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पेट के बल सोने वाले हो जाएं सावधान, गर्दन पीठ ही नहीं चेहरे की खूबसूरती के लिए भी बड़ा खतरा

पेट के बल सोने वाले हो जाएं सावधान, गर्दन पीठ ही नहीं चेहरे की खूबसूरती के लिए भी बड़ा खतरा

संक्षेप:

Side Effects Of Sleeping On Stomach: पेट के बल लेटने से रीढ़ को अस्वाभाविक स्थिति में झुकना पड़ता है। इस दबाव को सहने के लिए पीठ पीछे की ओर मुड़ जाती है, जिससे रीढ़ की प्राकृतिक वक्रता (कर्व) सपाट हो जाती है और संरेखण (alignment) बिगड़ जाता है।

Tue, 28 Oct 2025 11:49 PMManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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पेट के बल सोना शुरुआत में भले ही आरामदायक लगे, लेकिन यह मुद्रा लंबे समय में आपके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। बहुत से लोग जल्दी नींद आने या खर्राटे कम करने के लिए इस स्थिति में सोना पसंद करते हैं, लेकिन शरीर पर—विशेष रूप से रीढ़ और गर्दन पर—पड़ने वाला दबाव धीरे-धीरे पुरानी तकलीफों और शारीरिक समस्याओं का कारण बन सकता है।

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रीढ़ की हड्डी पर अत्यधिक दबाव

पेट के बल सोने का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह रीढ़ की हड्डी पर अत्यधिक दबाव डालता है। चूंकि शरीर का अधिकतर भार धड़ (टॉर्सो) पर केंद्रित होता है, इसलिए पेट के बल लेटने से रीढ़ को अस्वाभाविक स्थिति में झुकना पड़ता है। इस दबाव को सहने के लिए पीठ पीछे की ओर मुड़ जाती है, जिससे रीढ़ की प्राकृतिक वक्रता (कर्व) सपाट हो जाती है और संरेखण (alignment) बिगड़ जाता है। जिसकी वजह से कमर के निचले हिस्से पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और सुबह उठने पर अकड़न या दर्द महसूस हो सकता है। समय के साथ यह स्थिति मांसपेशियों और जोड़ों को पूरी तरह आराम और पुनःस्थापन से रोक देती है, जिससे पुराना कमर दर्द विकसित हो सकता है।

गर्दन में दर्द

गर्दन में दर्द, पेट के बल सोने का एक नतीजा है। इस स्थिति में सांस लेने के लिए सिर को एक ओर मोड़ना पड़ता है, जिससे गर्दन लंबे समय तक मुड़ी रहती है। लगातार बने रहने वाला यह मुड़ाव नसों पर दबाव डालता है और गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव लाता है। नतीजतन, अकड़न, झनझनाहट, सुन्नपन या कंधों और बाहों में फैलता हुआ दर्द महसूस हो सकता है। सिर की यह अस्वाभाविक स्थिति रीढ़ की गर्दन वाली हिस्से (cervical spine) की प्राकृतिक बनावट को भी बिगाड़ती है, जिससे दर्द और बढ़ जाता है तथा नसों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

सांस लेने की प्रक्रिया होती है प्रभावित

सिर्फ हड्डियों और मांसपेशियों पर ही नहीं, बल्कि पेट के बल सोना सांस लेने की प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है। जब व्यक्ति पेट के बल लेटता है तो छाती पर दबाव पड़ता है, जिससे फेफड़े पूरी तरह फैल नहीं पाते। इसका परिणाम यह होता है कि सांस उथली (shallow) हो जाती है और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। भले ही आप पूरी रात सोएं, फिर भी थकान महसूस हो सकती है। अस्थमा या स्लीप एपनिया जैसी सांस से जुड़ी बीमारियों वाले लोगों के लिए यह स्थिति और भी हानिकारक हो सकती है।

चेहरे पर समय से पहले झुर्रियां

इस मुद्रा के अन्य दुष्प्रभावों में चेहरे पर तकिए के दबाव के कारण समय से पहले झुर्रियां पड़ना और गर्भवती महिलाओं के लिए पेट पर दबाव के कारण असुविधा व रक्त प्रवाह में रुकावट शामिल है।

शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS)

शिशुओं के लिए पेट के बल सोना विशेष रूप से खतरनाक है, क्योंकि यह अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) के जोखिम से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। इसी कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शिशुओं को कभी भी पेट के बल सुलाना नहीं चाहिए।

डॉक्टर की सलाह

फोर्टिस अस्पताल (फरीदाबाद) के निदेशक एवं पल्मोनोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. रवि शेखर झा कहते हैं कि पेट के बल सोना कुछ लोगों को भले ही आरामदायक या आदतन लग सकता है, लेकिन इसके जोखिम थोड़े से आराम से कहीं अधिक गंभीर हैं। रीढ़ की हड्डी के गलत संरेखण, गर्दन के दर्द, सांस लेने में कठिनाई और सौंदर्य संबंधी दुष्प्रभाव—ये सभी दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बेहतर रीढ़ संरेखण, दबाव बिंदुओं में कमी और अधिक आरामदायक नींद के लिए पीठ या करवट लेकर सोना ही सबसे सुरक्षित और स्वास्थ्यप्रद विकल्प है।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain
मंजू ममगाईं लाइव हिन्दुस्तान में लाइफस्टाइल सेक्शन में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। मंजू ने अपना पीजी डिप्लोमा भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली और ग्रेजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय से किया हुआ है। इन्हें पत्रकारिता जगत में टीवी, प्रिंट और डिजिटल का कुल मिलाकर 16 साल का अनुभव है। एचटी डिजिटल से पहले मंजू आज तक, अमर उजाला, सहारा समय में भी काम कर चुकी हैं। आज तक में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन लीड करने के बाद अब मंजू एचटी डिजिटल में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए काम कर रही हैं। और पढ़ें

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