Hindi Newsलाइफस्टाइल न्यूज़हेल्थbeware not just hormones increasing stress too become rise of autoimmune thyroid disease doctor gill suggest preventions
सावधान! तनाव भी हो सकता है ऑटोइम्यून थायरॉयड की वजह, डॉक्टर ने बताया- कैसे करें बचाव

सावधान! तनाव भी हो सकता है ऑटोइम्यून थायरॉयड की वजह, डॉक्टर ने बताया- कैसे करें बचाव

संक्षेप:

कल्पना कीजिए कि आपके शरीर की सुरक्षा करने वाली सेना यानी आपका इम्यून सिस्टम, अचानक अपनी ही ग्रंथियों को दुश्मन मानकर उन पर हमला कर दे- ऐसी ही डरावनी सच्चाई है हाशिमोटो और ग्रेव्स डिजीज जैसे ऑटोइम्यून रोगों भी कहा जाता है।

Jan 09, 2026 10:06 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

आज के समय में ज्यादातर महिलाओं में थायरॉयड की समस्या केवल एक हार्मोनल असंतुलन नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनकर उभर रही है। कल्पना कीजिए कि आपके शरीर की सुरक्षा करने वाली सेना यानी आपका इम्यून सिस्टम, अचानक अपनी ही ग्रंथियों को दुश्मन मानकर उन पर हमला कर दे- ऐसी ही डरावनी सच्चाई है हाशिमोटो और ग्रेव्स डिजीज जैसे ऑटोइम्यून रोगों भी कहा जाता है। हाल ही में किए गए कई शोध बताते हैं कि इस समस्या की जड़ें 'हाइपर-फास्ट' लाइफस्टाइल और कभी न खत्म होने वाले मानसिक तनाव में गहराई तक धंसी हुई हैं।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें
ये भी पढ़ें:पुरानी चोट से हैं परेशान? जानें सालों बाद भी क्यों सताता है पुरानी चोट का दर्द

ऑटोइम्यून थायरॉयड रोग- ऑटोइम्यून थायरॉयड रोग (Autoimmune Thyroid Diseases – AITDs) जैसे हाशिमोटो थायरॉयडाइटिस और ग्रेव्स डिजीज दुनिया भर में सबसे आम ऑटोइम्यून बीमारियों में शामिल हैं। ये तब होती हैं जब शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से थायरॉयड ग्रंथि पर हमला करने लगता है। इसके कारण थायरॉयड या तो कम काम करता है (हाइपोथायरॉयडिज़्म) या जरूरत से ज्यादा काम करने लगता है (हाइपरथायरॉयडिज़्म)।

मेदांता आस्पताल के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. हरमनदीप कौर गिल कहते हैं कि हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि खासकर महिलाओं में इन बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जिसके पीछे जीवनशैली से जुड़े कारण, विशेष रूप से लगातार रहने वाला तनाव, एक अहम भूमिका निभा रहे हैं।

तनाव और थायरॉयड का गहरा संबंध

डॉ. हरमनदीप कहते हैं कि लगातार बना हुआ मानसिक तनाव केवल मूड को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि यह शरीर के इम्यून और हार्मोनल प्रणाली पर भी सीधा असर डालता है। तनाव के कारण शरीर में हाइपोथैलेमिक-पिट्यूटरी-एड्रिनल (HPA) एक्सिस सक्रिय हो जाती है, जिससे कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है।

कॉर्टिसोल का काम अल्पकालिक तनाव में शरीर की मदद करना होता है, लेकिन जब यह लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो यह इम्यून बैलेंस को बिगाड़ देता है। जिन लोगों में थायरॉयड से जुड़ी ऑटोइम्यून समस्या होने की प्रवृत्ति होती है, उनमें कुछ ही हफ्तों में थायरॉयड एंटीबॉडीज की गतिविधि 40 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, जिससे थकान, सूजन और लक्षण ज्यादा गंभीर हो जाते हैं।

हाशिमोटो थायरॉयडाइटिस- हाशिमोटो थायरॉयडाइटिस में तनाव के कारण बीमारी बार-बार भड़क सकती है, जबकि ग्रेव्स डिजीज में दिल की तेज धड़कन, घबराहट, बेचैनी और नींद की समस्या और ज्यादा बढ़ सकती है। तनाव के कारण शरीर की हीलिंग क्षमता भी कम हो जाती है, जिससे थायरॉयड आई डिजीज जैसी जटिलताओं को संभालना और कठिन हो जाता है।

जीवनशैली से जुड़े अन्य कारण

तनाव ही नहीं जीवनशैली से जुड़ी ये आदतें भी ऑटोइम्यून थायरॉयड रोगों के बढ़ने का कारण बनने लगती हैं। जिसमें ये 4 कारण प्रमुख हैं।

