पेपर बैग: AIIMS डॉक्टर ने बताया पैनिक अटैक में तुरंत राहत का आसान तरीका

Feb 06, 2026 09:33 am ISTShubhangi Gupta लाइव हिन्दुस्तान
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पैनिक अटैक के दौरान तेज सांसें, घबराहट और सीने में जकड़न आम लक्षण हैं। AIIMS दिल्ली की डॉक्टर प्रियंका सेहरावत बता रही हैं कि ऐसे समय में एक साधारण पेपर बैग कैसे तुरंत राहत दे सकता है।

पेपर बैग: AIIMS डॉक्टर ने बताया पैनिक अटैक में तुरंत राहत का आसान तरीका

अचानक घबराहट, दिल की तेज धड़कन, सांस फूलना और सीने में जकड़न- ये सभी पैनिक अटैक के आम लक्षण हैं। कई बार बिना किसी वास्तविक खतरे के व्यक्ति को ऐसा महसूस होने लगता है जैसे वह नियंत्रण खो रहा हो या हार्ट अटैक आ रहा हो। Mayo Clinic के अनुसार, पैनिक अटैक तीव्र भय की स्थिति होती है, जो शरीर में गंभीर शारीरिक प्रतिक्रियाएं पैदा कर सकती है। ऐसे में एक साधारण सा पेपर बैग तुरंत राहत देने में मदद कर सकता है।

AIIMS दिल्ली की जनरल फिजिशियन और न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका सेहरावत बताती हैं कि बार-बार पैनिक अटैक आने वाले लोगों के लिए पेपर बैग एक आसान लेकिन असरदार उपाय हो सकता है।

पैनिक अटैक के दौरान शरीर में क्या होता है?

पैनिक अटैक के समय व्यक्ति बहुत तेज-तेज सांस लेने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में हाइपरवेंटिलेशन कहा जाता है। इस प्रक्रिया में शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड जरूरत से ज्यादा बाहर निकल जाती है। डॉ. सेहरावत के अनुसार, जब खून में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कम हो जाती है, तो शरीर का pH बैलेंस बिगड़ जाता है। इसका असर घबराहट, दिल की धड़कन बढ़ना, सीने में भारीपन, सांस लेने में तकलीफ, कंधों या पीठ में दर्द और सीने में जकड़न के रूप में दिखता है।

पेपर बैग कैसे करता है काम?

डॉ. प्रियंका बताती हैं कि ऐसे में पेपर बैग सांस लेने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में मदद करता है। व्यक्ति को एक साधारण पेपर बैग (आकार मायने नहीं रखता) लेकर अपनी नाक और मुंह को उससे ढकना चाहिए और उसे हल्के से सील कर लेना चाहिए। इसके बाद धीरे-धीरे 6 से 10 बार सांस अंदर-बाहर लेनी चाहिए।

पेपर बैग के अंदर सांस लेने से वही कार्बन डाइऑक्साइड दोबारा शरीर में जाती है, जो पैनिक अटैक के दौरान तेजी से बाहर निकल रही होती है। इससे खून में CO₂ का स्तर सामान्य होता है, pH बैलेंस सुधरता है और कुछ ही मिनटों में लक्षण कम होने लगते हैं।

कब जरूरी है डॉक्टर से सलाह लेना?

हालांकि पेपर बैग अस्थायी राहत दे सकता है, लेकिन डॉ. सेहरावत यह भी जोर देकर कहती हैं कि अगर किसी व्यक्ति को बार-बार पैनिक अटैक आते हैं, तो उसे केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसे मामलों में मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना जरूरी है, ताकि यह समझा जा सके कि दवाइयों, थेरेपी या लाइफस्टाइल में किन बदलावों की जरूरत है।

हेल्थ नोट: पेपर बैग पैनिक अटैक के दौरान एक सरल और तुरंत राहत देने वाला उपाय हो सकता है, लेकिन यह स्थायी इलाज नहीं है। मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लेना और सही समय पर विशेषज्ञ की मदद लेना सबसे जरूरी कदम है।

Shubhangi Gupta

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