फेमस एंकर सरला माहेश्वरी का पार्किंसन से निधन, जानें क्या है यह रोग, जो शरीर से छीन लेता है अपना ही नियंत्रण

Feb 13, 2026 02:53 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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सरला महेश्वरी के निधन के बाद यह बीमारी एक बार फिर चर्चा में आ गई है, जिसके बाद लोग इस बीमारी के बारे में जानते हैं। इस रोग के बारे में अधिक जानकारी लेने के लिए हमने बात की शारदाकेयर-हेल्थसिटी के सीनियर डायरेक्टर एवं हेड न्यूरोसाइंसेज डॉ. आतमप्रीत सिंह से।

फेमस एंकर सरला माहेश्वरी का पार्किंसन से निधन, जानें क्या है यह रोग, जो शरीर से छीन लेता है अपना ही नियंत्रण

1980 के दशक की दूरदर्शन की स्टार एंकर मानी जाने वाली सरला महेश्वरी का 71 की उम्र निधन हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अपनी संजीदगी, स्पष्ट उच्चारण और सौम्य व्यवहार के लिए पहचाने जाने वाली मशहूर एंकर सरला पार्किंसन नाम की एक न्यूरो डिजनरेशन बीमारी से जूझ रहीं थीं। बता दें, पार्किंसन एक नर्वस सिस्टम में होने वाली बीमारी है, जो मूवमेंट समेत शरीर के कई हिस्सों को कंट्रोल करती है। सरला महेश्वरी के निधन के बाद यह बीमारी एक बार फिर चर्चा में आ गई है, जिसके बाद लोग इस बीमारी के बारे में जानते हैं। इस रोग के बारे में अधिक जानकारी लेने के लिए हमने बात की शारदाकेयर-हेल्थसिटी के सीनियर डायरेक्टर एवं हेड न्यूरोसाइंसेज डॉ. आतमप्रीत सिंह से। आइए जानते हैं आखिर क्या होता है पार्किंसन रोग, इसके लक्षण और बचाव के उपाय।

क्या है पार्किंसन रोग

पार्किंसन रोग (Parkinson’s Disease) एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो मुख्य रूप से दिमाग में डोपामिन बनाने वाली कोशिकाओं के धीरे-धीरे कम होने से होती है। डोपामिन शरीर की मूवमेंट, संतुलन और मांसपेशियों के नियंत्रण के लिए जरूरी होता है। जब दिमाग में इसकी कमी होने लगती है, तो व्यक्ति की चाल, हाथ-पैर की गतिविधियों और दैनिक काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है।

पार्किंसन के शुरुआती लक्षण

पार्किंसन रोग के शुरुआती लक्षण रोगी में धीरे-धीरे शुरू होते हैं। जिसकी वजह से अकसर कई लोग इन्हें उम्र का सामान्य असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जिसमें हाथों में हल्की कंपन (tremor), शरीर में जकड़न, चलने की गति धीमी होना, संतुलन बिगड़ना, लिखावट छोटी होना, चेहरे के भाव कम होना या आवाज धीमी पड़ना इसके प्रमुख संकेत हैं। डॉ. आतमप्रीत सिंह कहते हैं कि इसके अलावा इस रोग के कुछ गैर-मोटर लक्षण भी हो सकते हैं जैसे नींद की समस्या, कब्ज, सूंघने की क्षमता कम होना, डिप्रेशन या चिंता। इन शुरुआती संकेतों को पहचानना समय पर इसके इलाज के लिए बहुत जरूरी है।

पार्किंसन रोग का कारण

पार्किंसन रोग का सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन बढ़ती उम्र, आनुवंशिक प्रवृत्ति, पर्यावरणीय कारक और लंबे समय तक कुछ विषैले तत्वों के संपर्क को संभावित जोखिम माना जाता है। हालांकि यह पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली से जोखिम कम करने और बीमारी की प्रगति धीमी करने में मदद मिल सकती है।

पार्किंसन रोग से राहत देंगे ये उपाय

नियमित व्यायाम, खासकर बैलेंस और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, दिमाग और शरीर दोनों के लिए लाभकारी साबित होते हैं। इसके अलावा संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, मानसिक सक्रियता और नियमित हेल्थ चेकअप भी इस रोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक कंपन, चलने में बदलाव या व्यवहारिक परिवर्तन महसूस हों, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

सलाह-आज आधुनिक चिकित्सा में दवाइयों, फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और कुछ मामलों में सर्जिकल विकल्पों से मरीजों की जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है। सबसे जरूरी बात है कि लक्षणों को नजरअंदाज न करें, क्योंकि समय पर पहचान और सही प्रबंधन से पार्किंसन के साथ भी सक्रिय और सम्मानजनक जीवन जिया जा सकता है।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain

शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।

करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि और विशेषज्ञता:
दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी (ऑनर्स) और भारतीय विद्या भवन से मास कम्युनिकेशन करने वाली मंजू, साल 2008 से ही मेडिकल रिसर्च और हेल्थ विषयों पर अपनी लेखनी चला रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत जटिल वैज्ञानिक तथ्यों और मेडिकल रिसर्च को 'एक्सपर्ट-वेरिफाइड' मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी हर खबर डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित होती है, जो डिजिटल युग में विश्वसनीयता की कसौटी पर खरी उतरती है।

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