खान-पान की आदतें: ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, अधिक चीनी और पोषण की कमी सूजन को बढ़ाती है। इसके विपरीत, एंटीऑक्सिडेंट, सेलेनियम और आयोडीन से भरपूर आहार थायरॉयड स्वास्थ्य को सपोर्ट करता है।

नींद की कमी: खराब नींद तनाव हार्मोन को बढ़ाती है और इम्यून सिस्टम को कमजोर करती है।

शारीरिक गतिविधि की कमी: बैठे रहने वाली जीवनशैली तनाव सहने की क्षमता कम करके मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है।

पर्यावरणीय प्रभाव: प्रदूषण, हार्मोन को प्रभावित करने वाले केमिकल्स और धूम्रपान को ऑटोइम्यून रोगों के बढ़े हुए खतरे से जोड़ा गया है।

ये सभी कारण मिलकर एक ऐसी स्थिति बना देते हैं जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली थायरॉयड ग्रंथि पर हमला करने लगती है।

शरीर की मजबूती कैसे बढ़ाएं

हालांकि आनुवंशिक कारण भी भूमिका निभाते हैं, लेकिन सही जीवनशैली अपनाकर ऑटोइम्यून थायरॉयड रोगों के खतरे को कम किया जा सकता है और पहले से प्रभावित लोगों में बेहतर नियंत्रण संभव हो सकता है। शोध आधारित उपायों में ये 5 चीजें शामिल हैं।

तनाव प्रबंधन: ध्यान, योग और प्राणायाम HPA एक्सिस को संतुलित करते हैं और थायरॉयड एंटीबॉडीज को कम करने में मदद कर सकते हैं।

संतुलित पोषण: साबुत और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों, ओमेगा-3 फैटी एसिड और सेलेनियम जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स से भरपूर आहार थायरॉयड के कामकाज को बेहतर बनाता है।

नियमित व्यायाम: हल्की से मध्यम शारीरिक गतिविधि मूड सुधारती है, तनाव कम करती है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है।

अच्छी नींद: रोज 7–8 घंटे की गहरी नींद हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।

सामाजिक सहयोग: परिवार और दोस्तों का साथ मानसिक तनाव को कम करता है और बीमारी से निपटने की क्षमता बढ़ाता है।

सलाह-

ऑटोइम्यून थायरॉयड रोगों में हो रही बढ़ोतरी हमारे आधुनिक जीवन की सच्चाई को दर्शाती है। जिसमें तेज रफ्तार जिंदगी, लगातार तनाव और पर्यावरणीय चुनौतियां शामिल हैं। ऐसे में तनाव और थायरॉयड स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझना बेहद जरूरी है। यदि जीवनशैली से जुड़े कारणों पर समय रहते ध्यान दिया जाए, तो लोग अपने थायरॉयड स्वास्थ्य के साथ-साथ संपूर्ण सेहत को भी बेहतर बना सकते हैं।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain

शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।

करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि और विशेषज्ञता:
दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी (ऑनर्स) और भारतीय विद्या भवन से मास कम्युनिकेशन करने वाली मंजू, साल 2008 से ही मेडिकल रिसर्च और हेल्थ विषयों पर अपनी लेखनी चला रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत जटिल वैज्ञानिक तथ्यों और मेडिकल रिसर्च को 'एक्सपर्ट-वेरिफाइड' मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी हर खबर डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित होती है, जो डिजिटल युग में विश्वसनीयता की कसौटी पर खरी उतरती है।

बहुमुखी प्रतिभा और विजन
उनका पत्रकारीय जुनून केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। वे आधुनिक जीवन की भागदौड़ में रिलेशनशिप की जटिलताएं, ब्यूटी ट्रेंड्स, फैशन, ट्रैवलिंग और फूड जैसे विषयों को भी एक्सपर्ट के नजरिए से कवर करती हैं। मंजू का मानना है कि डिजिटल युग में एक पत्रकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी 'फैक्ट-चेकिंग' और प्रमाणिक जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक और बेहतर जीवन निर्णय ले सकें।

कोर एक्सपर्टीज (Core Expertise)
हेल्थ एवं वेलनेस: मेडिकल एक्सप्लेनर, फिटनेस और रिसर्च-आधारित स्वास्थ्य लेख।
लाइफस्टाइल: रिलेशनशिप, ब्यूटी, फैशन, ट्रैवल और किचन हैक्स।
एस्ट्रोलॉजी: अंकज्योतिष, राशिफल और व्रत-त्योहारों का ज्ञान।

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।