किचन में रखें इन बर्तनों को आज ही फेंक दें, नहीं तो हेल्थ को होगा नुकसान

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Know Right Time To Replace This 5 Cookware: घर की रसोई में इस्तेमाल हो रहे कौन से बर्तन कब बदलने हैं, इसका सही समय पता होना जरूरी है। जानें वो कौन से बर्तन हैं जिन्हें कब बदल देना चाहिए। जिससे सेहत को नुकसान ना हो।

किचन में रखें इन बर्तनों को आज ही फेंक दें, नहीं तो हेल्थ को होगा नुकसान

घर की सजावट, पर्दे और कुशन को साफ करने, बदलने का तो हर किसी को याद होता है। लेकिन क्या आपको रसोई में इस्तेमाल हो रहे बर्तनों को बदलने का सही समय पता है? काफी सारे लोग सालों से एक ही बर्तन को यूज करते रहते हैं। जबकि पुराने और घिस चुके, स्क्रेच खा चुके बर्तनों से हेल्थ को नुकसान होने का डर रहता है। पुराने घिसे एल्यूमिनियम के कूकर से लेकर स्क्रेच खाए हुए किसी नॉनस्टिक पैन, कड़ाही को अक्सर लोग किचन में सहेजकर रखे रहते हैं और गाहे-बगाहे यूज ही कर लेते हैं। ऐसे में जानना जरूरी है कि कौन से बर्तनों को कब रसोई से फेंक देना चाहिए।

एल्यूमिनियम के बर्तन

अब अगर आपके पास कुकर से लेकर कड़ाही सारे ही एल्यूमिनियम के हैं। तो उन्हें एक साथ बदलना पॉसिबल नही हैं। ऐसे में एक-एक करके धीरे-धीरे इन्हें चेंज करें। जिन पुराने एल्यूमिनियम के बर्तन पर से कोटिंग हट चुकी है। वो कुकिंग के वक्त खाने में एल्यूमिनियम लीच करते है। जो हेल्थ के लिए हार्मफुल है। इसलिए सबसे पहले अनकोटेड एल्यूमिनियम के बर्तन को फेंककर उसकी बजाय स्टील के कूकर और कड़ाही को घर लाएं।

पुराने, स्क्रैच वाले नॉन स्टिक पैन, कड़ाही

हर घर में लगभग एक ऐसा नॉनस्टिक पैन या कड़ाही मिल जाएगा जो काफी टाइम से कुकिंग के लिए यूज हो रहा और उसमे कई स्क्रैच पड़े होते हैं। इन स्क्रैच पड़े बर्तन को फौरन किचन से बाहर फेंक दें। क्योंकि नॉनस्टिक की डैमेज कोटिंग कैंसर का रिस्क बढ़ाती है।

अंदर से जोड़ पड़े बर्तन

जिन बर्तनों में अंदर की तरफ से जोड़ बने होते हैं। उनमे समय के साथ दरार पड़ जाती है। जिसकी वजह से कुकिंग के वक्त कुछ खाने के पार्टिकल, कार्बन और चिकनाई जमा रह जाती है। ये गंदगी आसानी से सफाई करने पर बाहर नहीं निकलते जिससे इनमे फंगस लगने का डर होता है। जो खाने के साथ मिलकर हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकती है।

पतली लेयर वाले बर्तन

अगर आपके बर्तन की तली घिस कर पतली और हल्की हो गई है तो भी उसे बदल दें। क्योंकि ऐसे बर्तन में खाना जल्दी से जल जाता है। इसलिए ऐसे पतली तली और हल्के बर्तनों को रिप्लेस कर देने में ही समझदारी है।

प्लास्टिक के डिब्बे और बर्तन

काफी सारे घरों में मसाला, नमक, तेल जैसी चीजों को स्टोर करने के लिए प्लास्टिक के डिब्बे इस्तेमाल किए जाते हैं। लेकिन समय के साथ पुराने होकर ये दिखने में खराब लगते हैं। वहीं अगर आप प्लास्टिक के बर्तन में गर्म खाना रखते हैं या सर्व करते हैं तो इन्हें भी फौरन बदल दें। गर्म खाना प्लास्टिक में स्टोर करने से हार्मफुल केमिकल रिलीज होकर खाने में मिक्स होने का डर होता है।

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लेखक के बारे में

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अपराजिता शुक्ला पिछले छह सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर कंटेट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव


अपराजिता शुक्ला पिछले छह से अधिक सालों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती आ रही हैं। करियर की शुरुआत अमर उजाला डिजिटल में इंटर्नशिप और फिर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में की। जहां पर उन्हें मिसेज इंडिया 2021 की रनर अप के इंटरव्यू को भी कवर करने का मौका मिला। वहीं अब लाइव हिन्दुस्तान में कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम कर रही हैं। अपराजिता शुक्ला ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बी.कॉम के साथ मास कम्यूनिकेशन की डिग्री ली है।


लेखन शैली और दृष्टिकोण


सरल और बेहद सामान्य भाषा में सेहत, फिटनेस और खान-पान के विषय में जानकारी देने के साथ बॉलीवुड फैशन पर निगाह रखती हैं। एक्टर-एक्ट्रेसेज के फैशन सेंस को आम लड़के-लड़कियों की पसंद-नापसंद के साथ कंफर्ट से जोड़कर टिप्स देना खासियत है। वहीं ट्रेंड में चल रहे विषयों के साथ रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाले हैक्स और टिप्स को अपने पाठकों तक पहुंचाना पसंद करती हैं।


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बॉलीवुड फैशन और आम लोगों की स्टाइल से जुड़ी जानकारी
ट्रैवल, रिलेशनशिप, कुकिंग टिप्स एंड हैक्स के साथ लाइफ की समस्याओं के निदान पर सरल भाषा में लिखना

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