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भारत में फेमस हैं HPV वैक्सीन से जुड़े ये 3 मिथक, डॉक्टर से जानें सच और सही उम्र

भारत में फेमस हैं HPV वैक्सीन से जुड़े ये 3 मिथक, डॉक्टर से जानें सच और सही उम्र

संक्षेप:

Cervical Cancer Awareness Month 2026 : चिंता की बात यह है कि इस कैंसर की HPV वैक्सीन को लेकर लोगों में कई गलतफहमियां और मिथक फैले हुए हैं। जो इसके उपचार में कई बार देरी का कारण भी बनते हैं।

Jan 19, 2026 02:54 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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हर साल जनवरी का महीना 'गर्भाशय ग्रीवा कैंसर जागरूकता माह'2026 (Cervical Cancer Awareness Month 2026) के रूप में मनाया जाता है। भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले कैंसर से जुड़ी मौतों में सबसे आगे है। यह कैंसर महिलाओं में होने वाले दूसरे सबसे आम कैंसर में से एक है, हालांकि राहत की बात यह है कि सही समय पर टीकाकरण और जांच के जरिए इस कैंसर को पूरी तरह रोका जा सकता है। इस कैंसर का सबसे बड़ा कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) है। चिंता की बात यह है कि इस कैंसर की HPV वैक्सीन को लेकर लोगों में कई गलतफहमियां और मिथक फैले हुए हैं। जो इसके उपचार में कई बार देरी का कारण भी बनते हैं। ऐसे में सर्वाइकल कैंसर और इसकी HPV वैक्सीन से जुड़े 3 बड़े मिथकों की सच्चाई जानने के लिए हमने सीके बिरला अस्पताल की प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. तृप्ति रहेजा के साथ बातचीत की।

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मिथक 1: वैक्सीन सिर्फ सेक्सुअली एक्टिव महिलाओं के लिए है

सच्चाई- इस मिथक में सच्चाई बिल्कुल नहीं है। दरअसल, HPV वैक्सीन हर उस महिला पर अच्छे से काम करती हैं, जिसे वायरस से पहले लगाया गया हो। इस वैक्सीन को लगाने की सही उम्र 9 से 14 साल है। इस उम्र में इम्यून रिस्पॉन्स सबसे मजबूत होता है और वैक्सीन की भी सिर्फ 2 ही डोज लगती हैं। लेकिन यह वैक्सीन 26 साल तक और कुछ केस में उससे भी अधिक उम्र की महिलाओं को लाभ दे सकती है, यह उनकी व्यक्तिगत रिस्क फैक्टर्स पर निर्भर करता है।

मिथक 2: वैक्सीन लेने से बच्चे जल्दी सेक्स करने लगेंगे

सच्चाई- इस मिथक का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह वैक्सीन प्रिवेंटिव हेल्थ माप है, जैसे बचपन या किशोरावस्था में करवाए गए अन्य टीकाकरण। जिसका मकसद बीमारी को होने से पहले रोकना है, न कि किसी व्यवहार को प्रभावित करना।

मिथक 3: शादी या बच्चे होने के बाद वैक्सीन लेने का कोई फायदा नहीं

सच्चाई- वैक्सीन मौजूदा HPV इंफेक्शन को ठीक नहीं करती, लेकिन यह उन स्ट्रेस से अभी भी सुरक्षा देती है जिनसे महिला अभी तक संक्रमित नहीं हुई है।

सुरक्षा को लेकर चिंता

डॉ. तृप्ति कहती हैं कि अक्सर पैरेंट्स वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। दुनिया भर में लाखों डोज लगाए जा चुके हैं, और HPV वैक्सीन को सुरक्षित, प्रभावी और अच्छे से सहन करने योग्य माना गया है। भारत में जहां सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग दर अभी भी कम है, वहां HPV वैक्सीन भविष्य में कैंसर के बोझ को कम करने का सबसे बड़ा मौका देती है। यह वैक्सीन स्क्रीनिंग का विकल्प नहीं है, बल्कि इसे पूरक उपाय के रूप में देखा जाना चाहिए। आखिर में, HPV वैक्सीन डर से नहीं, दूरदर्शिता से जुड़ा कदम है। यह एक लंबे समय में स्वास्थ्य में निवेश है, जो कैंसर को शुरू होने से पहले रोक सकता है।

कौन ले सकता है HPV वैक्सीन?

-9–14 साल की उम्र के बच्चे

-15–26 साल की किशोर और युवा महिलाएं

-जिन महिलाओं में पहले HPV संक्रमण नहीं हुआ

सही जानकारी और समय पर वैक्सीनेशन से हम सर्वाइकल कैंसर के खतरे को भारत में कम करके महिलाओं को स्वस्थ जीवन जीने की दिशा में बड़ा कदम उठाने के लिए जागरूक कर सकते हैं।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain

शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।

करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।

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दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी (ऑनर्स) और भारतीय विद्या भवन से मास कम्युनिकेशन करने वाली मंजू, साल 2008 से ही मेडिकल रिसर्च और हेल्थ विषयों पर अपनी लेखनी चला रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत जटिल वैज्ञानिक तथ्यों और मेडिकल रिसर्च को 'एक्सपर्ट-वेरिफाइड' मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी हर खबर डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित होती है, जो डिजिटल युग में विश्वसनीयता की कसौटी पर खरी उतरती है।

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