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डोसा बनाने से पहले तवे पर क्यों छिड़का जाता है पानी? ट्रिक नहीं साइंस है वजह

डोसा बनाने से पहले तवे पर क्यों छिड़का जाता है पानी? ट्रिक नहीं साइंस है वजह

संक्षेप:

Reason why water is sprinkled on the dosa pan : डोसे के तवे पर पानी की छपाक सिर्फ एक आवाज नहीं, बल्कि एक 'परफेक्ट' और कुरकुरे डोसे की दस्तक है। आइए जानते हैं कैसे-

Feb 10, 2026 06:29 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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आपने अगर कभी बाजार में डोसे वाले भइया को डोसा बनाते हुए देखा होगा तो आप इस बात को जरूर जानते होंगे कि डोसा बनाने से पहले गर्म तवे पर पानी के कुछ छींटे जरूर मारे जाते हैं। क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों किया जाता है? रोटी या पराठा बनाते वक्त तो मम्मी ऐसा नहीं करती है तो फिर डोसा बनाने के लिए ही यह तरीका क्यों अपनाया जाता है। अगर आप भी इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो सबसे पहले इस बात को समझे कि डोसे के तवे पर पानी की छींटें मारना सिर्फ रसोई की कोई रस्म नहीं है, बल्कि इसके पीछे थर्मोडायनामिक्स (Thermodynamics) का एक दिलचस्प सिद्धांत काम करता है। जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'लेडेनफ्रॉस्ट इफेक्ट' (Leidenfrost Effect) कहते हैं। यह सिद्धांत 18वीं सदी में जर्मनी में सामने आया था, लेकिन भारत में इसे बिना नाम जाने ही अपनाया जाता रहा। डोसे के तवे पर पानी की छपाक सिर्फ एक आवाज नहीं, बल्कि एक 'परफेक्ट' और कुरकुरे डोसे की दस्तक होती है। आइए जानते हैं कैसे-

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1. तापमान का संतुलन (Temperature Control)

डोसा बनाने के लिए तवा बहुत गर्म होना चाहिए, लेकिन अगर वह जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाए, तो डोसा का बैटर (घोल) तवे पर चिपककर जल जाएगा और आप उसे फैला नहीं पाएंगे। पानी छिड़कने से तवे की सतह का तापमान तुरंत गिरकर उस स्तर पर आ जाता है जहां बैटर आसानी से फैल सके।

2. लेडेनफ्रॉस्ट इफेक्ट (Leidenfrost Effect)

जब पानी की बूंदें बहुत गर्म सतह पर गिरती हैं, तो वे तुरंत भाप नहीं बनतीं। इसकी जगह बूंद के नीचे की सतह भाप की एक पतली परत (Insulating layer) बना लेती है। जिसकी वजह से पानी की बूंद तवे पर 'डांस' करने लगती है। यह भाप की परत हीट ट्रांसफर का प्रोसेस हल्का कर देती है, जिससे आपको पता चल जाता है कि तवा अब डोसा फैलाने के लिए बिल्कुल तैयार है।

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3. नॉन-स्टिक गुण और क्रिस्पी बनावट

पानी छिड़क कर कपड़े से पोंछने से तवे पर मौजूद अतिरिक्त तेल या पिछले डोसे के कण हट जाते हैं, जिससे अगला डोसा एक जैसा पककर तैयार होता है। इस बात का खास ख्याल रखें कि अगर तवा कम गर्म हो, तो पानी वहीं रुक जाता है और धीरे-धीरे सूखता है। जिसका मतलब होता है कि तवा अभी डोसा बनाने के लिए तैयार नहीं हुआ है।

4. टेक्सचर

जैसे ही बैटर तवे पर गिरता है, अचानक मिले तापमान के अंतर से डोसा अंदर से नरम और बाहर से कुरकुरा बनकर तैयार होता है। हालांकि डोसा बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि पानी छिड़कने के बाद आंच धीमी करना न भूलें, वरना डोसा बीच में से जल जाएगा और किनारों से कच्चा रहेगा।

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मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।

करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।

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