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सावधान! करियर की रेस या शुगर का खतरा? जानें क्यों 20 साल के पेशेवर युवाओं में बढ़ रहा प्रीडायबिटीज का खतरा

सावधान! करियर की रेस या शुगर का खतरा? जानें क्यों 20 साल के पेशेवर युवाओं में बढ़ रहा प्रीडायबिटीज का खतरा

संक्षेप:

यह सोचना कि 'शुगर तो बुढ़ापे की बीमारी है', आज के दौर की सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है। हकीकत यह है कि पिज्जा-बर्गर वाली डाइट और वर्क-स्ट्रेस ने बीस साल के युवाओं को उस मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां से मधुमेह की बीमारी बस एक कदम दूर है।

Jan 15, 2026 09:45 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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बीस साल की उम्र जीवन का वह पड़ाव होता है, जहां युवा अपने करियर से जुड़े सपने और ऊंचाइयों को छूने की कोशिश में लगे हुए होते हैं। लेकिन आज के समय में इस भागदौड़ के बीच एक खामोश खतरा युवाओं के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। जिसका नाम प्रीडायबिटीज है। आज के युवा पेशेवर जब ऑफिस की फाइलों और लैपटॉप की स्क्रीन में खोए हुए रहते हैं, तब उनका बिगड़ा हुआ बॉडी क्लॉक और घंटों एक ही जगह बैठे रहने की आदत के साथ खराब खानपान उनके शरीर के मेटाबॉलिज्म को भीतर ही भीतर खोखला कर रहा होता है। यह सोचना कि 'शुगर तो बुढ़ापे की बीमारी है', आज के दौर की सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है। हकीकत यह है कि पिज्जा-बर्गर वाली डाइट और वर्क-स्ट्रेस ने बीस साल के युवाओं को उस मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां से मधुमेह की बीमारी बस एक कदम दूर है।

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट

सीके बिरला अस्पताल (दिल्ली) के आंतरिक चिकित्सक डॉ. मनीषा अरोरा कहते हैं कि प्रीडायबिटीज की समस्या पहले ज्यादातर मिड एज या बड़े उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब यह परेशानी 20 की उम्र के युवा प्रोफेशनल्स को भी तेजी से घेर रही है। भारत में प्रीडायबिटीज की राष्ट्रीय प्रचलन दर 15.3 प्रतिशत है, और युवा लोग भी काफी संख्या में इस समस्या से प्रभावित हैं। जो इस बात की तरफ इशारा करता है कि भारत में मेटाबॉलिक शिफ्ट तेजी से हो रही है।

प्रीडायबिटीज के मुख्य कारण

1. सुस्त लाइफस्टाइल - लंबे समय तक डेस्क पर बैठना, स्क्रीन टाइम बढ़ना, और वर्कआउट की कमी इंसुलिन सेंसिटिविटी को कम करती है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल रखना मुश्किल हो जाता है।

2.खानपान की आदतें- मील स्किप करना, अनियमित समय पर भोजन, प्रोसेस्ड और जंक फूड का अधिक सेवन, मीठी ड्रिंक्स और लेट नाइट ईटिंग से ब्लड शुगर बढ़ती है।

3.बढ़ता स्ट्रेस और नींद की कमी- हाई प्रेशर वर्क एन्वायरनमेंट की वजह से शरीर में कोर्टिसोल बढ़ जाता है, जिससे इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ता है। इसके अलावा नींद की कमी, भूख और ग्लूकोज मैटाबॉलिज्म को भी बिगाड़ती है

4.युवा होने का फॉल्स सिक्योरिटी फीलिंग- बहुत से युवाओं को यह लगता है कि वो अभी यंग हैं तो डायबिटीज रोग उनसे दूर होगा। जिसकी वजह से वो अपना चेकअप करवाने में देरी करते रहते हैं। ऐसे लोगों की प्रीडायबिटीज अक्सर ब्लड टेस्ट या हेल्थ स्क्रीनिंग के दौरान पकड़ में आती है।

5.जेनेटिक प्रिडिस्पोजिशन- फैमिली हिस्ट्री वाले लोगों में भी जोखिम ज्यादा बना रहता है। इसके साथ जब अनहेल्दी लाइफस्टाइल भी जुड़ जाता है तो मेटाबॉलिक डिसऑर्डर जल्दी शुरू हो सकता है।

क्या है उपाय?

-समय पर स्क्रीनिंग और ब्लड टेस्ट करवाएं

-लाइफस्टाइल में बदलाव करके नियमित एक्सरसाइज, संतुलित खाना, सही समय पर भोजन करने की आदत डालें।

-स्ट्रेस मैनेजमेंट और पर्याप्त नींद लें।

-सही समय पर इंटरवेंशन से प्रीडायबिटीज को रिवर्स किया जा सकता है और टाइप 2 डायबिटीज से बचा जा सकता है।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain
मंजू ममगाईं लाइव हिन्दुस्तान में लाइफस्टाइल सेक्शन में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। मंजू ने अपना पीजी डिप्लोमा भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली और ग्रेजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय से किया हुआ है। इन्हें पत्रकारिता जगत में टीवी, प्रिंट और डिजिटल का कुल मिलाकर 16 साल का अनुभव है। एचटी डिजिटल से पहले मंजू आज तक, अमर उजाला, सहारा समय में भी काम कर चुकी हैं। आज तक में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन लीड करने के बाद अब मंजू एचटी डिजिटल में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए काम कर रही हैं। और पढ़ें

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