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अलर्ट: 30 से कम उम्र की महिलाओं में क्यों बढ़ रहा है सर्वाइकल कैंसर का खतरा? डॉक्टर ने बताएं चौंकाने वाले कारण

अलर्ट: 30 से कम उम्र की महिलाओं में क्यों बढ़ रहा है सर्वाइकल कैंसर का खतरा? डॉक्टर ने बताएं चौंकाने वाले कारण

संक्षेप:

Cervical Cancer Awareness Month 2026 : आजकल 30 साल से कम उम्र की महिलाओं में सर्वाइकल से जुड़ी समस्याएं, खासकर प्री-कैंसर घाव और सर्वाइकल कैंसर, पहले से ज्यादा देखने को मिल रही हैं। यह पिछले कई दशकों में हुई प्रगति के उलट है।

Jan 12, 2026 11:30 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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देशभर में हर साल जनवरी महीने को सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। यह खास माह सर्वाइकल स्वास्थ्य और उसकी सुरक्षा के बारे में जानने का एक बेहतरीन समय है। सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमण है, जो एक यौन संचारित वायरस है। कुछ साल पहले तक सर्वाइकल कैंसर को उम्र से जोड़कर देखा जाता था। लेकिन आज गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर उम्रदराज महिलाओं के साथ-साथ कम उम्र की लड़कियां और युवा महिलाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। रेनबो हॉस्पिटल की ऑब्स्टेट्रिशियन व गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. अलका चौधरी के अनुसार आजकल 30 साल से कम उम्र की महिलाओं में सर्वाइकल से जुड़ी समस्याएं, खासकर प्री-कैंसर घाव और सर्वाइकल कैंसर, पहले से ज्यादा देखने को मिल रही हैं। यह पिछले कई दशकों में हुई प्रगति के उलट है। यह रुझान इसलिए भी चिंता की बात है क्योंकि सर्वाइकल कैंसर ज्यादातर मामलों में रोका जा सकता है। ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के हाई-रिस्क स्ट्रेन्स, खासतौर पर HPV-16 और HPV-18 का लंबे समय तक संक्रमण, इसका सबसे बड़ा कारण है और लगभग सभी मामलों से जुड़ा हुआ है।

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सीके बिड़ला हॉस्पिटल की ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. तृप्ति रहेजा कहती हैं कि आजकल 30 साल से कम उम्र की महिलाओं में सर्वाइकल से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिसकी वजह कम उम्र में यौन संबंध बनाना, पार्टनर बार-बार बदलना या एक से ज्यादा पार्टनर होना। इस तरह की आदतों से HPV, क्लैमाइडिया और गोनोरिया जैसे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, जो सर्वाइकल से जुड़ी समस्याओं की मुख्य वजहों में शामिल हैं।

सर्वाइकल कैंसर के पीछे छिपी बड़ी वजह

सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते आंकड़ों के पीछे HPV वैक्सीनेशन की कमी है। 20 की उम्र वाली कई महिलाओं को शुरुआती टीकाकरण कार्यक्रम नहीं मिल पाते हैं, जिससे वे संक्रमण के ज्यादा जोखिम वाले सालों में असुरक्षित रह गईं। बदलता यौन व्यवहार, कम उम्र में संक्रमण की शुरुआत और HPV स्ट्रेन्स के पैटर्न में बदलाव ने भी संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ाया है। HIV के साथ जी रही महिलाओं में यह जोखिम कहीं ज्यादा होता है, जो दिखाता है कि कमजोर इम्यून सिस्टम सर्वाइकल बीमारी के विकास में अहम भूमिका निभाता है।

रूटीन स्क्रीनिंग की कमी

सर्वाइकल कैंसर को जन्म देने वाली दूसरी वजह, 21 से 29 साल की महिलाओं में रूटीन स्क्रीनिंग का कम होना है। पैप टेस्ट में देरी या उसे मिस कर देने से प्रीकैंसर बदलाव देर से पकड़े जाते हैं। सामाजिक और आर्थिक असमानताएं स्थिति को और खराब करती हैं। कम आय और वंचित समुदायों की महिलाओं को अक्सर स्क्रीनिंग और फॉलो-अप इलाज तक पहुंचने में दिक्कत होती है। अपॉइंटमेंट में देरी और इलाज में गैप जैसी स्वास्थ्य सेवाओं में रुकावटों की वजह से भी कई मामलों में बीमारी एडवांस स्टेज में सामने आ रही है।

सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम

सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम HPV वैक्सीनेशन का दायरा बढ़ाकर, स्क्रीनिंग की दर और जागरूकता फैलाने में बेहद अहम है। सेल्फ-सेम्पल HPV टेस्टिंग, हाई-रिस्क ग्रुप्स तक टारगेटेड पहुंच और लगातार पब्लिक एजुकेशन जैसे कदम इस समस्या को समय से बढ़ने पर रोकने के साथ बीमारी से निपटने और लंबे समय तक महिलाओं की सर्वाइकल सेहत को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain

शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।

करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।

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