ब्लोटिंग हो या एसिडिटी, डॉक्टर ने चेताया कब पाचन से जुड़ी समस्याएं नहीं होती 'नॉर्मल'

Feb 18, 2026 08:36 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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कई लोग तुरंत राहत के लिए बिना डॉक्टर की सलाह लिए दवाएं खा लेते हैं। हालांकि यह आदत अस्थायी राहत तो दे सकती हैं, लेकिन समस्या की जड़ को खत्म नहीं करतीं।

ब्लोटिंग हो या एसिडिटी, डॉक्टर ने चेताया कब पाचन से जुड़ी समस्याएं नहीं होती 'नॉर्मल'

पाचन से जुड़ी हल्की परेशानियां जैसे कभी-कभार ब्लोटिंग या एसिडिटी होना आम बात है। भारी खाना खाने के बाद पेट फूलना या हल्की जलन महसूस होना कई लोगों को होता है। लेकिन जब बार-बार ब्लोटिंग, लगातार एसिडिटी, पेट भारी रहना, गैस या असहजता रोजमर्रा की समस्या बन जाए, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ISIC मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. सक्षम सेठ कहते हैं कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अनियमित खान-पान, तनाव, नींद की कमी और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन पाचन से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा रहा है। कई लोग तुरंत राहत के लिए बिना डॉक्टर की सलाह लिए दवाएं खा लेते हैं। हालांकि यह आदत अस्थायी राहत तो दे सकती हैं, लेकिन समस्या की जड़ को खत्म नहीं करतीं। बता दें, इस तरह की समस्याओं के पीछे कई बार गैस्ट्राइटिस, एसिड रिफ्लक्स, फूड इंटॉलरेंस या अन्य गंभीर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं भी कारण हो सकती हैं।

सिर्फ खाने से नहीं होती ब्लोटिंग

ज्यादातर लोगों का मानना है कि ब्लोटिंग या एसिडिटी सिर्फ खाने की वजह से होती है, लेकिन यह पूरा सच नहीं है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, भोजन छोड़ना, जल्दी-जल्दी खाना, ज्यादा कैफीन लेना या हार्मोनल बदलाव भी इसके पीछे छिपे कारण हो सकते हैं।

ब्लोटिंग को गंभीरता से कब लें

लगातार होने वाली ये डाइजेस्टिव समस्याएं शरीर के कई संकेतों के रूप में दिख सकती हैं जैसे थोड़ा खाने में ही पेट भर जाना, बार-बार डकार आना, सीने में जलन, अनियमित मल त्याग या बिना कारण थकान महसूस होना। अगर ये लक्षण रोजमर्रा की जिंदगी या नींद को प्रभावित कर रहे हैं, तो इन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है।

पाचन को बेहतर बनाती है ये आदतें

जीवनशैली में बदलाव पाचन सुधारने का पहला कदम है। नियमित समय पर संतुलित और छोटे-छोटे भोजन करना, फाइबर युक्त आहार लेना, पर्याप्त पानी पीना और तला-भुना या बहुत मसालेदार भोजन सीमित करना मददगार हो सकता है। साथ ही, नियमित शारीरिक गतिविधि भी पाचन को बेहतर बनाती है।

माइंडफुल ईटिंग और रिलैक्सेशन तकनीकें

तनाव का असर भी सीधे पाचन तंत्र पर पड़ता है क्योंकि दिमाग और पेट के बीच गहरा संबंध होता है। माइंडफुल ईटिंग, रिलैक्सेशन तकनीकें और नियमित नींद की आदतें लक्षणों को कम कर सकती हैं।

कैसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर को दिखाएं

अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें, बढ़ते जाएं या वजन कम होना, उल्टी या तेज दर्द जैसे संकेत दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। समय पर जांच और सही इलाज से जटिलताओं से बचा जा सकता है।

सलाह

डाइजेस्टिव हेल्थ को सिर्फ इसलिए नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि ये समस्याएं आम हैं। सही समय पर ध्यान देने और स्वस्थ आदतें अपनाने से पाचन बेहतर बनाया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain

शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।

करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।

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दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी (ऑनर्स) और भारतीय विद्या भवन से मास कम्युनिकेशन करने वाली मंजू, साल 2008 से ही मेडिकल रिसर्च और हेल्थ विषयों पर अपनी लेखनी चला रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत जटिल वैज्ञानिक तथ्यों और मेडिकल रिसर्च को 'एक्सपर्ट-वेरिफाइड' मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी हर खबर डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित होती है, जो डिजिटल युग में विश्वसनीयता की कसौटी पर खरी उतरती है।

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