'मैं स्क्रीनिंग के लिए बहुत छोटी हूं', खतरे में डाल सकती है यह सोच, ये है एक्सपर्ट की सलाह
ज्यादातर लोग आज भी स्वास्थ्य को उम्र की कतार में खड़ा कर देते हैं, यह भूलकर कि गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) किसी महिला की उम्र देखकर उसे अपना शिकार नहीं बनाता है, बल्कि यह उन खामोश बदलावों का नतीजा है जो शरीर में सालों पहले शुरू हो सकते हैं।

सीके बिरला अस्पताल की गायनोकॉलोजिस्ट डॉ. तृप्ति रहेजा कहती हैं कि 'अभी तो मेरी उम्र ही क्या है?' या 'मैं स्क्रीनिंग के लिए अभी बहुत छोटी हूं, 'मैं अभी जवान हूं', मुझे स्क्रीनिंग की जरूरत नहीं'— ये कुछ ऐसे वाक्य हैं, जो अक्सर क्लिनिक में सुने जाते हैं। दुर्भाग्यवश महिलाओं की यही सोच कई बार 'रोग की पहचान' में देरी कर देती है, और कुछ मामलों में जान भी ले सकती है। ज्यादातर लोग आज भी स्वास्थ्य को उम्र की कतार में खड़ा कर देते हैं, यह भूलकर कि गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) किसी महिला की उम्र देखकर उसे अपना शिकार नहीं बनाता है, बल्कि यह उन खामोश बदलावों का नतीजा है जो शरीर में सालों पहले शुरू हो सकते हैं। आज के समय में बदलती जीवनशैली और पर्यावरण के बीच यह धारणा न केवल पुरानी पड़ चुकी है, बल्कि बेहद जोखिम भरी भी है। कैंसर के विरुद्ध युद्ध में 'देरी' सबसे घातक हथियार साबित होता है, और 'जल्दी जांच' ही एकमात्र बचाव का उपाय है।
आइए जानते हैं आखिर क्यों सर्वाइकल कैंसर की जल्दी जांच जरूरी होती है
1. सर्वाइकल कैंसर अचानक नहीं आता-
सर्वाइकल कैंसर का खतरा अचानक पैदा नहीं होता। संक्रमण से लेकर कैंसर बनने के बीच 10 से 15 साल का एक लंबा अंतराल होता है। ज्यादातर महिलाएं अपने जीवन के तीसरे दशक (20s) में HPV संक्रमण के संपर्क में आती हैं, क्योंकि इसी समय शारीरिक सक्रियता सबसे अधिक होती है। विडंबना यह है कि इसी उम्र में महिलाएं खुद को सबसे ज्यादा 'सुरक्षित' और 'बीमारी से दूर' मानती हैं। HPV वायरस शरीर के भीतर 'साइलेंट प्री-कैंसर' अवस्था पैदा करता है। इसमें न दर्द होता है, न सूजन और न ही कोई बाहरी लक्षण। यह कोशिकाएं चुपचाप बदलती रहती हैं। जब तक दर्द महसूस होता है, तब तक अवसर हाथ से निकल चुका होता है। इसीलिए, स्क्रीनिंग बीमारों के लिए नहीं, बल्कि स्वस्थ दिखने वाली महिलाओं के लिए है।
2. स्क्रीनिंग की जल्दी जरूरत क्यों है-
कई महिलाएं सोचती हैं कि स्क्रीनिंग केवल बच्चे होने के बाद या 30–40 की उम्र में जरूरी है। लेकिन Pap smear और HPV टेस्ट प्रीकैंसरस स्टेज या HPV संक्रमण का पता लगाने के लिए सबसे कारगर हैं, जो युवा उम्र में ही शुरू हो सकते हैं। राष्ट्रीय गाइडलाइन के अनुसार, लक्षण आने तक इंतजार करना सुरक्षित नहीं है। लक्षण दिखने तक कई बार रोग एडवांस्ड स्टेज में पहुंच चुका होता है।
3. एक पार्टनर, फिर भी जोखिम
HPV इतना आम है कि दुनिया की लगभग 80 प्रतिशत आबादी अपने जीवनकाल में कभी न कभी इसके संपर्क में आती है। यह सर्दी-खांसी के वायरस जितना ही फैला हुआ है। इसे किसी के 'व्यवहार' या 'चरित्र' से जोड़ना न केवल गलत है, बल्कि जानलेवा भी है, क्योंकि इसी शर्म के कारण महिलाएं जांच से पीछे हटती हैं। लेकिन आपको बता दें, एक 'लाइफटाइम पार्टनर' भी कई बार वायरस का जरिया बन सकता है। वायरस को आपके रिश्तें की गहराई या वफादारी से कोई सरोकार नहीं है। यदि आपके पार्टनर को अनजाने में पहले कभी संक्रमण हुआ है, तो वह आप तक पहुंच सकता है। इसलिए, यह सोचना कि "मैं एक स्थिर रिश्ते में हूं, तो मुझे जांच की जरूरत नहीं," खुद को धोखे में रखने जैसा है।
4. भावनात्मक और सामाजिक बाधाएं
कुछ महिलाएं स्क्रीनिंग से इसलिए बचती हैं क्योंकि उन्हें शर्म के साथ असहजता महसूस होती है या फिर गलत परिणाम का डर होता है। यह भावनाएं नॉर्मल हैं, लेकिन इस सोच को बदलना चाहिए। जांच बीमारी ढूंढने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है। यदि शुरुआती चरण (Pre-cancer) में कुछ पता चलता भी है, तो उसका निदान 100 प्रतिशत तक संभव होता है। डरना तब चाहिए जब हम जांच न कराएं और बीमारी को उस मोड़ पर ले जाएं जहां से वापसी मुश्किल हो।
5. समय पर जांच करवाने के फायदे
भारत में ज्यादातर सर्वाइकल कैंसर का पता आखिरी स्टेज पर चलता है, जिससे इलाज जटिल, महंगा और शारीरिक रूप से थकाने वाला हो जाता है। अगर स्क्रीनिंग के जरिए शुरुआती चरण (Early Stage) में इसका पता चल जाए, तो इलाज साधारण, कम खर्चीला और बेहद प्रभावी होता है।
6. स्क्रीनिंग एक जिम्मेदारी है, बीमारी का संकेत नहीं
स्क्रीनिंग बीमारी का संकेत नहीं, बल्कि अपने शरीर के प्रति जिम्मेदारी का संकेत है। याद रखें, युवा होने का मतलब यह नहीं कि आपको कोई रोग नहीं घेर सकता है, बल्कि इसका मतलब यह है कि आपके पास 'बचाव' (Prevention) के लिए सबसे अनमोल समय है। इस उम्र में शरीर वैक्सीन और इलाज के प्रति सबसे बेहतर प्रतिक्रिया देता है।
लेखक के बारे में
Manju Mamgain
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मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
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मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।
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