
एम्स के डॉक्टर ने खोला राज, बताया आखिर क्यों भारत में युवा हो रहे हैं गंजेपन के शिकार
Reasons of youngsters going bald : डॉ. कृष्णा कहते हैं कि हेयर फॉल या गंजेपन की समस्या सिर्फ तनाव, प्रदूषण की वजह से नहीं होती है। इसके पीछे कई अन्य बड़े कारण भी छिपे हुए हो सकते हैं।
बालों के झड़ने की समस्या को कुछ साल पहले तक बढ़ती उम्र के लक्षणों के साथ जोड़कर देखा जाता रहा है। लेकिन आज जब कम उम्र के युवा भी गंजेपन के शिकार हो रहे हैं तो हेयर फॉल की समस्या को जेनेटिक्स से जोड़कर देखा जाने लगा है। हेयर फॉल को लेकर लोगों के बीच फैले इन भम्र को दूर करने के लिए एम्स के फेमस हेयर ट्रांसप्लांट सर्जन और त्वचा विशेषज्ञ, डॉ. कृष्णा ने इस राज से पर्दा उठा दिया है। डॉ. कृष्णा कहते हैं कि हेयर फॉल या गंजेपन की समस्या सिर्फ तनाव, प्रदूषण की वजह से नहीं होती है। इसके पीछे कई अन्य बड़े कारण भी छिपे हुए हो सकते हैं। डॉ. कृष्णा कहते हैं कि युवाओं के लगातार पतले होते बालों से फैली दहशत ने तेल, शैंपू और सप्लीमेंट्स की अंतहीन खोज को बढ़ावा दिया है। लेकिन चिंता की बात यह है कि इनमें से कोई भी असल में कारगर साबित नहीं होता है। हाल ही में सिद्धार्थ कन्नन के साथ हुई बातचीत में डॉ. गौरांग कृष्णा ने युवाओं के जल्दी गंजे होने के पीछे जिम्मेदार कारणों पर बात की।

जेनेटिक्स
डॉ. गौरांग कृष्णा कहते हैं कि बालों के झड़ने के पीछे कभी भी कोई एक कारण नहीं होता है। इस समस्या के पीछे कई कारण एक साथ काम करते हैं जैसे कि आनुवांशिकी, पोषण, जीवनशैली और पर्यावरणीय तनाव। हालांकि ज्यादातर लोग प्रदूषण या तनाव को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हैं। डॉ. गौरांग कृष्णा कहते हैं कि 70 प्रतिशत मामलों में व्यक्ति के जेनेटिक्स उसके गंजेपन के पीछे का सबसे बड़ा कारण होते हैं। अगर आपके परिवार में पिता या दादा को गंजापन हुआ है, तो ये जीन आपको भी प्रभावित कर सकता है। ये एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया (मेल पैटर्न बाल्डनेस) कहलाता है, जो हार्मोन DHT (डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन) से बालों के फॉलिकल्स को कमजोर करता है।
पोषण की कमी
डॉ. गौरांग कृष्णा कहते हैं कि हेयर फॉल के पीछे बाकी के 20 प्रतिशत का श्रेय जीवनशैली और पोषण को जाता है। खराब आहार, प्रोटीन और विटामिन की कमी, अनियमित नींद, अत्यधिक तनाव और वर्कआउट की कमी, ये सभी कारण बालों को पोषण देने की क्षमता को कमजोर बनाते हैं। व्यायाम और उचित आराम की मदद से एक स्वस्थ जीवनशैली, स्टेम सेल गतिविधि को बनाए रखने में मदद करती है जो बालों के विकास में सहायक होती है। एक सर्वे के अनुसार, 50 प्रतिशत से ज्यादा युवा पुरुषों में हेयर लॉस 25 साल से पहले शुरू हो जाता है, जिसमें न्यूट्रिशन की कमी बड़ा रोल है।
प्रदूषण
बाकी 10 प्रतिशत समस्या बाहरी तत्वों जैसे वायु और जल प्रदूषण, जिसमें कठोर जल का उपयोग भी शामिल है, से उत्पन्न होती है। ये सब मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाते हैं जहां बाल तेजी से झड़ने लगते हैं। यह समस्या उन लोगों में ज्यादा देखी जाती है, जिनमें पहले से ही गंजेपन का जीन होता है।
हेयर फॉल में जीन महत्वपूर्ण भूमिका क्यों निभाते हैं?
डॉ. कृष्णा ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों में गंजेपन की आनुवंशिक प्रवृत्ति नहीं होती, उनके बाल आमतौर पर अस्वस्थ जीवनशैली के बावजूद बरकरार रहते हैं। इसके विपरीत, जिन लोगों में गंजेपन का जीन होता है, उनके बाल समय के साथ धीरे-धीरे पतले होने लगते हैं, चाहे उनकी आदतें कितनी भी अनुशासित क्यों न हों। इसके अलावा जब खराब जीवनशैली और आनुवंशिकी दोनों आपस में टकराती हैं, तो गंजेपन की समस्या तेज हो जाती है।
डॉ. कृष्णा कहते हैं कि उनके पिता की पीढ़ी में, गंजापन आमतौर पर 50 की उम्र के आसपास दिखाई देता था। लेकिन आज, यह समस्या कई लोगों को 18 से 20 की उम्र में ही दिखाई देने लगती है। डॉ. कृष्णा ने इसके लिए बढ़ते तनाव के स्तर, आहार में पोषक तत्वों की कमी, अनियमित नींद चक्र और आधुनिक शहरी जीवन को परिभाषित करने वाले जीवनशैली से जुड़े परिवर्तनों को जिम्मेदार ठहराया है।

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Manju Mamgainलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


