घर का खाना खाने के बाद भी क्यों हो रहा कैंसर? डॉक्टर ने बताई 1 गलती, जो कर रहे 95% लोग!

Apr 20, 2026 07:16 pm ISTAnmol Chauhan लाइव हिन्दुस्तान
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Cancer Causes: आजकल जो लोग स्मोक या ड्रिंक नहीं करते और आमतौर पर घर का खाना ही खाते हैं, उनमें भी कैंसर का रिस्क बढ़ता जा रहा है। ऑन्कोलॉजिस्ट ने इसके पीछे की एक सबसे बड़ी वजह बताई है, जो ज्यादातर लोग कहीं ना कहीं कर रहे हैं।

घर का खाना खाने के बाद भी क्यों हो रहा कैंसर? डॉक्टर ने बताई 1 गलती, जो कर रहे 95% लोग!

आजकल कैंसर से जुड़े मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें कुछ वो लोग भी शामिल हैं, जो सिर्फ घर का खाना खाते हैं लेकिन बावजूद इसके कैंसर का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में ये सवाल उठता है कि घर का खाना खाने के बाद भी आखिर कैंसर क्यों हो रहा है? पहले इस बीमारी को गलत लाइफस्टाइल जैसे स्मोकिंग या ड्रिंकिंग से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन चिंता की बात तब हुई जब नॉर्मली हेल्दी माना जाने वाला घर का खाना खाने पर भी लोगों में कैंसर के मामले दिखाई देने लगे। सवाल है कि आखिर ऐसा क्यों? गलती असल में कहां हो रही है? इसी सवाल का जवाब ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ वर्तिका विश्वानी ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए दिया है, जिसे जानना हर किसी के बेहद जरूरी है, क्योंकि डेली बेसिस पर कहीं ना कहीं ये गलती हम सभी कर रहे हैं।

घर का खाने के बाद भी कैंसर का रिस्क क्यों?

आजकल जो लोग स्मोक या ड्रिंक नहीं करते और आमतौर पर घर का खाना ही खाते हैं, उनमें भी कैंसर का रिस्क बढ़ता जा रहा है। डॉ वर्तिका कहती हैं कि इसका सबसे बड़ा कारण है अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता इस्तेमाल। आजकल घर में बनने वाले खाने में भी कई ऐसी चीजें शामिल हैं, जो अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की कैटेगरी में आती हैं। डॉक्टर बताती हैं कि कई स्टडीज मौजूद हैं, जो ये प्रूफ करती हैं कि कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड काफी बड़ा कारण है।

क्या होता है अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड?

अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड ऐसे पैकेटबंद या रेडी टू ईट फूड आइटम होते हैं, जिनमें नेचुरल चीजों के अलावा कई तरह के केमिकल्स, प्रिजर्वेटिव्स, आर्टिफिशियल फ्लेवर और कलर मिलाए जाते हैं। आजकल तो घर के खाने के नाम पर भी हम इनमें से कई चीजों का सेवन करते हैं, जिस वजह से कैंसर का रिस्क भी बढ़ता जाता है।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में क्या-क्या चीजें शामिल हैं?

डॉ वर्तिका बताती हैं कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की लिस्ट में कई ऐसी चीजें शामिल हैं, जो ज्यादातर लोगों की डेली डाइट का हिस्सा है। उदाहरण के लिए रिफाइंड फ्लोर यानी मैदा, एडेड शुगर (जैसे ग्लूकोज सिरप), रिफाइंड तेल। वहीं कई फूड प्रोडक्ट्स में आर्टिफिशियल फ्लेवर और कलर, इमल्सीफायर्स, स्टेबलाइजर्स, प्रिजर्वेटिव्स भी शामिल होते हैं। इसके अलावा आप इनके लेबल्स पर माल्टोडेक्सट्रिन, हाइड्रोजेनेटेड ऑयल्स, फ्लेवर एन्हांसर्स जैसे इंग्रेडिएंट्स भी देखेंगे।

डॉक्टर बताती हैं कि रोजमर्रा में आप जो नमकीन, बिस्किट, कुकीज, इंस्टेंट नूडल्स, पास्ता और ब्रेकफास्ट वाले सीरियल्स खाते हैं, वो सभी अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की कैटेगरी में आते हैं। इसके अलावा फास्ट फूड जैसे पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज भी सेहत को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। खासतौर से फ्रोजन फूड तो आपको हर हाल में अवॉइड ही करना चाहिए क्योंकि इसमें भर-भर के प्रिजर्वेटिव्स मौजूद होते हैं और कैंसर का रिस्क भी ज्यादा होता है।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या मेडिकल कंडीशन से जुड़े सवालों के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

Anmol Chauhan

लेखक के बारे में

Anmol Chauhan

अनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।

करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।

लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।

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