बेटा होगा या बेटी, क्या हार्टबीट से पता चलता है? डॉक्टर ने तोड़ा यह मिथ

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प्रेग्नेंसी में बच्चे की धड़कन को लेकर अक्सर कई बातें कही जाती हैं। कुछ लोग तेज धड़कन होने पर बेटी और धीमी धड़कन का मतलब बताते हैं कि बेटा होगा। लेकिन क्या यह सच है? डॉक्टर ने इसे मिथ बताया है और सही जानकारी दी है।

Does baby heartbeat tell if its a Boy or Girl
बच्चे की धड़कन तेज है तो बेटी और धीमी है तो बेटा होगा, क्या यह बात सही है?

प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले हर चेकअप में माता-पिता के लिए बच्चे की सेहत सबसे जरूरी होती है। वहीं, सोनोग्राफी में बच्चे की धड़कन सुनना भी एक बहुत खूबसूरत पल होता है। लेकिन इसके साथ कई तरह की बातें भी सुनने को मिलती हैं। कुछ लोग कहते हैं कि अगर बच्चे की धड़कन तेज है तो बेटी होगी और अगर धड़कन धीमी है तो बेटा होगा। कई जगह तो यह भी कहा जाता है कि 140 से ऊपर की धड़कन बेटी और 140 से कम की धड़कन बेटा होने का संकेत है।

लेकिन क्या बच्चे की धड़कन से यह पता लगाया जा सकता है कि गर्भ में बेटा है या बेटी? डॉक्टर वैदेही मराठे के अनुसार, ऐसा मानना सही नहीं है। बच्चे की धड़कन उसकी सेहत के बारे में जरूरी जानकारी देती है, लेकिन इससे बच्चे का लिंग (gender) पता नहीं लगाया जा सकता।

140 हार्टबीट वाली बात सिर्फ एक मिथक है!

आपने भी शायद सुना होगा कि 140 से ज्यादा हार्टबीट हो तो बेटी और 140 से कम हो तो बेटा, लेकिन ऐसा नहीं है। सिर्फ बच्चे की हार्टबीट देखकर यह पता नहीं लगाया जा सकता कि बच्चा लड़का है या लड़की। बच्चे की हार्टबीट कई वजहों से बदल सकती है। इसलिए सिर्फ एक नंबर देखकर कोई अंदाजा लगाना सही नहीं है।

बच्चे की हार्टबीट क्यों चेक की जाती है?

सोनोग्राफी के दौरान डॉक्टर बच्चे की हार्टबीट इसलिए चेक करते हैं ताकि उसकी हेल्थ और ग्रोथ के बारे में पता चल सके। इससे डॉक्टर को यह देखने में मदद मिलती है कि बच्चा गर्भ में ठीक तरह से बढ़ रहा है या नहीं। इसके अलावा बच्चे की हलचल और विकास से जुड़ी दूसरी चीजें भी देखी जाती हैं। यानी हार्टबीट चेक करने का मकसद बच्चे की सेहत देखना है, उसका जेंडर पता करना नहीं।

प्रेग्नेंसी केयर

प्रेग्नेंसी में हार्टबीट बदलती रहती है

गर्भ में बच्चा कभी आराम कर रहा होता है तो कभी ज्यादा हलचल करता है। इसका असर कई बार उसकी हार्टबीट पर भी पड़ता है। इसलिए हर बार एक जैसी हार्टबीट आना जरूरी नहीं है। अगर हार्टबीट का नंबर अलग आए तो तुरंत परेशान होने या उससे बेटा-बेटी का अंदाजा लगाने की जरूरत नहीं है।

सोनोग्राफी क्यों की जाती है?

सोनोग्राफी में डॉक्टर सिर्फ हार्टबीट ही नहीं देखते। इसमें बच्चे की ग्रोथ, डेवलपमेंट और ओवरऑल हेल्थ भी देखी जाती है। इस जांच का मकसद यह देखना होता है कि प्रेग्नेंसी सही तरह आगे बढ़ रही है या नहीं। इसलिए सोनोग्राफी में हार्टबीट देखकर बच्चे के जेंडर का अंदाजा लगाना सही नहीं है।

तेज हार्टबीट का मतलब बेटी और धीमी हार्टबीट का मतलब बेटा नहीं होता!

बच्चे की हार्टबीट उसकी सेहत के बारे में जरूरी जानकारी देती है, लेकिन इससे यह पता नहीं चलता कि बच्चा लड़का है या लड़की। इसलिए इस तरह के मिथकों पर भरोसा करने के बजाय डॉक्टर की सलाह पर ध्यान दें।

Shubhangi Gupta

लेखक के बारे में

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शुभांगी गुप्ता एक अनुभवी जर्नलिस्ट हैं जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह पिछले 4+ वर्षों से देश के प्रतिष्ठित डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म लाइव हिंदुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) से जुड़ी हुई हैं। यहां वह बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं। इससे पहले शुभांगी लगभग एक साल अमर उजाला डिजिटल में भी काम कर चुकी हैं।


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