सावधान! एयर प्यूरीफायर की ये 7 गलतियां फेफड़ों को कर सकती हैं बीमार, एक्सपर्ट की चेतावनी
Mistakes to avoid while using air purifier : पल्मोनोलॉजिस्ट पहले भी एयर प्यूरीफायर को लेकर यह चेतावनी दे चुके हैं कि इनका गलत इस्तेमाल करने से फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। तो आइए जानते हैं एयर प्यूरीफायर से जुड़ी कौन सी वो 7 गलतियां हैं, जो आपके फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के असर से खुद को सुरक्षित रखने के लिए आज घर में एयर प्यूरीफायर लगाना एक बड़ी जरूरत बन गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं अच्छी सेहत के लिए सिर्फ इसे चालू करके छोड़ देना ही काफी नहीं होता है। दरअसल, हम अनजाने में एयर प्यूरीफायर से जुड़ी कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो फायदे की जगह सेहत को नुकसान पहुंचा सकती हैं। कई पल्मोनोलॉजिस्ट पहले भी एयर प्यूरीफायर को लेकर यह चेतावनी दे चुके हैं कि इनका गलत इस्तेमाल करने से फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। तो आइए जानते हैं एयर प्यूरीफायर से जुड़ी कौन सी वो 7 गलतियां हैं, जो आपके फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
क्या होता है एयर प्यूरीफायर ?
एयर प्यूरीफायर एक ऐसा उपकरण है जो धूल, परागकण, पालतू जानवरों के बाल, धुआं और फफूंद जैसे प्रदूषकों को छानकर घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता में सुधार करता है। यह HEPA या एक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर से हवा को खींचकर या कुछ विशेष तकनीकों का उपयोग करके काम करके साफ हवा को कमरे में वापस छोड़ता है। जिससे घर के अंदर की वायु गुणवत्ता में काफी सुधार होता है और अस्थमा, एलर्जी के लक्षण कम होते हैं।
किन लोगों के लिए फायदेमंद एयर प्यूरीफायर?
श्वसन संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए एयर प्यूरीफायर विशेष रूप से फायदेमंद होते हैं, लेकिन आजकल प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए स्वस्थ लोगों के बीच भी यह एक आम घरेलू विकल्प बन गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं, घर पर एयर प्यूरीफायर का लगा होना आपकी अच्छी सेहत की गारंटी नहीं है, आपको इसका उपयोग करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक होता है।
एयर प्यूरीफायर से जुड़ी ना करें ये 7 गलतियां
फिल्टर्स की समय पर सफाई ना करना
एयर प्यूरीफायर से जुड़ी यह बड़ी गलती अकसर लोग कर बैठते हैं। प्यूरीफायर को बंद कमरों में चलाने से वेंटिलेशन (ताजी हवा) को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे कमरे में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ सकता है। इसके अलावा, पुराने और गंदे फिल्टर्स की समय पर सफाई या बदलाव न करने पर यह खुद बैक्टीरिया और फंगस का घर बन जाते हैं, जो सांस के जरिए सीधे व्यक्ति के फेफड़ों में पहुंच सकते हैं। गंदे फिल्टर से प्यूरीफायर हवा साफ करने की जगह बैक्टीरिया, मोल्ड और प्रदूषक वापस उड़ा सकता है। इससे फेफड़ों में इंफेक्शन या एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है। इस खतरे से बचने के लिए फिल्टर नियमित समय पर बदलें और साफ करें।
दीवार से सटाकर रखना
पल्मोनोलॉजिस्ट (फेफड़ों के विशेषज्ञ) प्यूरीफायर यूज करने वाले लोगों को यह चेतावनी अक्सर देते हैं कि प्यूरीफायर को कभी भी दीवार से बिल्कुल सटाकर या कमरे के किसी कोने में छिपाकर ना रखें। ऐसा करने से हवा का सर्कुलेशन सही तरीके से नहीं हो पाता है। इसके अलावा अगर CADR (क्लीन एयर डिलीवरी रेट) कमरे के साइज से कम है, तो यह प्रभावी नहीं होता। प्यूरीफायर को बीच में रखें और कमरे के हिसाब से सही मॉडल चुनें।
ओजोन उत्पन्न करने वाले प्यूरीफायर
कई सस्ते या ओजोन बेस्ड प्यूरीफायर हवा साफ करने के दौरान ओजोन गैस छोड़ते हैं। यह गैस फेफड़ों में जलन, सूजन और सांस की तकलीफ पैदा कर सकती है। AIIMS के डॉक्टरों और WHO की चेतावनी के अनुसार ऐसे प्यूरीफायर खासकर बच्चों, बुजर्गों और अस्थमा रोगियों के लिए खतरनाक होते हैं। हमेशा HEPA फिल्टर वाले और 'ओजोन-फ्री' प्यूरीफायर चुनें।
एयर प्यूरीफायर के साथ अगरबत्ती और कॉइल जलाना
भारतीय घरों में शाम के समय अकसर अगरबत्ती या मच्छर भगाने वाली कॉइल का इस्तेमाल करना आम बात है। हालांकि, इन दोनों ही चीजों से रासायनिक तत्व निकलते हैं, जो फेफड़ों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। एयर प्यूरीफायर के साथ एक ही कमरे में इनका इस्तेमाल करने से हवा को साफ करने का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है, ऐसा करने से बचें।
वेंटिलेशन का ध्यान न रखना
हमेशा बंद कमरे में प्यूरीफायर चलाने से CO2 लेवल बढ़ सकता है, जो सिरदर्द और थकान पैदा करता है। कभी-कभी खिड़की खोलकर कमरे में फ्रेश हवा भी आने दें या घर में वेंटिलेशन का पूरा ध्यान रखें।
ज्यादा देर तक प्यूरीफायर चलाना
बंद कमरे में ज्यादा देर तक प्यूरीफायर चलाने से हवा बहुत सूखी हो जाती है। जिसकी वजह से गला सूखना, खांसी, नाक से खून आना और फेफड़ों में जलन की समस्या हो सकती है। कमरे में आदर्श ह्यूमिडिटी 40-60 प्रतिशत रखें, जरूरत पड़ने पर ह्यूमिडिफायर या पानी की बाल्टी साथ में रखें।
प्यूरीफायर के नजदीक बैठना
हमेशा एयर प्यूरीफायर को खुद से 2-6 फीट की दूरी पर रखें। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि एयर प्यूरीफायर को अपने बैठने या सोने की जगह से लगभग 2 से 6 फीट की दूरी पर रखना चाहिए। ऐसा करने से श्वसन क्षेत्र की हवा को अधिक प्रभावी ढंग से साफ (खासकर बेडरूम या ऑफिस जैसी जगहों में) करने में मदद मिलती है । डॉक्टरों की मानें तो एयर प्यूरीफायर को उचित दूरी पर रखने से PM2.5 और PM10 के स्तर को कम करने में मदद मिलती है, साथ ही परागकण, फफूंद और हमारे आसपास मौजूद कुछ बैक्टीरिया जैसे अन्य कणों को भी कम करने में मदद मिलती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान के लिए है और इसे चिकित्सीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी नई दिनचर्या शुरू करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
लेखक के बारे में
Manju Mamgain
शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।
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