Asha Bhosle Death: क्या चेस्ट इंफेक्शन बन सकता है साइलेंट किलर? जानें किन लोगों को ज्यादा खतरा
आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया, जिसका मुख्य कारण चेस्ट इंफेक्शन बताया जा रहा है। चलिए बताते हैं सीने में संक्रमण होने पर क्या लक्षण होते हैं और किन लोगों को इससे ज्यादा खतरा होता है।

Asha Bhosle Death: मशहूर गायिका आशा भोसले ने 92 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। पहले खबरें आ रही थीं कि उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ है, फिर उनकी पोती जनाई भोसले ने अपने इंस्टाग्राम में पोस्ट शेयर कर बताया कि सिंगर को थकान और चेस्ट इंफेक्शन के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉ. प्रतीत समदानी ने जानकारी दी कि आशा भोसले का आज (12 अप्रैल) मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण निधन हो गया। अब सभी के मन में सवाल ये उठ रहा है कि क्या सीने में संक्रमण होना जानलेवा हो सकता है। क्या इससे कार्डियक अरेस्ट या हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। चलिए जानते हैं क्या चेस्ट इंफेक्शन साइलेंट किलर होता है, जो जानलेवा हो सकता है। इसका खतरा किन लोगों में ज्यादा होता है।
क्या होता है चेस्ट इंफेक्शन?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, चेस्ट इंफेक्शन यानी सीने में संक्रमण एक ऐसी स्थिति है, जिसमें फेफड़ों और सांस की नलियों में बैक्टीरिया, वायरस या अन्य सूक्ष्म जीवों का असर हो जाता है। यह समस्या उम्र बढ़ने के साथ अधिक देखने को मिलती है, क्योंकि समय के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है। अक्सर लोग इसके शुरुआती लक्षणों को साधारण खांसी, जुकाम या बलगम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर रूप ले लेती है। जब यह इंफेक्शन बढ़ जाता है, तो फेफड़ों पर असर डालने के साथ-साथ दिल पर भी दबाव बढ़ाने लगता है। गंभीर स्थिति में यह इंफेक्शन शरीर में ऑक्सीजन की कमी पैदा कर सकता है, जिससे दिल को नॉर्मल रूटीन से ज्यादा काम करना पड़ता है। ऐसे में कार्डियक अरेस्ट जैसी खतरनाक स्थिति का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए चेस्ट इंफेक्शन के लक्षणों को समय रहते पहचानना और सही इलाज कराना बेहद जरूरी होता है।
दो प्रकार के होते हैं चेस्ट इंफेक्शन-
चेस्ट इंफेक्शन आमतौर पर दो मुख्य प्रकार के होते हैं- ब्रोंकाइटिस और निमोनिया, और दोनों ही स्थिति में समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है।
1. ब्रोंकाइटिस (Bronchitis)-
इसमें फेफड़ों तक हवा पहुंचाने वाली नलियां (ब्रोंकाई) सूज जाती हैं। इसकी वजह से लगातार खांसी, बलगम, सीने में जकड़न और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यह आमतौर पर वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होता है। खासतौर पर बुजुर्ग लोगों को इस इंफेक्शन का खतरा रहता है। उन लोगों को भी ये होता है, जो ज्यादा स्मोकिंग करते हैं।
2. निमोनिया (Pneumonia)-
यह चेस्ट इंफेक्शन का ज्यादा गंभीर रूप है, जिसमें फेफड़ों में सूजन और तरल पदार्थ भर जाता है। इससे सांस लेने में काफी परेशानी होती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिर सकता है। बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को अक्सर निमोनिया हो जाता है और ये ज्यादा गंभीर होने पर जानलेवा साबित होता है।
शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
60 साल से अधिक उम्र वाले लोग अक्सर चेस्ट इंफेक्शन के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और इसे सामान्य खांसी-जुकाम या जकड़न समझ लेते हैं। अगर समय रहते डॉक्टर को दिखा दिया जाए, तो इसका इलाज हो सकता है। चलिए बताते हैं इसके शुरुआती लक्षण क्या होते हैं-
-सूखी या बलगम वाली खांसी आना
-सीने में जकड़न या भारीपन महसूस होना
-सांस फूलना या लेने में तकलीफ होना
-गले में लगातार खराश
-थकान और कमजोरी महसूस होना
-सफेद, पीला या हरे रंग का बलगम निकलना
-हल्का बुखार या ठंड लगना
क्या करें-
60 से अधिक उम्र और छोटे बच्चों में लगातार इस तरह के लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें फौरन डॉक्टर के पास लेकर जाएं। जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, उनमें चेस्ट इंफेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है। विटामिन C युक्त चीजें खाएं, जिससे इम्यूनिटी मजबूत हो।
नोट- यह खबर सामान्य जानकारियों पर आधारित है। किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ से उचित सलाह लें।
लेखक के बारे में
Deepali Srivastavaदीपाली श्रीवास्तव पिछले 8 वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और 5 सालों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में डेप्युटी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। संस्थान में साल 2021 में वेब स्टोरी से अपने सफर की शुरुआत करने के बाद, वह आज लाइफस्टाइल टीम का अहम हिस्सा हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स, यूजर बिहेवियर और पाठकों की रुचि को समझने में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद और प्रभावशाली कंटेंट प्रोफेशनल बनाती है।
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