सुबह या शाम; डायबिटीज रोगियों के लिए किस समय की सैर फायदेमंद, डॉक्टर मोहन का बताया
Best Time To Walk For Diabetics Patients : जाने-माने मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. मोहन की माने तो, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए केवल चलना काफी नहीं है, बल्कि सही समय का चुनाव आपके शरीर के इंसुलिन को एक नई शक्ति भी दे सकता है।

भागदौड़ भरी जिंदगी और खानपान की खराब आदतें, आजकल लोगों को लाइफस्टाइल से जुड़े बड़े रोगों की तरफ धकेल रही हैं। जिसमें डायबिटीज का नाम भी शामिल है। ब्लड शुगर कंट्रोल रखने के लिए डॉक्टर अकसर अच्छी डाइट के साथ रोजाना कुछ देर टहलने की सलाह देते हैं। लेकिन बात जब कभी सैर की आती है, तो लोग अक्सर अच्छे परिणाम के लिए चलने के लिए दिन का कौन सा समय बेहतर है-सुबह या शाम, इस बहस में पड़ जाते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि सुबह का समय शांत, सुकून भरा और स्फूर्तिदायक होता है, जबकि अन्य मानते हैं कि लंबे दिन के बाद शाम का समय बेहतर रहता है। बता दें, डायबिटीज स्पेशलिटीज सेंटर के अध्यक्ष और पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित फेमस मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. मोहन की माने तो, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए केवल चलना काफी नहीं है, बल्कि सही समय का चुनाव आपके शरीर के इंसुलिन को एक नई शक्ति भी दे सकता है। आइए जानते हैं शुगर लेवल को जादुई तरीके से कंट्रोल करने के लिए डॉ. मोहन टहलने के लिए कौन सा समय अच्छा बताते हैं।
कोई एक समय सबके लिए सही नहीं होता
डॉ. मोहन कहते हैं कि 'सुबह की सैर या शाम की सैर, यह एक ऐसा सवाल है जो लोग मुझसे अक्सर पूछते हैं। लेकिन मुझे लगता है कि हर व्यक्ति के लिए सैर का एक ही समय उपयुक्त नहीं हो सकता। कुछ लोग सुबह जल्दी उठने वाले होते हैं तो कुछ लोग शाम को टहलना पसंद करते हैं'। डॉ. मोहन के अनुसार शरीर दिन के किसी भी समय की शारीरिक गतिविधि पर अच्छी प्रतिक्रिया देता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपनी जीवनशैली के अनुकूल समय चुनें और नियमित रूप से उस पर कायम रहें।
डॉ. मोहन को क्यों पसंद है सुबह की सैर ?
यूं तो डॉ. मोहन सैर के लिए दोनों ही विकल्पों को सही मानते हैं। लेकिन बात जब उनकी व्यक्तिगत पसंद की होती है तो उन्हें सुबह सैर करना ज्यादा पसंद है। उन्होंने कहा, 'सुबह फ्रेश हवा होती है, प्रदूषण भी कम होता है और शरीर भी रात की नींद लेने के बाद तरोताजा होता है। उनका मानना है कि सुबह का समय शरीर और मस्तिष्क के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। यही वो समय है जब मस्तिष्क और शरीर को सभी आवश्यक जानकारी मिलती है, इसलिए मैं सुबह की सैर को प्राथमिकता देता हूं'।
शाम की सैर भी है फायदेमंद
डॉ. मोहन ने स्पष्ट किया कि सुबह की सैर छूट जाने का मतलब यह नहीं है कि आप पूरी तरह से सैर करना छोड़ दें। उन्होंने कहा, 'अगर आप किसी वजह से सुबह की सैर नहीं कर पाते हैं, तो आप शाम की सैर भी कर सकते हैं'। शाम की सैर लोगों को तरोताजा महसूस करने, काम के बाद तनाव कम करने और नींद की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद कर सकती है। व्यस्त सुबह या रात की शिफ्ट वाले लोगों के लिए, शाम की सैर ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प हो सकती है और जो बिल्कुल ठीक भी है।
भोजन के बाद टहलने का बढ़ता ट्रेंड
डॉ. मोहन कहते हैं कि लोगों के बीच आजकल टहलने का एक नया ट्रेंड फेमस हो रहा है और वो है भोजन के बाद सैर करना। डॉक्टर मोहन लोगों को हर मील के बाद लगभग 15 मिनट छोटी सैर करने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति नाश्ते के बाद 10-15 मिनट, दोपहर के भोजन के बाद 10-15 मिनट और रात के खाने के बाद 10-15 मिनट टहलता है तो उसे सुबह या शाम टहलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
हर मील के बाद टहलने से ब्लड शुगर लेवल में कैसे सुधार होता है?
खाने के बाद टहलने का सीधा संबंध ब्लड शुगर से जुड़ा हुआ है। डॉ. मोहन कहते हैं कि 'खाना खाने के बाद शुगर लेवल बढ़ने लगता है, और जब आप टहलना शुरू करते हैं, तो शुगर लेवल कम हो जाता है'। उनका कहना है कि खाने के बाद टहलने से पाचन क्रिया को मदद मिलती है और व्यक्ति का पाचन ठीक बना रहता है।
ब्लड शुगर कंट्रोल रखने के लिए कितने कदम चलना सही है?
डॉ. मोहन कहते हैं कि आप सैर के लिए भले ही कोई भी समय चुने लेकिन रोजाना चलना-फिरना जरूरी है। उन्होंने मधुमेह रोगियों को कम से कम रोजाना 7,000 कदम चलने का लक्ष्य रखने की सलाह दी है। नियमित रूप से इस लक्ष्य को पूरा करने से मधुमेह को नियंत्रित रखने में ही नहीं बल्कि पूरे स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। अपने वीडियो में डॉक्टर मोहन ने कहा, 'अगर आप ऐसा कर पाते हैं, तो इससे न केवल आपका मधुमेह नियंत्रण में रहेगा, बल्कि आपकी सेहत भी अच्छी बनी रहेगी'।

लेखक के बारे में
Manju Mamgain
शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
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मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।
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