
सावधान! कहीं आप भी तो नहीं सो रहे हैं 6 घंटे से कम? डॉक्टर से जानें क्या होते हैं 5 बड़े नुकसान
ज्यादातर लोग आज या तो काम के बोझ या फिर स्क्रीन की चकाचौंध की वजह से सिर्फ 5-6 घंटे की नींद को ही पर्याप्त मान बैठे हैं। जबकि नींद के दौरान हमारा शरीर सो नहीं रहा होता, बल्कि शरीर कोशिकाओं की मरम्मत करता है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमने घड़ी की सुइयों के साथ दौड़ना तो सीख लिया, लेकिन शरीर की सबसे बुनियादी जरूरत'नींद'को कहीं पीछे छोड़ आए हैं। ज्यादातर लोग आज या तो काम के बोझ या फिर स्क्रीन की चकाचौंध की वजह से सिर्फ 5-6 घंटे की नींद को ही पर्याप्त मान बैठे हैं। जबकि नींद के दौरान हमारा शरीर सो नहीं रहा होता, बल्कि शरीर कोशिकाओं की मरम्मत करता है, ऊर्जा भरता है, और हार्मोन व प्रोटीन जारी करता है ताकि वह अगले दिन के लिए तैयार हो सके।
आईएसआईसी मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में कार्डिएक साइंसेज डॉ. असीम ढल कहते हैं कि नींद कोई विलासिता (luxury) नहीं, बल्कि जीवित रहने का एक अनिवार्य तंत्र है। जिस तरह एक लंबी यात्रा के बाद मशीन को ठंडा होने और सर्विसिंग की जरूरत पड़ती है, ठीक वैसे ही रात के ये अंधेरे घंटे हमारे दिमाग की सफाई, हार्मोन के संतुलन और यादों को सहेजने के लिए मुकर्रर हैं। जब आप अपनी नींद से चंद घंटे चुराते हैं, तो असल में आप अपनी सेहत और उम्र से कीमती साल चुरा रहे होते हैं। 6 घंटे से कम की यह निरंतर कमी धीरे-धीरे आपके शरीर की नींव को खोखला कर सकती है, जिसका असर आपकी एकाग्रता से लेकर आपके दिल की धड़कन तक पर पड़ता है।
6 घंटे से कम नींद लेने से शरीर पर पड़ता है ये असर
मानसिक स्वास्थ्य
6 घंटे से कम नींद लेने पर पहला असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। नींद कम होने से ध्यान केंद्रित करना, सीखना और याद रखना कठिन हो जाता है। इससे रोजमर्रा के कामों में गलती होने की संभावना बढ़ जाती है। निरंतर नींद की कमी से मूड में बदलाव करती है, चिड़चिड़ापन, तनाव, चिंता और डिप्रेशन जैसी स्थितियां अधिक सामान्य हो जाती हैं। डॉ. असीम ढल बताते हैं कि नींद की कमी धीरे-धीरे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर भावनात्मक संतुलन भी बिगाड़ सकती है।
हृदय स्वास्थ्य
कम नींद लेने का दूसरा बड़ा असर हृदय स्वास्थ्य पर पड़ता है। नियमित रूप से छह घंटे से कम सोने वाले लोगों में उच्च रक्तचाप, हृदय की धड़कन के असामान्य पैटर्न और दिल से जुड़ी अन्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। नींद का सही मात्रा में न मिलना शरीर में स्ट्रेस हार्मोन को उच्च स्तर पर रखता है, जिससे ब्लड प्रेशर अनियंत्रित हो सकता है। इससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है तथा हृदय रोगों के खतरे में वृद्धि होती है।
प्रतिरक्षा प्रणाली
कम नींद लेने से प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) पर भी बुरा असर पड़ता है। आमतौर पर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता रात की नींद के दौरान मजबूत होती है। जब नींद कम होती है, तो शरीर संक्रमणों और बीमारियों से लड़ने की अपनी क्षमता खोने लगता है। फिर चाहे सर्दी-जुकाम हो या गंभीर बीमारी, शरीर तेजी से प्रतिक्रिया नहीं दे पाता।
मेटाबोलिज्म
नींद की कमी का असर मेटाबोलिज्म पर भी दिखाई देता है। कम नींद लेने से मधुमेह जैसी समस्याओं के जोखिम भी बढ़ जाता है। कई अध्ययनों से पता चला है कि नींद की कमी इंसुलिन संवेदनशीलता को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे ब्लड शुगर नियंत्रण करना मुश्किल हो जाता है।
वजन
नींद की कमी का असर वजन पर भी दिखाई देता है। यह भूख और संतुष्टि को नियंत्रित करने वाले हार्मोनों (घ्रेलिन और लेप्टिन) को बाधित करती है, जिससे भूख बढ़ती है और आप अधिक कैलोरी (खासकर वसा और कार्ब्स) खाने लगते हैं,जिससे वजन बढ़ने लगता है।
नींद की कमी और जीवनशैली रोगों के बीच सीधा संबंध
डॉ. असीम ढल के अनुसार, नींद की कमी और जीवनशैली रोगों के बीच सीधा संबंध है। स्वस्थ जीवन के लिए रोज़ाना 7–8 घंटे की नींद लेना न केवल शरीर की मरम्मत के लिए आवश्यक है, बल्कि मस्तिष्क की कार्यक्षमता, भावनात्मक संतुलन और दीर्घकालिक स्वास्थ्य रक्षा के लिये भी जरूरी है।
नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उपाय
अगर आप नियमित रूप से छह घंटे से कम सोते हैं और थकान, ध्यान में कमी, चिड़चिड़ापन, या स्वास्थ्य में अन्य बदलाव महसूस करते हैं, तो यह संकेत है कि आपको अपनी नींद की आदतों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। एक संतुलित दिनचर्या, नियमित सोने का समय, कम तनाव और स्वस्थ आहार -ये सभी मिलकर आपकी नींद की गुणवत्ता को बेहतर बना सकते हैं।
सलाह- रात में पर्याप्त नींद न लेना सिर्फ एक दिन की सुस्ती या थकान का कारण नहीं है । यह आपके सम्पूर्ण स्वास्थ्य पर असर डालने वाली समस्या है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

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Manju Mamgainलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




