कफ सिरप ने ली कई बच्चों की जान, डॉक्टर से जानें खांसी होने पर अपनाएं कौन से 7 असरदार उपाय

कफ सिरप ने ली कई बच्चों की जान, डॉक्टर से जानें खांसी होने पर अपनाएं कौन से 7 असरदार उपाय

संक्षेप:

Natural ways to treat kids cough without cough syrups : डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट्स ने बच्चों को ओवर-द-काउंटर खांसी की सिरप देने से मना किया है। बच्चा अगर खांसी से ज्यादा परेशान है तो आप उसे कफ सिरप की जगह कुछ असरदार घरेलू उपाय आजमाकर भी राहत पहुंचा सकते हैं।

Oct 16, 2025 11:22 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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बदलता मौसम, प्रदूषण, बीमारी या फिर अनहेल्दी लाइफस्टाइल, खासतौर पर छोटे बच्चों के लिए सेहत से जुड़ी कई समस्याओं का कारण बनते हैं। जिसमें सर्दी-खांसी बच्चों को होने वाली सबसे कॉमन प्रॉब्लम होती है। छोटे बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होने की वजह से बदलते मौसम का असर सबसे पहले उन्हें परेशान करता है। कुछ समय पहले तक बच्चों को खांसी की शिकायत होने पर पेरेंट्स उन्हें कफ सिरप दे दिया करते थे। लेकिन हाल ही में राजस्थान और मध्य प्रदेश में कफ सिरप पीने से कई बच्चों की मौत हो गई और कई बच्चे गंभीर रूप से बीमार होने की खबरों के सामने आने के बाद डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट्स ने बच्चों को ओवर-द-काउंटर खांसी की सिरप देने से मना किया है। बता दें, ज्यादातर सिरप में डेक्सट्रोमेथॉर्फन, कोडीन या एंटीहिस्टामिन्स मौजूद होते हैं, जो बच्चों में सुस्ती, तेज धड़कन या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण का कारण बन सकते हैं।

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

सीके बिरला हॉस्पिटल में नियोनेटोलॉजी और बाल रोग विभाग की निदेशक डॉ. पूनम सिदाना कहती हैं कि कई रिसर्च से यह भी पता चला है कि ये सिरप खांसी के असली कारण का इलाज नहीं करते, बल्कि सिर्फ लक्षणों को छुपा देते हैं, जिससे रिकवरी में देरी हो सकती है। ज्यादातर मामलों में बच्चों में खांसी गले और सांस की नली से बलगम, धूल या इंफेक्शन साफ करने का शरीर का अपना प्राकृतिक तरीका होता है। लेकिन बच्चा अगर खांसी से ज्यादा परेशान है तो आप उसे कफ सिरप की जगह कुछ असरदार घरेलू उपाय आजमाकर भी राहत पहुंचा सकते हैं।

वहीं सीके बिरला हॉस्पिटल, दिल्ली में पल्मोनोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. विकास मित्तल का कहना है कि आजकल बच्चों को खांसी की सिरप देने से मना किया जा रहा है क्योंकि ज्यादातर सिरप में कोडीन, डेक्सट्रोमेथॉर्फन और एंटीहिस्टामिन्स जैसी दवाएं होती हैं। ये दवाएं खांसी को कंट्रोल तो करती हैं, लेकिन खांसी के असली कारण का इलाज नहीं करतीं। दुनियाभर में इन दवाओं का बच्चों में इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी जाती है, खासकर 6 साल से छोटे बच्चों के लिए तो बिल्कुल नहीं, और 12 साल तक के बच्चों को भी डॉक्टर की सलाह के बाद देना चाहिए।

बच्चों को खांसी होने पर क्या करें?

