
सावधान! अलार्म की कर्कश आवाज आपके दिल को दे रही 'इलेक्ट्रिक शॉक', ये है कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह
Hidden Heart Risks of Waking Up to an Alarm: यह 'साइलेंट स्ट्राइक' उन लोगों के लिए और भी ज्यादा घातक हो सकती है जो पहले से ही किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि आपकी यह आदत आपके शरीर को सुबह-सुबह एक अनावश्यक और भारी तनाव में झोंक देता है।
सुबह की पहली किरण के साथ जब एक कर्कश अलार्म की आवाज कमरे में गूंजती है, तो वह सिर्फ आपकी नींद ही नहीं तोड़ती, बल्कि आपके दिल को भी एक गहरे 'शॉक' की स्थिति में डाल देती है। आज के समय में हममें से करोड़ों लोग सुबह जल्दी सोकर उठने के लिए रात को अलार्म लगाकर सोते हैं। जो कि एक सामान्य आदत है। लेकिन क्या आप जानते हैं चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में इसे शरीर के साथ की जाने वाली एक हिंसक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। न्यूरोलॉजिस्ट और हृदय रोग विशेषज्ञों की मानें तो गहरी नींद से अचानक झटके के साथ जागना हमारे ब्लड प्रेशर को रॉकेट की तरह बढ़ा सकता है और दिल की धड़कन (हार्ट रिदम) को अस्त-व्यस्त कर सकता है। यह 'साइलेंट स्ट्राइक' उन लोगों के लिए और भी ज्यादा घातक हो सकती है जो पहले से ही किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि आपकी यह आदत आपके शरीर को सुबह-सुबह एक अनावश्यक और भारी तनाव में झोंक देता है।
क्या कहते हैं हृदय रोग विशेषज्ञ
सीके बिरला अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजीव कुमार गुप्ता कहते हैं कि सुबह बजने वाला अलार्म सिर्फ एक आवाज नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर के भीतर होने वाला एक 'बायोलॉजिकल धमाका' है। जब आप गहरी नींद (REM Sleep) में होते हैं, तो आपका हृदय और मस्तिष्क अपने सबसे शांत स्तर पर होते हैं। लेकिन अलार्म की तेज आवाज व्यक्ति को गहरी नींद से अचानक जगा देती है, तो दिमाग इसे खतरे की तरह लेता है। जिसकी वजह से शरीर का 'फाइट या फ्लाइट' सिस्टम एक्टिव हो जाता है और स्ट्रेस हार्मोन जैसे कोर्टिसोल और एड्रेनालिन अचानक बढ़ जाते हैं। नतीजा यह होता है कि दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर कुछ ही सेकंड में तेज हो जाते हैं। आमतौर पर स्वस्थ लोगों में शरीर संभल जाता है, लेकिन हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, नींद की कमी या बिना पता चली दिल की बीमारी वाले लोगों के लिए यह झटका नुकसानदायक हो सकता है।
अलार्म की आवाज से जागने पर दिल की सेहत के होते हैं ये नुकसान
1. एड्रेनालाईन का अचानक बढ़ना (The Adrenaline Spike)
जब अलार्म बजता है, तो हमारा शरीर 'फाइट या फ्लाइट' मोड में चला जाता है। इससे शरीर में एड्रेनालाईन (Adrenaline) और कोर्टिसोल (Cortisol) जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का स्तर एकदम से बढ़ जाता है। शरीर में अचानक होने वाला यह बदलाव दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर को तेजी से बढ़ा देता है, जो कमजोर दिल वालों के लिए खतरनाक हो सकता है।
2. 'स्लीप इनर्शिया' और हृदय पर दबाव
