कभी सोने से भी महंगे थे भारतीय मसाले! इसी वजह से दुनिया ने भारत को कहा ‘Spice King’

Mar 05, 2026 04:13 pm ISTDeepali Srivastava लाइव हिन्दुस्तान
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भारत को मसाला किंग क्यों कहा जाता है? जानिए भारतीय मसालों का इतिहास, मालाबार तट का व्यापार, आयुर्वेदिक महत्व और दुनिया में भारत का मसाला साम्राज्य।

कभी सोने से भी महंगे थे भारतीय मसाले! इसी वजह से दुनिया ने भारत को कहा ‘Spice King’

भारतीय किचन में बिना मसालों के खाना बिल्कुल अधूरा है। हर किचन में आपको गरम मसाला, हल्दी, लाल मिर्च, दालचीनी, चक्रफूल, तेजपत्ता, धनिया पाउडर, काली मिर्च, जीरा, लौंग, इलायची जरूर मिल जाएंगे। इन सभी मसालों को मिलकर बनता है जायकेदार-स्वादिष्ट खाना, जिसकी महक दूर-दूर तक पहुंच जाती है। इस देश में मसाले सिर्फ खाने का जायका नहीं बढ़ाते बल्कि उनका इस्तेमाल दवाइयों के तौर पर भी किया जाता है। आयुर्वेद में मसालों को औषधि के रूप में भी देखा जाता है। भारत में सबसे ज्यादा मसालों की पैदावार है और सिर्फ इसी देश में कई तरह के मसाले पाए जाते हैं और फिर उन्हें बाहरी देशों में भेजा जाता है। भारत को पहले सोने की चिड़िया कहा जाता था और फिर मसाला किंग के नाम से भी जाना गया। भारत ऐसे ही मसाला किंग नहीं बना, बल्कि इसके पीछे लोगों की कड़ी मेहनत की कहानी भी है। यह कहानी सिर्फ मसालों की नहीं, बल्कि उस देश की भी है जिसने स्वाद, खुशबू और औषधीय गुणों से पूरी दुनिया को प्रभावित किया। आइए जानते हैं कि आखिर भारत कैसे बना दुनिया का 'मसाला किंग'।

सोने से कीमती थे मसाले

आज हम मसालों को रोजमर्रा की चीज मानते हैं, लेकिन प्राचीन समय में इनकी कीमत सोने के बराबर थी। इतिहासकारों के अनुसार 3000 ईसा पूर्व से ही भारत के मसालों का व्यापार मिस्र, चीन और रोम जैसे देशों से होता था। उस समय काली मिर्च को “ब्लैक गोल्ड” कहा जाता था, क्योंकि यह बेहद कीमती और दुर्लभ मानी जाती थी। दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट, खासकर केरल के मालाबार तट पर उगने वाली काली मिर्च पूरी दुनिया में मशहूर थी। इतिहासकार बताते हैं कि रोमन साम्राज्य हर साल भारत से मसाले खरीदने में भारी धन खर्च करता था। इससे साफ पता चलता है कि भारतीय मसाले वैश्विक अर्थव्यवस्था में कितने महत्वपूर्ण थे।

मसाला केंद्र था मालाबार तट

भारत के मसाला व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र केरल का मालाबार तट था। यहां के बंदरगाहों से मसाले अरब, यूरोप और एशिया के कई देशों तक भेजे जाते थे। मध्यकाल में कालीकट (आज का कोझिकोड) को “City of Spices” कहा जाता था क्योंकि यह पूर्व और पश्चिम के बीच मसाला व्यापार का प्रमुख केंद्र था। अरब व्यापारी सदियों तक भारतीय मसालों को यूरोप तक पहुंचाते रहे। बाद में पुर्तगाली, डच और ब्रिटिश व्यापारी भी इस व्यापार में शामिल हो गए। यही कारण है कि कई यूरोपीय शक्तियों ने भारत में अपने व्यापारिक ठिकाने स्थापित किए।

मसालों का स्वर्ग

भारत को “Spice King” बनाने में इसकी विविध जलवायु और मिट्टी का सबसे बड़ा योगदान है। यहां लगभग हर प्रकार के मसाले उगाए जा सकते हैं। भारत में आज भी दुनिया के कई प्रमुख मसाले पैदा होते हैं, जैसे हल्दी, काली मिर्च, दालचीनी, लौंग, इलायची वगैरह। भारतीय मसालों की खासियत सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि उनके औषधीय गुण भी हैं। आयुर्वेद में हजारों साल पहले से मसालों का इस्तेमाल दवाओं के रूप में किया जाता रहा है। हल्दी – एंटीसेप्टिक और एंटी-इन्फ्लेमेटरी, अदरक – पाचन में मददगार, इलायची – सांस और पाचन के लिए फायदेमंद, दालचीनी – रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में सहायक, जायफल- पेट की समस्या के लिए।

आज भी है भारी डिमांड

भारत में आज भी मसालों की पैदावार सबसे ज्यादा होती है और फिर इन्हें विदेशों में निर्यात किया जाता है। आज भी भारत वैश्विक मसाला उद्योग में अग्रणी है। भारत लगभग 109 में से 75 प्रकार के मसालों का उत्पादन करता है और वैश्विक उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा यहीं से आता है। भारतीय सरकार ने मसालों के निर्यात और गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए Spices Board of India की स्थापना की है, जो मसालों के उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देता है। दिल्ली का खारी बावली बाजार आज एशिया का सबसे बड़ा मसाला बाजार माना जाता है, जहां दुनिया भर से व्यापारी मसाले खरीदने आते हैं।

Deepali Srivastava

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Deepali Srivastava

दीपाली श्रीवास्तव पिछले 8 वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और 5 सालों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में डेप्युटी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। संस्थान में साल 2021 में वेब स्टोरी से अपने सफर की शुरुआत करने के बाद, वह आज लाइफस्टाइल टीम का अहम हिस्सा हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स, यूजर बिहेवियर और पाठकों की रुचि को समझने में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद और प्रभावशाली कंटेंट प्रोफेशनल बनाती है।


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