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सर्दियों में सुबह जल्दी उठने में क्यों होती है परेशानी? सुस्ती नहीं डॉक्टर ने बताई 8 बड़ी वजह

सर्दियों में सुबह जल्दी उठने में क्यों होती है परेशानी? सुस्ती नहीं डॉक्टर ने बताई 8 बड़ी वजह

संक्षेप:

Reasons why it is difficult to wake up early in the winters : आपके इस आलस के पीछे सिर्फ आपका मन नहीं, बल्कि आपके शरीर का पूरा विज्ञान काम करता है। ठंडे तापमान और सूरज की लुका-छिपी के बीच हमारा शरीर कुछ ऐसे बदलावों से गुजरता है जो उठने की हर कोशिश को नाकाम कर देते हैं।

Jan 03, 2026 08:48 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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सर्दियों में शायद सबसे मुश्किल काम रजाई की गर्माहट वाले मखमली सुकून को छोड़कर बिस्तर से बाहर निकलना होता है। जो लोग सुबह समय पर ऐसा नहीं कर पाते हैं खुद को आलसी समझकर कोसने लगते हैं। जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग होती है। जी हां, आपके इस आलस के पीछे सिर्फ आपका मन नहीं, बल्कि आपके शरीर का पूरा विज्ञान काम करता है। ठंडे तापमान और सूरज की लुका-छिपी के बीच हमारा शरीर कुछ ऐसे बदलावों से गुजरता है जो उठने की हर कोशिश को नाकाम कर देते हैं। सीके बिरला अस्पताल की आंतरिक चिकित्सक डॉ. मनीषा अरोरा से समझते हैं कि आखिर क्यों सर्दियों की सुबह हमारी इच्छाशक्ति पर भारी पड़ जाती है और इसके पीछे की असली वजह क्या है।

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डॉ. मनीषा अरोरा कहती हैं कि सर्दियों में सुबह जल्दी उठने में परेशानी होना एक आम बात है। इसके पीछे शरीर से जुड़े (फिजियोलॉजिकल), माहौल से जुड़े और रोजमर्रा की आदतों से जुड़े कई कारण छिपे हुए होते हैं।

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सर्केडियन रिदम (Circadian Rhythm) में बदलाव

डॉ. मनीषा अरोरा कहती हैं कि सर्दियों में सुबह जल्दी ना उठने के पीछे सबसे बड़ा कारण धूप की कमी होती है। दरअसल, धूप हमारे शरीर की अंदरूनी घड़ी (जिसे सर्केडियन रिदम कहते हैं) को कंट्रोल करती है, जो सोने–जागने का समय तय करती है। सर्दियों में दिन छोटे होते हैं और सूरज देर से निकलता है, जिससे सुबह शरीर को पर्याप्त रोशनी नहीं मिल पाती। इसका असर दिमाग पर पड़ता है और शरीर को लगता है कि अभी रात ही है, इसलिए नींद बनी रहती है।

मेलानोनिंन (Melatonin) का बढ़ा हुआ स्तर

सर्दियों में सुबह जल्दी ना उठने के पीछे दूसरा बड़ा कारण है, शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का अधिक बनना। अंधेरे में यह हार्मोन ज्यादा बनता है और नींद लाने में मदद करता है। सर्दियों में रातें लंबी होती हैं, इसलिए मेलाटोनिन देर तक बनता रहता है। इसकी वजह से ज्यादा नींद आती है और सुबह उठने पर सुस्ती और भारीपन महसूस होता है।

शरीर का तापमान और थर्मोरेगुलेशन

ठंडा मौसम भी नींद आने में बड़ी भूमिका निभाता है। ठंड में शरीर ऊर्जा बचाने के लिए थोड़ा स्लो हो जाता है और आराम की ओर झुकता है। गरम रजाई में पड़े रहना और बाहर की ठंड, इस कॉम्बिनेशन में बिस्तर छोड़ना और भी मुश्किल लगने लगता है। ठंड की वजह से शरीर में खून का बहाव भी थोड़ा कम हो सकता है, जिससे आलस और थकान महसूस होती है।

लो सेरोटोनिन

सर्दियों का असर मूड और मानसिक सेहत पर भी असर पड़ता है। कम धूप की वजह से सेरोटोनिन नाम का 'फील गुड' केमिकल कम हो सकता है, जिससे उदासी, थकान और ज्यादा सोने का मन करता है। कुछ लोगों को सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD) होता है, लेकिन जिनको नहीं भी होता, उन्हें भी हल्की सुस्ती और थकान महसूस हो सकती है।

विटामिन D की कमी

सर्दियों में लोगों को धूप कम मिलती है। जिससे शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है। शरीर में विटामिन डी की कमी थकान, कमजोरी और उर्जा की कमी का कारण बन सकती है, जिससे सुबह उठना और मुश्किल लगने लगता है।

लाइफस्टाइल

हमारी लाइफस्टाइल भी असर डालती है। सर्दियों में लोग कम एक्सरसाइज करते हैं, जिससे दिन में एनर्जी कम खर्च होती है और नींद का पैटर्न बिगड़ सकता है। भारी खाना, ज्यादा कार्बोहाइड्रेट और अनियमित सोने का समय भी नींद की क्वालिटी और सुबह की फुर्ती को खराब करता है।

इंफेक्शन

सर्दियों में सर्दी–खांसी और दूसरे अन्य इंफेक्शन ज्यादा परेशान करते हैं। इस मौसम में हल्की बीमारी भी शरीर को ज्यादा आराम मांगने पर मजबूर कर देती है, जिससे जल्दी उठना कठिन हो जाता है।

डिहाइड्रेशन

आखिर में, सर्दियों में लोगों को प्यास कम लगती है, जिसकी वजह से वो पानी कम पाते हैं। ऐसे में शरीर में हल्की डिहाइड्रेशन भी थकान और सुबह फ्रेश न लगने का कारण बन सकती है।

डॉक्टर की सलाह

सर्दियों में देर से उठना बॉडी क्लॉक में बदलाव, हार्मोनल असर, ठंडा माहौल, पोषण की कमी और आदतों में बदलाव जैसे कई कारणों की वजह से होता है। जो कि बिल्कुल नॉर्मल है। अगर सर्दियों में अच्छी नींद, सही खाना, थोड़ी धूप, नियमित एक्सरसाइज और सही रूटीन रखा जाए, तो इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain
मंजू ममगाईं लाइव हिन्दुस्तान में लाइफस्टाइल सेक्शन में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। मंजू ने अपना पीजी डिप्लोमा भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली और ग्रेजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय से किया हुआ है। इन्हें पत्रकारिता जगत में टीवी, प्रिंट और डिजिटल का कुल मिलाकर 16 साल का अनुभव है। एचटी डिजिटल से पहले मंजू आज तक, अमर उजाला, सहारा समय में भी काम कर चुकी हैं। आज तक में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन लीड करने के बाद अब मंजू एचटी डिजिटल में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए काम कर रही हैं। और पढ़ें

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