खांसी को ठीक करने के लिए जरूरी है कि उसका कारण पता लगाया जाए, जैसे सर्दी, एलर्जी, इंफेक्शन या कोई और वजह, और फिर उम्र के हिसाब से पेडियाट्रिशन की सलाह लेकर सही दवा दी जाए। इस बात का खास ध्यान रखें कि बड़ों की दवाएं बच्चों को कभी न दें।

बच्चों को खांसी से राहत देंगे ये घरेलू टिप्स

गर्म तरल पदार्थ दें- बच्चे को गर्म पानी, सूप या हर्बल चाय (जैसे तुलसी या अदरक की चाय – बड़ी उम्र के बच्चों के लिए) दें। इससे गले की जलन कम होती है और खांसी में आराम मिलता है।

शहद - एक साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को सोने से पहले आधा या एक चम्मच शहद देने से गले को आराम मिलता है और रात की खांसी कम होती है। (इस बात का ध्यान रखें कि एक साल से छोटे बच्चों को शहद न दें।

स्टीम या भाप- बच्चे को भाप दिलाने से बलगम ढीला होता है और सांस की नली खुलती है। छोटे बच्चों को भाप हमेशा बड़ों की निगरानी में ही दी जानी चाहिए। कमरे में ह्यूमिडिफायर चलाना भी मददगार होता है।

नाक में सलाइन ड्रॉप्स डालें- अगर खांसी नाक बंद होने की वजह से है, तो सलाइन ड्रॉप्स या बल्ब सिरिंज से राहत मिल सकती है।

हाइड्रेशन बनाए रखें- बच्चे को खूब तरल पदार्थ दें, इससे बलगम पतला होकर बाहर निकलने में मदद मिलती है।

प्रदूषण से बचाव- बच्चे को सिगरेट के धुएं, तेज परफ्यूम और धूल-पॉल्यूशन से दूर रखें।

आराम जरूरी है- शरीर की रिकवरी के लिए पर्याप्त आराम और नींद बहुत जरूरी है।

बच्चे को खांसी होने पर खुद से नेबुलाइजर देना सही है?

डॉ. विकास मित्तल कहते हैं कि नेबुलाइजर की दवाएं ओवर-द-काउंटर नहीं दी जाती हैं। इन्हें हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही दिया जाता है, खासकर तब जब बच्चे को एलर्जिक ब्रोंकाइटिस या अस्थमा जैसी समस्या हो। नेबुलाइजर का उपयोग हर तरह की खांसी के लिए जरूरी नहीं होता है। डॉ. पूनम सिदाना कहती हैं कि खासकर अगर पहले भी बच्चे को अगर मौसमी एलर्जी, सीटी बजती सांस (wheezing) या नेब्युलाइजर की जरूरत पड़ती रही हो, तो भी डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है। माता-पिता को चाहिए कि वे रेड फ्लैग्स पहचानना सीखें और किसी भी बदलाव को नजरअंदाज़ न करें।

डॉक्टर से संपर्क कब हो जाता है जरूरी?

अगर बच्चे की खांसी –

-लगातार बनी रहती है

-सांस लेने, खाने-पीने या सोने में परेशानी हो रही है

-बुखार ज्यादा है या सांस लेने में कठिनाई दिख रही है

-बच्चे को पहले से एलर्जी या अस्थमा का इतिहास रहा है

इन सभी लक्षणों के दिखते ही पीडियाट्रिशन को जरूर दिखाएं।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain
मंजू ममगाईं लाइव हिन्दुस्तान में लाइफस्टाइल सेक्शन में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। मंजू ने अपना पीजी डिप्लोमा भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली और ग्रेजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय से किया हुआ है। इन्हें पत्रकारिता जगत में टीवी, प्रिंट और डिजिटल का कुल मिलाकर 16 साल का अनुभव है। एचटी डिजिटल से पहले मंजू आज तक, अमर उजाला, सहारा समय में भी काम कर चुकी हैं। आज तक में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन लीड करने के बाद अब मंजू एचटी डिजिटल में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए काम कर रही हैं। और पढ़ें

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