गहरी नींद (Deep Sleep) के दौरान हमारा ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट सबसे कम होता है। अलार्म इस शांति को झटके से तोड़ता है। शोध बताते हैं कि अचानक जागने से हृदय पर पड़ने वाला दबाव, व्यायाम के दौरान पड़ने वाले दबाव से भी अधिक हो सकता है, जिसे 'स्लीप इनरशिया' के दौरान महसूस किया जाता है।
3. 'स्नूज' बटन का खतरनाक असर
बार-बार स्नूज बटन दबाना दिल के लिए और भी बुरा है। जब आप स्नूज दबाकर फिर से सोते हैं और 5-10 मिनट बाद अलार्म फिर बजता है, तो आपका शरीर बार-बार 'कार्डियोवैस्कुलर शॉक' की स्थिति से गुजरता है। यह बार-बार होने वाला उतार-चढ़ाव हृदय की धमनियों पर बुरा असर डालता है।
4. सुबह के समय दिल के दौरे का खतरा
आंकड़े बताते हैं कि दिल के दौरे (Heart Attacks) और स्ट्रोक के मामले सुबह के समय अधिक होते हैं। जिसका मुख्य कारण शरीर की नेचुरल 'सर्केडियन रिदम' का बिगड़ना है। अलार्म की कर्कश आवाज इस जोखिम को और बढ़ा सकती है क्योंकि यह सीधे तौर पर नर्वस सिस्टम को उत्तेजित करती है।
'अलार्म शॉक' से बचने के उपाय
अगर आप अपने दिल और दिमाग को सुबह के 'अलार्म शॉक' से बचाना चाहते हैं, तो आप इन प्राकृतिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपना सकते हैं। ये तरीके आपके शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक (Circadian Rhythm) के साथ तालमेल बिठाकर आपको धीरे-धीरे और शांति से जगाते हैं।
1. सूरज की रोशनी (The Sunlight Method)
प्रकृति का सबसे बेहतरीन अलार्म सूरज की रोशनी है। जब सुबह की रोशनी आपकी पलकों के जरिए आंखों तक पहुंचती है, तो मस्तिष्क मेलाटोनिन (नींद का हार्मोन) बनाना बंद कर देता है और सेरोटोनिन का स्तर बढ़ाता है। इस उपाय को करने के लिए रात को अपने कमरे के पर्दे थोड़े खुले रखें ताकि सुबह की पहली किरणें कमरे में आकर आपको जगा सकें।
2. 'स्मार्ट' या ग्रैजुअल वेक-अप अलार्म (Gradual Wake-up)
अगर आपको अलार्म लगाना ही है, तो ऐसी टोन चुनें जो बहुत धीमी आवाज से शुरू होती है और धीरे-धीरे (अगले 5-10 मिनट में) तेज होती है। यह उपाय आपके दिल की धड़कन को अचानक बढ़ाने की जगह धीरे-धीरे जागने वाली स्थिति में लाता है।
3. 'सनराइज' अलार्म क्लॉक (Sunrise Alarm Clocks)
आजकल ऐसे स्मार्ट गैजेट्स आते हैं जो सूरज के उगने की नकल करते हैं। आपके जागने के निर्धारित समय से 30 मिनट पहले, ये घड़ियां धीरे-धीरे कमरे में रोशनी बढ़ाना शुरू कर देती हैं। जब तक असली आवाज बजती है, आपका शरीर प्राकृतिक रूप से जागने के लिए तैयार हो चुका होता है।
4. पानी पीने की तकनीक (The Hydration Hack)
सोने से ठीक पहले एक गिलास पानी पीकर सोएं। सुबह होने तक आपका 'ब्लैडर' (मूत्रशय) आपको जगाने के लिए प्राकृतिक संकेत देने लगेगा। यह एक बहुत पुराना और प्रभावी देसी तरीका है जिससे आप गहरी नींद से धीरे-धीरे बाहर आते हैं।
5. सोने का निश्चित समय (Consistency is Key)
यदि आप रोज रात को 10 या 11 बजे सो जाते हैं, तो कुछ ही हफ्तों में आपका शरीर खुद को इस तरह ढाल लेगा और आपको अलार्म की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। आपकी आंतरिक घड़ी (Internal Clock) खुद ही आपको फ्रेशनेस के साथ जगा देगी।

लेखक के बारे में
Manju Mamgain
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मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
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