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वेट लॉस के लिए फेमस हैं 2 फास्टिंग ट्रेंड्स, एक्सपर्ट से जानें किन बातों का रखें ध्यान

वेट लॉस के लिए फेमस हैं 2 फास्टिंग ट्रेंड्स, एक्सपर्ट से जानें किन बातों का रखें ध्यान

संक्षेप:

अगर आप इन फास्टिंग रूटीन को अपनाने की सोच रहे हैं या अभी फॉलो कर रहे हैं, तो इनका असर समझना जरूरी है क्योंकि खाने का टाइम बदलने से बाथरूम की रूटीन भी बदल जाता है।

Dec 10, 2025 11:47 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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फास्टिंग ट्रेंड्स जैसे इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) (IF) और 'दिन में एक बार भोजन' (OMAD) आजकल लोगों के बीच काफी पॉपुलर हो गए हैं। लोग इन्हें वजन कम करने, मेटाबॉलिज्म ठीक करने और हेल्थ बेहतर करने के लिए अपनाते हैं। सही तरीके से किए जाएं तो इनके फायदे भी बहुत हैं, लेकिन ये खाने-पीने के पैटर्न आपकी आंतों की गतिशीलता यानी पाचन तंत्र में खाना आगे कैसे बढ़ता है, उस पर सीधा असर डालते हैं। इसलिए अगर आप इन फास्टिंग रूटीन को अपनाने की सोच रहे हैं या अभी फॉलो कर रहे हैं, तो इनका असर समझना जरूरी है क्योंकि खाने का टाइम बदलने से बाथरूम की रूटीन भी बदल जाता है।

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इंटरमिटेंट फास्टिंग

सीके बिड़ला हॉस्पिटल के जीआई और बैरिएट्रिक सर्जन डॉ. सुखविंदर सिंह सग्गू कहते हैं कि इंटरमिटेंट फास्टिंग में आमतौर पर एक फिक्स टाइम- विंडो में खाना खाया जाता है, जैसे 4 बजकर 8 मिनट या 2 बजकर 10 मिनट। इससे पाचन तंत्र को थोड़ा आराम मिलता है, जिससे कई लोगों को ब्लोटिंग की समस्मया कम होती है और पाचन भी बेहतर महसूस होता है। लेकिन लंबे फास्टिंग गेप कुछ लोगों की आंतों की गतिशीलता को धीमा भी कर सकते हैं। कई घंटे खाना न मिलने पर शरीर ‘रेस्ट मोड’ पर चला जाता है, जो कभी-कभी बॉविल मूवमेंट की फ्रीक्वेंसी कम कर देता है। खासकर अगर खाने की विंडो में पानी कम पिया जाए या फाइबर कम लिया जाए।

'दिन में एक बार भोजन' (OMAD)

'दिन में एक बार भोजन' (OMAD) का असर आंतों की गतिशीलता पर और ज्यादा होता है। दिन का सारा खाना एक ही बार में लेने से पाचन तंत्र पर एकदम से लोड आ जाता है। जिसकी वजह से व्यक्ति को भारीपन, ब्लोटिंग और खाना पेट से आगे जाने में देरी हो सकती है। एक बार में बहुत सारा खाना गट की नेचुरल मूवमेंट को धीमा कर देता है। OMAD फॉलो करने वाले लोगों में कब्ज या अनियमित मल त्याग की शिकायत आम है क्योंकि पूरे दिन गट को कम स्टिम्युलेशन मिलता है। फास्टिंग के दौरान होने वाली एक नेचुरल वेव जिसे माइग्रेटिंग मोटर कॉम्प्लेक्स (एमएमसी) कहते हैं, वो मॉडरेट फास्टिंग जैसे 16:8 में ठीक काम करता है, लेकिन 'दिन में एक बार भोजन' जैसी फास्टिंग में डिस्टरब हो सकता है।

हाइड्रेशन भी जरूरी

हाइड्रेशन भी बहुत अहम है। कई लोग फास्टिंग करते समय पानी कम पीते हैं, खासकर अगर फास्टिंग के घंटों में पानी से भी परहेज करते हों। इससे स्टूल सख्त हो सकता है और बाथरूम जाना मुश्किल हो जाता है। ऊपर से अगर खाने की विंडो में फल, सब्जियां, साबुत आनाज, नट्स और बीज जैसे फाइबर-रिच फूड्स न हों, तो आंतों की गतिशीलता और कम हो जाती है।

सलाह

इंटरमिटेंट फास्टिंग या OMAD करते समय पाचन अच्छा रखने के लिए जरूरी है कि खाने में फाइबर बढ़ाएं, खूब पानी पिएं और खाने की विंडो में बहुत भारी या तला-भुना खाना न लें। हल्की फुल्की वॉक या एक्टिविटी भी गट मूवमेंट को तेज करती है। कुल मिलाकर, फास्टिंग गट हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन अगर इसे बहुत एक्सट्रीम तरीके से या गलत खाने के साथ किया जाए, तो पाचन क्रिया धीमी और पाचन संबंधी परेशानी बढ़ सकती हैं।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain
मंजू ममगाईं लाइव हिन्दुस्तान में लाइफस्टाइल सेक्शन में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। मंजू ने अपना पीजी डिप्लोमा भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली और ग्रेजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय से किया हुआ है। इन्हें पत्रकारिता जगत में टीवी, प्रिंट और डिजिटल का कुल मिलाकर 16 साल का अनुभव है। एचटी डिजिटल से पहले मंजू आज तक, अमर उजाला, सहारा समय में भी काम कर चुकी हैं। आज तक में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन लीड करने के बाद अब मंजू एचटी डिजिटल में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए काम कर रही हैं। और पढ़ें

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