सावधान! डिमेंशिया के 50 प्रतिशत मामलों के पीछे छिपी हैं आपकी ये रोजमर्रा की गलतियां, डॉक्टर ने दी सलाह

Feb 06, 2026 06:09 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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डॉ. अतमप्रीत सिंह कहते हैं कि सबसे पहले समझना जरूरी है कि डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं बल्कि याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता में धीरे-धीरे होने वाली कमी का समूह है, जिसमें अल्जाइमर जैसी बीमारियों का नाम भी शामिल है।

सावधान! डिमेंशिया के 50 प्रतिशत मामलों के पीछे छिपी हैं आपकी ये रोजमर्रा की गलतियां, डॉक्टर ने दी सलाह

डिमेंशिया को लोग अक्सर बढ़ती उम्र की समस्या मानते हैं, लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च कई मामलों का इसका संबंध रोजमर्रा की आदतों से जोड़कर भी देखती है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, लगभग आधे डिमेंशिया के मामलों में कई ऐसे जोखिम कारक शामिल होते हैं, जिन्हें सही आदतों को अपनाकर समय रहते कम किया जा सकता है। शारदा केयर हेल्थ सिटी के सीनियर डायरेक्टर एवं हेड न्यूरोसाइंसेज डॉ. अतमप्रीत सिंह कहते हैं कि सबसे पहले समझना जरूरी है कि डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं बल्कि याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता में धीरे-धीरे होने वाली कमी का समूह है, जिसमें अल्जाइमर जैसी बीमारियों का नाम भी शामिल है। कई लोगों को यह लगता है कि इस समस्या को रोका नहीं जा सकता, लेकिन लाइफस्टाइल से जुड़े कई कारण ऐसे हैं जिन्हें कंट्रोल करके जोखिम कम जरूर किया जा सकता है।

डिमेंशिया का खतरा बढ़ाते हैं ये कारण

द लैंसेट में प्रकाशित एक रिसर्च में जिन प्रमुख लाइफस्टाइल फैक्टर्स की बात सामने आई है, उनमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएँ जैसे डिप्रेशन शामिल हैं। इसके अलावा सामाजिक अलगाव, कम शिक्षा, सुनने की समस्या, अत्यधिक शराब का सेवन और प्रदूषण जैसे कारक भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।

डिमेंशिया के खतरे को दूर रखती हैं ये आदतें

हमारा दिमाग शरीर के बाकी अंगों की तरह ही स्वस्थ आदतों पर निर्भर करता है। नियमित एक्सरसाइज से ब्लड फ्लो बेहतर होता है, जिससे ब्रेन सेल्स को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण मिलता है। संतुलित आहार, खासकर हरी सब्जियां, फल, नट्स और ओमेगा-3 फैटी एसिड, मस्तिष्क के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। इसके साथ ही नींद पूरी लेना, तनाव कम लेना और मानसिक रूप से सक्रिय रहना जैसे पढ़ना, पहेलियां हल करना या नई चीजें सीखना दिमाग को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।

छोटे ब्रेक लेना भी है जरूरी

आजकल डिजिटल लाइफस्टाइल और बैठकर काम करने की आदतों ने भी जोखिम बढ़ाया है। लंबे समय तक निष्क्रिय रहना या लगातार स्क्रीन पर रहना मानसिक और शारीरिक दोनों स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। इसलिए दिनभर में छोटे-छोटे ब्रेक लेना और सक्रिय रहना जरूरी है।

दिमागी सेहत को अच्छा बनाए रखती हैं ये आदतें

डिमेंशिया की रोकथाम जीवन की किसी एक स्टेज तक सीमित नहीं है। युवा अवस्था से ही हेल्दी आदतें अपनाने से उम्र बढ़ने पर भी दिमाग के स्वस्थ बने रहने की संभावना बढ़ जाती है। ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराना, धूम्रपान से दूरी और सामाजिक रूप से जुड़े रहना दिमागी स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी कदम हैं।

सलाह- अगर परिवार में किसी व्यक्ति में याददाश्त कमजोर होना, बार-बार चीजें भूलना, व्यवहार में बदलाव या रोजमर्रा के कामों में परेशानी जैसे लक्षण दिखें, तो इसे नजरअंदाज न करें और समय पर न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह लें। सही समय पर पहचान और लाइफस्टाइल में सुधार से डिमेंशिया की गति को कम करके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain

शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।

करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि और विशेषज्ञता:
दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी (ऑनर्स) और भारतीय विद्या भवन से मास कम्युनिकेशन करने वाली मंजू, साल 2008 से ही मेडिकल रिसर्च और हेल्थ विषयों पर अपनी लेखनी चला रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत जटिल वैज्ञानिक तथ्यों और मेडिकल रिसर्च को 'एक्सपर्ट-वेरिफाइड' मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी हर खबर डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित होती है, जो डिजिटल युग में विश्वसनीयता की कसौटी पर खरी उतरती है।

बहुमुखी प्रतिभा और विजन
उनका पत्रकारीय जुनून केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। वे आधुनिक जीवन की भागदौड़ में रिलेशनशिप की जटिलताएं, ब्यूटी ट्रेंड्स, फैशन, ट्रैवलिंग और फूड जैसे विषयों को भी एक्सपर्ट के नजरिए से कवर करती हैं। मंजू का मानना है कि डिजिटल युग में एक पत्रकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी 'फैक्ट-चेकिंग' और प्रमाणिक जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक और बेहतर जीवन निर्णय ले सकें।

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