे। दिल्ली की साइकेट्रिस्ट डॉ. पवित्रा शंकर का कहना है कि आजकल लोग मेंटल हेल्थ के कारण डिजिटल डिटॉक्स करना चुन रहे हैं और सोशल लाइफ से दूरी भी बना रहे हैं। कई सेलेब्स भी बीच में सोशल मीडिया से अलविदा ले चुके हैं और अब आम लोग भी यही फॉर्मूला अपना रहे हैं। चलिए बताते हैं आखिर कैसे सोशल मीडिया आपकी मानसिक स्थिती को चोट पहुंचा रहा है।

कैसे पड़ रहा असर?

डॉ. पवित्रा का कहना है कि सोशल मीडिया एक तरह का मायाजाल है, जिसमें अगर आप एक बार फंसे तो जल्दी निकल नहीं सकते। आजकल लोग लाइक्स, कमेंट्स, फॉलोअर्स की होड़ में इतना परेशान रहता हैं कि इसकी वजह से स्ट्रेस रहता है। कुछ महीनों पहले एक कंटेंट क्रिएटर ने फॉलोअर्स कम होने की वजह से अपनी जान दे दी थी। ये सब डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षण है, जो दिखाई नहीं देते। दूसरों की परफेक्ट दिखती जिंदगी देखकर खुद को कम आंकना आजकल बिल्कुल आम बात हो चुकी है। इससे लोग धीरे-धीरे डिप्रेशन में जा रहे हैं। हर कोई सोने से पहले सोशल मीडिया चेक करता है और ऐसे में दिमाग एक्टिव रहता है। साथ ही अगर आप कुछ ऐसा देख लेते हैं, जिससे बेचैनी हो तो नींद नहीं आती। ऐसे में दिमाग सही चीजों पर फोकस नहीं कर पाता।

डिजिटल डिटॉक्स क्या है?

डॉक्टर का कहना है कि आजकल मेंटल हेल्थ को बेहतर करने के लिए आपको डिजिटल डिटॉक्स करने की जरूरत है। इसमें आपको कुछ दिनों के लिए सोशल मीडिया से पूरी तरह से दूरी बनानी पड़ती है। जब आप सोशल मीडिया से दूर होंगे तो खुद पर फोकस कर पाएंगे और काम पर भी। डिजिटल डिटॉक्स दिमाग को शांत और रिसेट करने जैसा होता है, जिसमें आप दिमाग को आराम देंगे। जब दिमाग आराम कर लेगा, तो बेहतर काम करेगा।

क्या सोशल मीडिया खतरनाक है?

डॉक्टर का कहना है कि सोशल मीडिया खतरनाक बिल्कुल भी नहीं है और ये बहुत अच्छा प्लेटफॉर्म है अपनी फीलिंग्स को शेयर करने और लोगों से कनेक्ट करने का। लेकिन जब इसका इस्तेमाल ज्यादा होने लगे, तो दिक्कत है। आप अगर सोशल मीडिया लिमिट में यूज करते हैं, तो ये बिल्कुल बुरा नहीं है। बार-बार फोन चेक करना और रील्स स्क्रॉल करना दिमाग के लिए बुरा है।

नोट- यह खबर सामान्य जानकारियों पर आधारित है। किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ से उचित सलाह लें।

Deepali Srivastava

लेखक के बारे में

Deepali Srivastava

दीपाली श्रीवास्तव पिछले 8 वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और 5 सालों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में डेप्युटी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। संस्थान में साल 2021 में वेब स्टोरी से अपने सफर की शुरुआत करने के बाद, वह आज लाइफस्टाइल टीम का अहम हिस्सा हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स, यूजर बिहेवियर और पाठकों की रुचि को समझने में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद और प्रभावशाली कंटेंट प्रोफेशनल बनाती है।


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दीपाली ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत साल 2018 में राजस्थान पत्रिका की डिजिटल टीम से की। करियर के शुरुआती दौर से ही वह डिजिटल मीडिया से जुड़ी रही हैं। इसके बाद उन्होंने इन्शॉर्ट्स, सत्य हिंदी, बॉलीवुडशादीज.कॉम और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया। इस दौरान उन्होंने एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर लेखन के साथ-साथ सेलेब्रिटी इंटरव्यू, वीडियो स्टोरीज, फिल्म रिव्यू और रिसर्च-बेस्ड कंटेंट की कवरेज की।


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