
क्या शरीर में खून की कमी बच्चे की पढ़ाई पर डाल सकती है बुरा असर? जानें क्या होते हैं साइड इफेक्ट्स
Side Effects Of Anemia For Kids Mental Growth : डॉक्टरों की मानें तो इसके पीछे आपके बच्चे की आहार से जुड़ी खराब आदतें भी जिम्मेदार हो सकती हैं। आजकल फास्ट फूड के प्रति बढ़ता बच्चों का लगाव उनके शरीर में आयरन और अन्य पौष्टिक तत्वों की कमी का कारण बन रहा है।
पढ़ाई में कड़ी मेहनत करने के बावजूद अगर आपका बच्चा साथी बच्चों से पीछे रह जाता है या उसे कोई सवाल या पाठ समझाने के बाद थोड़ी देर बाद पूछने पर, याद नहीं रहता तो जरूरी नहीं कि आपके बच्चे के दिमाग में ही कोई कमी हो या आप बच्चे की इच्छा शक्ति पर ही सवाल उठाने लगें। डॉक्टरों की मानें तो इसके पीछे आपके बच्चे की आहार से जुड़ी खराब आदतें भी जिम्मेदार हो सकती हैं। आजकल फास्ट फूड के प्रति बढ़ता बच्चों का लगाव उनके शरीर में आयरन और अन्य पौष्टिक तत्वों की कमी का कारण बन रहा है। खासतौर पर आयरन की कमी की वजह से बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लग पाता है। शरीर में आयरन की कमी ना सिर्फ बच्चों की पढ़ाई पर असर डालती है बल्कि उनके दिमागी विकास को भी बुरी तरह प्रभावित करती है। आइए जानते हैं कैसे-
बच्चों में आयरन की कमी के लक्षण
-थकान और कमजोरी
-लो एनर्जी
-ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
-चेहरे या होंठों के रंग का फीका पड़ना
-बाल और नाखून कमजोर होना
-भूख में कमी
आयरन की कमी बच्चों की पढ़ाई पर कैसे डालती है बुरा असर
एकाग्रता होती है कम
बच्चे के शरीर में आयरन की कमी होने पर वो पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई महसूस करता है और उसमें पढ़ाई से जल्दी बोर होना, थकान, और सीखने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। आयरन मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर, जैसे डोपामाइन और सेरोटोनिन के निर्माण में मदद करता है। इन न्यूरोट्रांसमीटर का लेवल कम होने से बच्चों में इमोशनल और कॉग्निटिव डेवलपमेंट प्रभावित होता है।
नई चीजें याद रखने और सीखने की क्षमता कम होती है
लो आयरन से मस्तिष्क पर असर पड़ता है। बच्चे में आयरन की कमी से एकाग्रता, नई चीजें सीखने और पुरानी बातें याद रखने में दिक्कत देखी जा सकती है। मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी से 'ब्रेन फॉग' या संज्ञानात्मक समस्याएं होती हैं। यह थकान और एनीमिया का भी एक लक्षण है।
थकान और सुस्ती बनी रहती है
सुबह उठते ही बच्चा थका-थका महसूस करता है, होमवर्क करने का मन नहीं करता, खेलने में भी रुचि कम हो जाती है।
स्कूल में परफॉर्मेंस गिरती है
कई अध्ययनों (IIT, AIIMS सहित) में पाया गया है कि आयरन की कमी से बच्चों की एकाग्रता और सीखने की क्षमता प्रभावित होती है, जिससे उनके कक्षा के अंक 10-15 प्रतिशत तक कम हो सकते हैं। आयरन की कमी से थकान और संज्ञानात्मक विकास में बाधा आती है, जो प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।
चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ जाता है
छोटी-छोटी बात पर रोना या गुस्सा करना। इससे टीचर की शिकायतें और दोस्तों से झगड़े भी बढ़ जाते हैं।
आयरन की कमी दूर करने के उपाय
- डाइट में बदलाव करके फास्ट फूड की जगह पालक, मूंगफली और चुकंदर जैसी चीजें शामिल करें।
-फलो में विटामिन सी रिच फल जैसे संतरा, अमरूद, स्ट्रॉबेरी आयरन के अवशोषण को बढ़ाते हैं। इन्हें बच्चों को खाने के लिए दें।
आयरन सप्लीमेंट (डॉक्टर की सलाह से): यदि आहार पर्याप्त न हो, तो डॉक्टर आयरन सप्लीमेंट दे सकते हैं।
-अंकुरित दालें और अनाज (जैसे रागी) भी आयरन के अच्छे स्रोत हैं। बच्चे की डाइट में शामिल करें।

लेखक के बारे में
Manju Mamgainलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




