सावधान! बार-बार होने वाले मुंह के छाले हो सकते हैं कैंसर का संकेत, डॉक्टर ने दी सलाह
ऐसा कोई भी घाव जो इलाज के बावजूद ठीक न हो रहा हो, वह 'कैंसर' जैसी जानलेवा बीमारी की शुरुआती आहट हो सकता है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि कब एक मामूली सा दिखने वाला छाला आपकी सेहत के लिए खतरे की घंटी बन सकता है।

मुंह में होने वाला एक छोटा सा छाला, देखने में भले ही एक मामूली समस्या लग सकता हो, लेकिन जब यह समस्या हफ्तों तक किसी व्यक्ति का पीछा न छोड़े, तो यह केवल पेट की गर्मी और खाने-पीने से जुड़ी समस्या नहीं रहती बल्कि शरीर की एक गंभीर चेतावनी का संकेत भी हो सकती है। ज्यादातर लोग मुंह के छालों को पेट की गर्मी या विटामिन की कमी मानकर कई दिन तक घरेलू नुस्खे आजमाते रहते हैं। लेकिन डॉक्टरों की मानें तो सेहत के प्रति यह लापरवाही कई बार भारी पड़ सकती है। बता दें, ऐसा कोई भी घाव जो इलाज के बावजूद ठीक न हो रहा हो, वह 'कैंसर' जैसी जानलेवा बीमारी की शुरुआती आहट हो सकता है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि कब एक मामूली सा दिखने वाला छाला आपकी सेहत के लिए खतरे की घंटी बन सकता है।
आर्टेमिस हॉस्पिटल्स (गुरुग्राम) में हेड डेंटिस्ट्री डॉ. अंजना सत्यजीत कहती हैं कि यूं तो मुंह में छाले होना एक सामान्य समस्या है, जो कई बार चोट लगने, तनाव, विटामिन्स की कमी या संक्रमण के कारण हो जाते हैं। कभी न कभी हर व्यक्ति को मुंह के छालों से परेशान होना ही पड़ता है। हालांकि यह समस्या हमेशा इतनी छोटी और सरल नहीं होती है। अगर मुंह में लगातार छाले बने रहें और दवा से भी ठीक न हों, तो सतर्क हो जाना चाहिए। ऐसा होना मुंह के कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का भी संकेत हो सकता है। दरअसल मुंह के कैंसर के मामले में शुरुआत में बहुत सामान्य लक्षण ही दिखते हैं। लक्षण ज्यादा स्पष्ट होने तक बीमारी फैल चुकी होती है।
ओरल हेल्थ का रखें ध्यान
भारत में आमतौर पर ओरल हेल्थ यानी मुंह के स्वास्थ्य को बहुत हल्के में लिया जाता है। मुंह में बदबू से लेकर दांतों से जुड़ी कई तरह की परेशानियों की लोग अनदेखी कर देते हैं। यही नहीं, देश में बड़ी संख्या में लोग किसी न किसी रूप में चबाने वाले तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं। ओरल हेल्थ के दृष्टिकोण से यह बहुत गंभीर समस्या है। मुंह हमारे शरीर का बहुत महत्वपूर्ण अंग है। इसकी साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। समय-समय पर डेंटिस्ट से परामर्श करना चाहिए। ब्रश और टूथपेस्ट का चयन भी सोच-समझकर और अपनी जरूरत के हिसाब से करना चाहिए।
लक्षणों पर रखें नजर
मुंह के छाले कई तरह के हो सकते हैं। जिसमें लाल रंग के चकत्ते जैसे छाले, घाव और कैंकर सोर (बड़ा छाला, जिसमें बीच में पीले रंग का दाना और चारों ओर लाल घेरा जैसा रहता है) आदि हैं। आमतौर पर सामान्य मैनेजमेंट और मल्टी विटामिन की मदद से 2 हफ्ते में इन्हें ठीक कर लिया जाता है। अगर घाव किसी नुकीले दांत की वजह से हो, तो डॉक्टर उसे हटाने की सलाह भी देते हैं। तंबाकू चबाने वाले लोगों, किसी भी कारण से ज्यादा नुकीले दांतों वाले और मुंह की साफ-सफाई का पर्याप्त ध्यान नहीं रखने वाले लोगों को खासतौर पर हर छोटे-बड़े लक्षण पर नजर रखनी चाहिए। तंबाकू उत्पादों का सेवन सामान्य अल्सर और छाले को भी समय के साथ कैंसरस बनने का कारण बन सकता है।
किन स्थितियों में लें डॉक्टर से सलाह
मुंह में अगर कोई छाला पड़ गया हो और वह दो हफ्ते तक भी ठीक न हो, बल्कि स्थिति खराब होती लगे तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इस तरह के छोटे लगने वाले लक्षण किसी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। निगलने, चबाने या बोलने में परेशानी होने लगे, ज्यादा खून आने लगे और अगर मुंह के छाले के साथ गले के आसपास सूजन दिखे, तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। ऐसे मामलों में मुंह के छाले और घाव कैंसरस हो जाते हैं। ल्यूकोप्लेकिया और एरिथ्रोप्लेकिया जैसे अल्सर को कुछ मामलों में प्री-कैंसरस पाया गया है। यानी अगर सही समय पर चिकित्सक से परामर्श कर लिया जाए, तो कैंसर को बढ़ने से पहले ही रोका जा सकता है।
लेखक के बारे में
Manju Mamgain
शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।
करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और विशेषज्ञता:
दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी (ऑनर्स) और भारतीय विद्या भवन से मास कम्युनिकेशन करने वाली मंजू, साल 2008 से ही मेडिकल रिसर्च और हेल्थ विषयों पर अपनी लेखनी चला रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत जटिल वैज्ञानिक तथ्यों और मेडिकल रिसर्च को 'एक्सपर्ट-वेरिफाइड' मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी हर खबर डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित होती है, जो डिजिटल युग में विश्वसनीयता की कसौटी पर खरी उतरती है।
बहुमुखी प्रतिभा और विजन
उनका पत्रकारीय जुनून केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। वे आधुनिक जीवन की भागदौड़ में रिलेशनशिप की जटिलताएं, ब्यूटी ट्रेंड्स, फैशन, ट्रैवलिंग और फूड जैसे विषयों को भी एक्सपर्ट के नजरिए से कवर करती हैं। मंजू का मानना है कि डिजिटल युग में एक पत्रकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी 'फैक्ट-चेकिंग' और प्रमाणिक जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक और बेहतर जीवन निर्णय ले सकें।
कोर एक्सपर्टीज (Core Expertise)
हेल्थ एवं वेलनेस: मेडिकल एक्सप्लेनर, फिटनेस और रिसर्च-आधारित स्वास्थ्य लेख।
लाइफस्टाइल: रिलेशनशिप, ब्यूटी, फैशन, ट्रैवल और किचन हैक्स।
एस्ट्रोलॉजी: अंकज्योतिष, राशिफल और व्रत-त्योहारों का ज्ञान।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


